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सात दिन में दूसरी बार चीन नेे पाकिस्‍तान को घुड़का, युद्ध होने पर साथ देने की खबरों का किया खंडन

चीन ने कहा, ‘कश्मीर मुद्दे के संबंध में हमारा मानना है कि यह मुद्दा इतिहास से विरासत में मिला है। इसे वार्ता के जरिए हल किया जाना चाहिए।'

Author बीजिंग | September 26, 2016 5:44 PM
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ (दाएं) और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग। (AP| File Photo)

एक हफ्ते के अंदर दूसरी बार चीन ने पाकिस्तान की मीडिया में युद्ध की स्थिति में उसका साथ देने और कश्मीर मुद्दे पर उसके दावे का समर्थन करने वाली खबरों का सोमवार (26 सितंबर) को खंडन किया। ‘एक दोस्त और पड़ोसी’ के नाते चीन एक बार फिर भारत और पाकिस्तान से अपील करता है कि कश्मीर सहित विभिन्न विवादों के ‘उचित’ समाधान के लिए वार्ता करे जो ‘विरासत में मिले हैं।’ उसने क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए संयुक्त रूप से काम करने के लिए भी कहा। लाहौर में पाकिस्तान के महावाणिज्यदूत यू बोरेन की कथित टिप्पणी के बारे में पूछने पर कि क्या युद्ध होने या कश्मीर के मुद्दे पर चीन इस्लामाबाद का समर्थन करेगा तो चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने संवाददाताओं से कहा कि राजदूत के इस तरह की किसी टिप्पणी के बारे में उन्हें जानकारी नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘जो आप बता रहे हैं उस स्थिति के बारे में मुझे नहीं पता। लेकिन समसामयिक मुद्दे पर चीन का रुख स्थिर और स्पष्ट है।’ उन्होंने कहा, ‘पाकिस्तान और भारत दोनों के पड़ोसी और दोस्त के रूप में हमें उम्मीद है कि दोनों देश अपने मतभेदों का समाधान वार्ता और विचार-विमर्श, स्थिति को नियंत्रित और प्रबंध कर करेंगे और दक्षिण एशिया की शांति और स्थिरता तथा क्षेत्र की प्रगति के लिए काम करेंगे।’ उन्होंने कहा, ‘कश्मीर मुद्दे के संबंध में हमारा मानना है कि यह मुद्दा इतिहास से विरासत में मिला है। हमें उम्मीद है कि संबंधित पक्ष शांतिपूर्ण तरीके से और उचित तरीके से मुद्दे का समाधान करेंगे।’ वह पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के मुख्यमंत्री शाहबाज शरीफ से यू की मुलाकात के दौरान महावाणिज्य दूत की टिप्पणियों के बारे में पूछे गए सवालों का जवाब दे रहे थे।

पाकिस्तानी अखबार डॉन ने लाहौर में चीन के महावाणिज्य दूत यू को पंजाब के मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा मीडिया को जारी प्रेस विज्ञप्ति के हवाले से लिखा, ‘किसी (विदेशी) युद्ध की स्थिति में हमारा देश पाकिस्तान को पूरा समर्थन करेगा।’ रिपोर्ट में यू के हवाले से लिखा गया है, ‘कश्मीर मुद्दे पर हम पाकिस्तान के साथ हैं और रहेंगे। नि:शस्त्र कश्मीरियों पर अत्याचार को सही नहीं ठहराया जा सकता और कश्मीरियों की इच्छा के मुताबिक कश्मीर विवाद का समाधान किया जाना चाहिए।’

22 सितम्बर के बाद सोमवार (26 सितंबर) को दूसरी बार चीन की यह प्रतिक्रिया सामने आई है कि इसने पाकिस्तानी मीडिया की खबरों से खुद को दूर रखा जिसमें कश्मीर मुद्दे पर बीजिंग को पाकिस्तान के साथ बताया गया। चीन के प्रधानमंत्री ली किकियांग और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के बीच न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर बैठक पर चीन ने बीजिंग द्वारा इस्लामाबाद के समर्थन की पुष्टि करने से इंकार किया है।

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