अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता विफल हो गई। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकेबंदी करेंगे। इस पर चीन ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है और इसे खतरनाक कदम बताया है। चीन के विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि ईरानी पोर्ट्स पर अमेरिकी नाकेबंदी खतरनाक और गैर-ज़िम्मेदाराना है। चीन ने कहा है कि इससे सिर्फ़ तनाव बढ़ेगा।
अमेरिका पर चीन का निशाना
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा कि संबंधित पक्षकारों के बीच तय हुए टेम्पररी सीज़फ़ायर के बावजूद अमेरिका ने मिलिट्री डिप्लॉयमेंट बढ़ा दी है और नाकेबंदी कर दी है। इससे लड़ाई और बढ़ेगी, नाज़ुक सीज़फ़ायर कमज़ोर होगा और जलमार्ग से नेविगेशन की सुरक्षा और खतरे में पड़ जाएगी।
जियाकुन गुओ ने आगे कहा कि चीन सभी पार्टियों से सीज़फ़ायर का सम्मान करने, बातचीत और शांति वार्ता के लिए कमिटेड रहने, इलाके के तनाव को कम करने के लिए प्रैक्टिकल कदम उठाने और स्ट्रेट में जल्द से जल्द नॉर्मल रास्ता बहाल करने की अपील करता है। चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा, “हमारा मानना है कि सिर्फ़ पूरा सीज़फ़ायर ही हालात को आसान बनाने में मदद कर सकता है। चीन मिडिल ईस्ट में शांति और स्थिरता वापस लाने में मदद करने की कोशिश करेगा। हालात नाजुक मोड़ पर है।” चीन ने कहा कि हमारे द्वारा ईरान को हथियार आपूर्ति करने की खबरें पूरी तरह से मनगढ़ंत हैं।
फिर वार्ता कर सकते हैं ईरान-अमेरिका
15 दिन के सीजफायर खत्म होने से पहले ईरान और अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल एक बार फिर से आमने-सामने की बैठक कर सकते हैं। हालांकि तारीख और जगह अभी तक तय नहीं हो पाया है। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल एक और आमने-सामने मीटिंग करने की संभावना पर विचार कर रहे हैं। एक क्षेत्रीय सूत्र ने CNN को बताया कि बातचीत का एक और दौर अभी भी मुमकिन है और खबर है कि तुर्की दोनों पक्षों के बीच मतभेदों को दूर करने के लिए काम कर रहा है। बातचीत के लिए इस्लामाबाद को फाइनल करने से पहले, जिनेवा, वियना और इस्तांबुल समेत कई जगहों पर विचार किया जा रहा था।
