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मच्छर की मार : अब चिकनगुनिया का वार

डेंगू के डंक से मुकाबला कर रही दिल्ली में अब चिकनगुनिया का खतरा भी मंडरा गया है। राष्ट्रीय राजधानी में इसके मामले तेजी से बढ़े हैं। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में इस साल चिकनगुनिया के 20 मामले दर्ज हुए हैं।

Author नई दिल्ली | August 26, 2016 01:21 am
लेकिन डॉक्टरों का दावा है कि राष्ट्रीय राजधानी में इस साल चिकनगुनिया के डेंगू से भी ज्यादा मामले आए हैं।

डेंगू के डंक से मुकाबला कर रही दिल्ली में अब चिकनगुनिया का खतरा भी मंडरा गया है। राष्ट्रीय राजधानी में इसके मामले तेजी से बढ़े हैं।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में इस साल चिकनगुनिया के 20 मामले दर्ज हुए हैं। लेकिन डॉक्टरों का दावा है कि राष्ट्रीय राजधानी में इस साल चिकनगुनिया के डेंगू से भी ज्यादा मामले आए हैं। निजी अस्पतालों में चिकनगुनिया के लक्षणों वाले मरीजों की जांच के बाद 50 फीसद मामलों में बीमारी की पुष्टि हुई। एम्स के सूक्ष्मजीव विज्ञान विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल 712 मरीजों की चिकनगुनिया के लिए जांच की गई थी जिनमें से 391 मामलों में बीमारी की पुष्टि हुई है। एक जुलाई से लेकर 20 अगस्त तक 362 मामले पॉजिटिव पाए गए थे। हालांकि एम्स के मरीजों के आंकड़ों को दिल्ली का आंकड़ा नहीं माना जा सकता, क्योंकि यहां बहुत से मरीज दिल्ली के बाहर के भी होते हैं। पिछले साल दिल्ली में इसके 62 मामले दर्ज हुए थे।

एम्स में सूक्ष्मजीव बाकी विज्ञान विभाग के ललित डार ने कहा कि डेंगू मामलों की तुलना में इसके रोगियों में जोड़ों का दर्द लंबा खिंचता है, विशेषकर बुजुर्गों को बहुत कष्ट हो जाता है। हालांकि लोगों को चिंता नहीं करनी चाहिए क्योंकि इसमें डेंगू की तरह मौत नहीं होती। राष्ट्रीय वाहक जनक रोग नियंत्रण कार्यक्रम (एनवीबीडीसीपी) निदेशक एसी धारीवाल ने बताया कि यह रोग एडिस एजेयिप्टि मच्छर से होता है। धारीवाल और अन्य स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चिकनगुनिया मामलों में सहसा वृद्धि होने की बात स्वीकार की है, लेकिन लोगों से परेशान नहीं होने को कहा है। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने लोगों को सलाह दी है कि वे अस्पताल में भर्ती होने के लिए हड़बड़ी नहीं मचाएं और घबराए नहीं।

अफ्रीका से एशिया तक मचाया कहर
विशेषज्ञों का कहना है कि चिकनगुनिया का विषाणु सबसे पहले अफ्रीका में पैदा हुआ और वहां से एशिया तक पहुंचा। दक्षिण तंजानिया में 1952 में सबसे पहले इस रोग की पहचान हुई। वहीं 1958 में बैंकॉक में पहले एशियाई देश में इसका कहर टूटा। इसके बाद 1963 में कोलकाता में आधिकारिक रूप से चिकनगुनिया का पहला मामला दर्ज हुआ था। इसके बाद कंबोडिया, वियतनाम, लाओस, म्यांमार, मलेशिया और इंडोनिशया में चिकनगुनिया ने पांव पसारे। 1999-2000 में किनशासा में इसने महामारी की तरह तबाही मचाई थी। भारत में सबसे पहले 1963 में कोलकाता में इसका मामला दर्ज किया गया था। चेन्नई में 1965 और महाराष्टÑ में 1973 में इसके कई मामले दर्ज हुए। पिछली बार 2006 में इस मच्छर जनित बीमारी का प्रकोप आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्टÑ में फैला था। अब इस बीमारी ने एक बार फिर से पांव पसारे हैं।

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