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मुसलमानों को बड़े पैमाने पर हिरासत में ले रहा चीन, जानिए क्या है ड्रैगन का मकसद

शी जिनपिंग सरकार मुस्लिमों को हिरासत में लेकर उनके विचार परिवर्तन संबंधी आरोपों को नकार रही है। यूएन के जेनेवा में पिछले महीने हुई बैठक में चीन की तरफ से कहा गया है कि सरकार यहां मुस्लिमों को लेकर ऐसा कोई कैंप नहीं चला रही है।

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है। (Express Photo)

चीन में मुस्लिम समुदाय के लोगों को धड़ाधड़ हिरासत में लिया जा रहा है। पश्चिमी चीन में मुस्लिम समुदाय के लोगों से कहा जा रहा है कि वो ना सिर्फ चीन की भाषा सीखें बल्कि कानून की पढ़ाई करें, अपना विचार परिवर्तन करें और अपने ही समुदाय के लिए आलोचनात्मक लेख भी लिखें। 41 साल के अब्दुसलाम मुहमेत ने बतलाया है कि उन्हें पुलिस ने उस वक्त हिरासत में ले लिया जब वो कुरान की कुछ आयतें पढ़ रहे थे। दरअसल अब्दुसलाम एक अंतिम संस्कार से लौट रहे थे और रास्ते में वो कुरान को दोहराते हुए जा रहे थें। लेकिन पुलिस वालों ने उन्हें तुरंत हिरासत में ले लिया और उन्हें एक खास कैंप में ले जाया गया। इस कैंप में मुस्लिम समुदाय के कई और लोग पहले से ही मौजूद थे। इन सभी लोगों से कहा गया कि वो अपनी पुरानी जिंदगी और मान्यताओं को भूल जाएं तथा उइगर मुसलमान के तौर पर अपनी पहचान को जल्दी से जल्दी खत्म करें। यह कैंप प्राचीन ओआसिस शहर में बनाया गया है। इस कैंप में लाए जा रहे मुसलमानों का ब्रेनवॉश किया जा रहा है।

एक बड़े से बिल्डिंग में बनाए गए इस कैंप में मुस्लिमों को चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी के समर्थन में गीत गाना, जॉब के लिए प्रशिक्षण और चीन की राजनीतिक विचारधारा पर भाषण दिये जाते हैं। यहां से निकलने वाले लोगों का यह कहना है कि इस कार्यक्रम के जरिए ड्रैगन किसी भी तरह से इस्लाम के प्रति उनके विश्वास को खत्म करना चाहता है। बिना किसी अपराध के इन लोगों को कैंप में रखने के पीछे मुस्लिमों को अपनी धार्मिक मान्यताओं से दूर कर उन्हें पूरी तरह से चीनी राष्ट्रवाद के रंग में रंगना है। हाल ही में इन कैंपों से निकले लोगों ने न्यूयॉर्क टाइम्स से बातचीत के दौरान कहा था कि इन शिक्षा के जरिए ट्रांफॉरमेशन के नाम से चलाए जा रहे इन कैंपों में उन्हें शारीरीक और मानसिक रुप से प्रताड़ित किया जा रहा है।

यहां आपको बता दें कि चीन में शिनझियांग में एक अनुमान के मुताबिक लगभग 2.3 करोड़ मुस्लिम हैं। पिछले कुछ वर्षों में इन मुसलमानों पर जबरदस्त पाबंदी लगाई गई है। 2014 में एक संघर्ष के बाद चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने उइगर मुसलमानों के खिलाफ बहुत कठोर कदम उठाए। उनके अपराध को चीन में एक तरह से माफ नहीं किया जा सकने वाला मान लिया गया और उन पर राजकीय सख्ती बहुत बढ़ा दी गई।

कहा जा रहा है कि माओ के शासनकाल के बाद यह विचार परिवर्तन का सबसे बड़ा कैंप है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय और मानवाधिकार संगठनों ने चीन के इस कदम की आलोचना की है। हालांकि चीन की शी जिनपिंग सरकार मुस्लिमों को हिरासत में लेकर उनके विचार परिवर्तन संबंधी आरोपों को नकार रही है। यूएन के जेनेवा में पिछले महीने हुई बैठक में चीन की तरफ से कहा गया है कि सरकार यहां मुस्लिमों को लेकर ऐसा कोई कैंप नहीं चला रही है।

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