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भारत ने अरुणाचल में तैनात की ब्रह्मोस मिसाइलें तो भड़केे चीन ने दे डाली धमकी, जानें ड्रैगन को सता रहा कौन सा डर?

पीएलए डेली का दावा है कि भारत ने अपने 'जवाबी संतुलन कायम करने और टकराव पैदा करने' के नजरिए की वजह से यह कदम उठाया है।

Author नई दिल्‍ली | August 22, 2016 12:31 PM
हाल ही में भारत सरकार ने चीन सीमा पर तैनात करने के लिए ब्रम्होस रेजिमेंट को मंजूरी दी है। (फाइल फोटो)

चीन से सटे अरुणाचल प्रदेश में ब्रह्मोस मिसाइलें तैनात करने के भारत के फैसले पर पड़ोसी मुल्‍क बुरी तरह भड़क गया है। चीन की पीपल्‍स लिब्रेशन आर्मी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। चीनी सेना के आधिकारिक मुखपत्र द पीएलए डेली में भारत को चेतावनी दी गई है कि चीन भी इस तरह के कदम उठा सकता है, जिससे रिश्‍तों पर न केवल नकारात्‍मक प्रभाव पड़ेगा, बल्‍क‍ि क्षेत्रीय संतुलन पर भी असर पड़ेगा। इस हफ्ते प्रकाशित एक आर्टिकल में पीएलए डेली में लिखा है, ”भारत ने बॉर्डर पर सुपरसोनिक मिसाइलें तैनात करके आत्‍मरक्षा की जरूरत की सीमा को पार कर गया है। भारत के इस कदम से चीन के तिब्‍बत और युनान प्रांत के लिए गंभीर खतरा पैदा हो गया है।”

पीएलए डेली का दावा है कि भारत ने अपने ‘जवाबी संतुलन कायम करने और टकराव पैदा करने’ के नजरिए की वजह से यह कदम उठाया है।यह भी कहा कि भारत सीमाई इलाकों में सुखोई विमानों और ड्रोन्‍स की तैनाती करके सैन्‍य दृष्‍ट‍िकोण से फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है। पीएल डेली में ब्रह्मोस मिसाइलों की क्षमता की तारीफ करते हुए कहा गया कि इसकी वजह से चीन के सीमा से सटे इलाकों के लिए खतरा पैदा हो गया है। हालांकि, यह भी कहा गया कि कुछ खामियों की वजह से ये मिसाइलें चीन के अंदरूनी इलाकों को निशाना बनाने में अक्षम हैं।

बता दें कि इस महीने की शुरुआत में ही एनडीए सरकार ने सेना को सामरिक दृष्‍ट‍िकोण से अहम माने जाने वाले इस क्षेत्र में ब्रह्मोस मिसाइल के एडवांस्‍ड वर्जन की तैनाती के लिए रजामंदी दी है। इससे पहले, पीएम नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्‍युरिटी ने ब्रह्मोस मिसाइलों की चौथी रेजीमेंट बनाने को मंजूरी दी थी। इस प्रोजेक्‍ट पर 4300 करोड़ रुपए की लागत आने की उम्‍मीद है। इस रेजिमेंट में करीब 100 मिसाइलें, पांच ऑटोमेटिक मोबाइल लॉन्‍चर्स, कई हेवी ड्यूटी ट्रक और एक मोबाइल कमांड पोस्‍ट होगा।

क्‍यों डरा चीन
ब्रह्मोस मिसाइलों की रेंज 290 किमी होती है। इसे रूस की मदद से तैयार किया गया है। आर्मी ने इसके कई टेस्‍ट किए हैं। आखिरी टेस्‍ट मई 2015 में ईस्‍टर्न सेक्‍टर में किए गए। इन मिसाइलों की एक खासियत यह भी है कि ये पहाड़ों के संकरे इलाकों में छिपे लक्ष्‍यों को निशाना बना सकती है। इसे किसी भी प्‍लेटफॉर्म, मसलन-सबमरीन, शिप, एयरक्राफ्ट और जमीन पर लगे मोबाइल लॉन्‍चर्स के जरिए दागा जा सकता है। यह मिसाइल ध्‍वनि की रफ्तार के मुकाबले 2.8 गुना रफ्तार से चलती है। यह 300 किलो वजन तक के पारंपिक आयुध ढोने में सक्षम है। चीन मानता है कि इन मिसाइलों की जद में आने वाले उसके सीमा से सटे इलाकों पर तेज और सटीक हमला किया जा सकता है।

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