चीन अपने न्यूक्लियर फैसिलिटी के पास बड़े पैमाने पर अपना मिलिट्री बेस बना रहा है। माना जा रहा कि चीन ऐसा इसलिए कर रहा है जिससे कभी परमाणु हथियारों के खिलाफ जंग हो तो अमेरिका का पहला हमला चीन के जवाबी कार्रवाई को रोक न सके। ऐसा लग रहा कि चीन ईरान और अमेरिका जंग से सीख भी ले रहा है।
रायटर्स के मुताबिक, चीन अपने न्यूक्यिलर फैसिलिटी के आसपास बड़े पैमाने पर सैन्य बेस बना रहा है, जो कि सैटेलाइट से ली गई तस्वीरों से देखी गई है। तस्वीरों से पता चलता है कि चीन अपने दूरस्थ न्यूक्लियर मिसाइल बेस के पास लॉन्चिंग पैड, बंकर और कम्युनिकेशन सुविधाओं का एक बड़ा नेटवर्क बना रहा है, जहाँ चीन की कुछ सबसे लंबी दूरी की मिसाइलें रखी हुई हैं।
तस्वीरों में दिखे 80 से अधिक जगह
इन तस्वीरों में 80 से ज्यादा ऐसे जगह दिखाए गए हैं जिनका इस्तेमाल चीन के बढ़ते मोबाइल मिसाइल लॉन्चर और एयर डिफेंस सिस्टम के बेड़े द्वारा संभावित रूप से किया जा सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया कि तीन सुरक्षा विश्लेषकों के अनुसार, तस्वीरों में ऐसी फैसिलिटी भी दिखाई देती हैं जिनका उपयोग इलेक्ट्रॉनिक वॉर, सैटेलाइट कम्युनिकेशन और कमान कार्यों के लिए किया जा सकता है।
सैन्य सुविधा के निर्माण कार्य का पैमाना यह बता रहा है कि चीन के जमीनी परमाणु बलों का समर्थन और सुरक्षा करने के लिए किलेबंदी वाले बुनियादी ढांचे का बड़े पैमाने पर निर्माण हो रहा है।
चीन मानता है भारत की तरह पॉलिसी
चीन ने न्यूक्लियर हथियारों को लेकर भारत की तरह ‘नो फर्स्ट यूज’ यानी पहले हमला नहीं करने की पॉलिसी अपना रखी है। हालांकि कुछ पश्चिमी राजदूतों और विशेषज्ञों का मानना है कि चीन ताइवान से जुड़े किसी भी संघर्ष में विदेशी हस्तक्षेप रोकने के लिए न्यूक्लियर पावर का इस्तेमाल कर सकता है।
मई के शुरुआत में ही चीन के राष्ट्रपति ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को चेतावनी दी थी कि ताइवान को लेकर चल रहे विवादों को ठीक से न संभाल पाने की स्थिति में दोनों देश एक खतरनाक मोड़ पर पहुंच सकते हैं। चीन ताइवान का अपना हिस्सा मानता है। हालांकि ताइवान की सरकार चीन के इस संप्रभुता के दावे को सिरे से खारिज करती है।
कहाँ बना ये ढांचा?
चीनी रेगिस्तान में यह नया ढांचा दो अष्टकोणीय कॉम्प्लेक्स जैसी दिखती है, इन्हें पिछले छह सालों में पूर्वी शिनजियांग में बना गया है। ये दोनों जगहों हामी न्यूक्लियर मिसाइल फील्ड के दक्षिण-पश्चिम में स्थित है। एक जगह करीब 140 किमी दूर है, तो दूसरी जगह मिसाइट साइस से करीब 230 किमी दूर है।
खास बात यह है कि लोप नूर न्यूक्लियर टेस्टिंग इलाके के दक्षिण स्थित एक तीसरा अष्टकोणीय कॉम्प्लेक्स अभी बनने के शुरुआती चरण में है। ऐसा लगता है कि यह एक टारगेट रेंज के तौर पर काम कर रहा है।
तस्वीरों में क्या दिखा?
रायटर्स के मुताबिक, सैटेलाइट तस्वीरों में इन दोनों अष्टकोणीय कंपाउंड में कर्मचारियों के रहने की जगह और बड़े मिलिट्री वाहनों के लिए जगह शामिल हैं। इनके पास ही बख्तरबंद बंकर, हथियारों के स्टोरेज की मजबूत सुविधाएं, एयरपोर्ट और रेल टर्मिनल हैं, जो इन कॉम्प्लेक्स को हामी मिसाइल फील्ड से जोड़ते हैं।
चीन के परमाणु कार्यक्रम में मिलेगी मदद
रॉयटर्स से बात करने वाले पाँच सुरक्षा विशेषज्ञों ने इस बात पर सहमति जताई कि ये सुविधाएँ चीन के परमाणु कार्यक्रम को समर्थन देने में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं, और साथ ही अन्य सैन्य कार्यों को भी पूरा कर सकती हैं।
हालाँकि, उन्होंने आगाह किया कि कई विवरण अभी भी स्पष्ट नहीं हैं; इनमें यह शामिल है कि इन लॉन्च स्थलों पर अंततः कौन से हथियार तैनात किए जा सकते हैं, और क्या इन अष्टकोणीय परिसरों में ट्रक पर लगी बैलिस्टिक मिसाइलें हैं या फिर परमाणु वॉरहेड लगाने के लिए इस्तेमाल होने वाली फैसिलिटी।
खास बात यह है कि हर अष्टकोणीय कॉम्प्लेक्स, कच्ची सड़कों और नालियों के एक बड़े नेटवर्क से जुड़ा है, जो आस-पास के रेगिस्तान में काफी अंदर तक फैला हुआ है। ये रास्ते पथरीले इलाकों और सूखी नदी-नालों के बीच बने कंक्रीट के चबूतरों से जुड़े दिख रहे हैं।
तीन सुरक्षा विशेषज्ञों ने रॉयटर्स को बताया कि इन चबूतरों का इस्तेमाल मोबाइल एयर-डिफेंस सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर के सामान या, कुछ बड़ी जगहों पर, सड़क पर चलने वाले इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चर के लिए किया जा सकता है।
सबसे उत्तरी अष्टकोणीय कॉम्प्लेक्स में, विश्लेषकों ने बताया कि एक ऐसी चीज का निर्माण भी चल रहा है जो शायद कोई अंतरिक्ष या माइक्रोवेव संचार सुविधा हो सकती है। उन्होंने तस्वीरों में दिख रहे सैटेलाइट डिश और दो बड़े टावरों की ओर इशारा किया।
हालांकि चीन के सेना पीपल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) पनडुब्बियों और विमानों से परमाणु हथियार लॉन्च करने में सक्षम है, फिर भी उत्तर-पश्चिमी चीन के शिनजियांग और गांसु में मौजूद मिसाइल साइलो क्षेत्र ही उसके परमाणु हथियारों को मजबूती प्रदान करते हैं।
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