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‘चंडीगढ़-सिक्किम पार्क-नालंदा विश्वविद्यालय’ यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल

पेरिस स्थित संगठन ने फ्रांसीसी स्विस वास्तुकार ले कोरबुसियर के कार्य को विश्व विरासत स्थलों में शामिल किया। इसमें भारतीय शहर चंडीगढ़ भी है
Author इस्तांबुल/नई दिल्ली | July 17, 2016 21:59 pm
तुर्की में नाकाम तख्तापलट के कारण एक दिन स्थगित रहने के बाद रविवार (17 जुलाई) को बैठक हुई।(फोटो-रॉयटर्स)

यूनेस्को ने रविवार (17 जुलाई) को चंडीगढ़ के केपीटोल कांप्लेक्स और सिक्किम के कंचनचंघा पार्क को अपने विश्व विरासत स्थलों में शामिल कर इस साल भारत से जुड़े तीनों नामांकनों को मंजूरी दे दी। रविवार (17 जुलाई) की मंजूरी के दो दिन पहले इस्तांबुल में विश्व विरासत समिति के 40 वें सत्र में बिहार में नालंदा विश्वविद्यालय के पुरातात्विक स्थल को मंजूरी दी गई थी। संस्कृति मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि पहली बार है जब किसी देश के तीन स्थलों को समिति की बैठक के एक ही सत्र में विश्व विरासत सूची में जगह मिली हो। तुर्की में नाकाम तख्तापलट के कारण एक दिन स्थगित रहने के बाद रविवार (17 जुलाई) को बैठक हुई।

भारत के संस्कृति मंत्रालय ने ट्वीट किया, ‘बहुप्रतिक्षित सपना पूरा हुआ। चंडीगढ़ का कैपिटोल कांप्लेक्स अब विश्व धरोहर स्थल है। शुक्रिया यूनेस्को…रूचिरा कम्बोज।’ रूचिरा कम्बोज यूनेस्को में भारत की दूत हैं। एक अन्य ट्वीट में यूनेस्को महानिदेशक इरिना बोकोवा को टैग करते हुए मंत्रालय ने कहा, ‘भारत का कंचनजंघा राष्ट्रीय पार्क अब विश्व विरासत स्थल है। शुक्रिया यूनेस्को…इरिनाबोकोवा।’

कैपिटोल कांप्लेक्स सात देशों (फ्रांस, स्विटजरलैंड, बेल्जियम, जर्मनी, अर्जेंटीना, जापान और भारत) में 17 स्थलों का एक हिस्सा है जिसकी रूपरेखा फ्रांस-स्विटजरलैंड के वास्तुकार ले करबुसियर ने बनायी थी। उन्होंने 1950 के दशक में चंडीगढ़ की योजना निरूपित की थी। अन्य मुख्य पहचान में सिक्किम का कंचनजंघा राष्ट्रीय पार्क है। इसके अलावा एंटीगुआ नेवल डॉकयार्ड तथा संबंधित पुरातात्विक स्थलों (एंटीगुआ और बारबुडा) तथा पाम्पुल्हा मॉडर्न एन्सेम्बले (ब्राजील) को भी धरोहर सूची में शामिल किया गया है।

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