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इन मुस्लिमों की बीवियों को अगवा कर रहा चीन! पीड़ित पाकिस्तानियों ने बयां किया दर्द

चीन ने इलाके में अपना प्रभुत्व बनाए रखने के लिए अपने यहां रहने वाले मुस्लिम समुदाय पर कई तरह के धार्मिक प्रतिबंध जैसे- खुले में नमाज अदा करना, बुर्के पर रोक और मुस्लिम नाम रखने आदि पर रोक लगा दी है।

अपनी परेशानी बताता एक पाकिस्तानी, जिसकी बीवी को चीन में नजरबंद रखा गया है। (AP Photo)

चीन पर कम्यूनिस्ट पार्टी का शासन है, जिसे नास्तिक माना जाता है। लेकिन अब चीन में भी धर्म एक अहम मुद्दा बनता जा रहा है। दरअसल चीन अपने यहां मुस्लिम कट्टरपंथ के उभार से चिंतित है। चीन का जिनजियांग प्रांत उइगुर मुस्लिम बहुल है और यहां इस्लाम के प्रचार प्रसार को रोकने के लिए चीन की सरकार ने कई तरह के प्रतिबंध लगाए हुए हैं। स्थिति ये है कि बड़ी संख्या में मुस्लिमों को नजरबंदी कैंपों में रखा गया है, जहां उन्हें चीन सरकार द्वारा फिर से शिक्षित करने की बात की जा रही है। इसके लिए चीन की आलोचना भी हो रही है। लेकिन चीन की इस समस्या से पाकिस्तान भी प्रभावित हो रहा है। दरअसल कई पाकिस्तानी नागरिक व्यापार के सिलसिले में चीन में रहते हैं और उन्होंने वहां चीन के पारंपरिक उइगुर समुदाय की महिलाओं के साथ शादी की हुई है। अब चीन ने इन पाकिस्तानी नागरिकों की पत्नियों और बच्चों को भी हिरासत में लेकर नजरबंदी कैंपों में रखा हुआ है। ऐसे में ये पाकिस्तानी नागरिक चीन के साथ ही पाकिस्तान की सरकार से भी मदद की गुहार लगा रहे हैं। लेकिन अभी तक इन पाकिस्तानी नागरिकों को उनकी चीनी पत्नियों से मिलने की इजाजत नहीं मिल सकी है।

एक पाकिस्तानी नागरिक चौधरी जावेद अट्टा ने न्यूज एजेंसी एपी के साथ बातचीत में बताया कि वह व्यापार के सिलसिले में चीन की मुस्लिम बहुल जिनजियांग प्रांत में रहते थे। करीब एक साल पहले वह अपना वीजा रिन्यू कराने के लिए पाकिस्तान आए थे। इसी दौरान चीन ने उनकी पत्नी और बच्चों को हिरासत में लेकर नजरबंदी कैंप भेज दिया है। उनके बच्चे नजरबंदी कैंप में स्थित बाल सुधार गृह में रखा गया है। वहीं पत्नी को नजरबंदी कैंप में ही उनसे अलग रखा गया है। जावेद अट्टा के अनुसार, उनकी तरह ही 200 अन्य पाकिस्तानी नागरिकों की चीनी पत्नियों को चीन ने नजरबंदी कैंप में रखा हुआ है और कोई भी उनसे नहीं मिल पा रहा है।

चीन क्यों मुस्लिमों को नजरबंदी कैंप में रख रहा है?: चीन की पारंपरिक मुस्लिम आबादी उइगुर, कजाख है, जो कि चीन के जिनजियांग प्रांत में रहते हैं। इस इलाके को प्राकृतिक संसाधनों के मामले में काफी धनी माना जाता है। लेकिन पिछले कुछ सालों में यहां अलगाववाद और कट्टरपंथ बढ़ा है। जिसके चलते यहां सांप्रदायिक दंगों की घटनाएं हुई हैं। यही वजह है कि चीन इस इलाके में अपना प्रभुत्व बनाए रखने के लिए यहां रहने वाले मुस्लिम समुदाय पर कई तरह के धार्मिक प्रतिबंध जैसे- खुले में नमाज अदा करना, बुर्के पर रोक और मुस्लिम नाम रखने आदि पर रोक लगा दी है। अब ऐसी खबरें आ रही हैं कि चीन यहां अपने पारंपरिक हान समुदाय के लोगों को बसा रहा है, जिससे टकराव और ज्यादा बढ़ा है। चीन ने कई नजरबंदी कैंप बनाए हैं, जहां लाखों लोगों को हिरासत में लेकर उन्हें फिर से शिक्षित करने की बात की जा रही है। कई रिपोर्ट के अनुसार, चीन के इन नजरबंदी कैंपों में बंद मुस्लिम नागरिकों की संख्या 10 लाख के करीब है।

Wang Yi चीनी विदेश मंत्री वांग यी। (AP Photo)

मुस्लिम राष्ट्रों ने साध रखी है चुप्पीः चीन की इन ज्यादतियों के खिलाफ दबी आवाज में बातें हो रही हैं। लेकिन चूंकि चीन ने पूरी दुनिया में कई मुस्लिम देशों में तगड़ा निवेश किया हुआ है। इसके चलते कोई भी देश इस मामले में चीन की आलोचना कर उसकी नाराजगी मोल नहीं लेना चाहता। पाकिस्तान में भी यही स्थिति है। चीन ने पाकिस्तान में विभिन्न परियोजनाओं में करीब 75 अरब डॉलर का निवेश किया है। जिसके कारण पाकिस्तान चीन के आंतरिक मामलों में बोलने से डर रहा है। हालांकि इससे पहले दुनिया में इस्लाम के मुद्दों पर पूरी दुनिया के मुस्लिम राष्ट्र एकजुट हो जाते हैं, लेकिन चीन के खिलाफ कोई भी देश आवाज उठाने से डर रहा है।

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