पाकिस्तानः तंगहाल इमरान को मिला सऊदी का सहारा, 3 अरब डॉलर का लोन देने पर सहमति, साल भर के लिए सेंट्रल बैंक में रखना होगा पैसा

एफएटीएफ के पाक को ग्रे सूची में बरकरार रखने के फैसले से उसे अंतरराष्ट्रीय कर्ज मिलना भी मुश्किल हो चुका है। इमरान खान देश की बदहाल अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए बीते माह सऊदी निवेशकों और कारोबारियों से मदद मांगने के लिए रियाद भी गए थे। उनकी गुहार के बाद ही ये मदद मिली।

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पाकिस्तान के पीएम इमरान खान। (फोटो- इंडियन एक्सप्रेस फाइल)

नकदी संकट से जूझ रहे पाकिस्तान को सऊदी अरब से जल्द ही तीन अरब डॉलर का कर्ज मिलेगा। समझौते के अनुसार, सहायता राशि एसबीपी के जमा खाते में एक साल तक रहेगी। प्रधानमंत्री इमरान खान की अगुवाई में मंत्रिमंडल ने इस राशि को देश के केंद्रीय बैंक में रखने की सहमति दी है। उधर, सरकार ने कहा कि पाकिस्तान अगले 60 दिन में सिर्फ तीन स्रोतों से सात अरब डॉलर प्राप्त करने की उम्मीद कर रहा है।

न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी सरकार ने स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान में तीन अरब डॉलर का भंडार रखने का वादा किया था। एसबीपी ने सभी प्रक्रियाओं को अंतिम रूप दे दिया है। यह राशि अगले कुछ दिन में प्राप्त हो जाएगी। इमरान सरकार के लिए यह बहुत बड़ी राहत है, क्योंकि खुद पीएम ने माना था कि देश चलाने के लिए पैसा नहीं बचा है।

ध्यान रहे कि एफएटीएफ के पाक को ग्रे सूची में बरकरार रखने के फैसले से उसे अंतरराष्ट्रीय कर्ज मिलना भी मुश्किल हो चुका है। इमरान खान देश की बदहाल अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए बीते माह सऊदी निवेशकों और कारोबारियों से मदद मांगने के लिए रियाद भी गए थे। उनकी गुहार के बाद ही ये मदद मिली। हालांकि पहले भी आर्थिक संकट के समय सऊदी ने ही पाकिस्तान की मदद कई बार की है। मुश्किल भरे हालात में सऊदी अकेला ऐसा देश है जो इमरान का साथ देता आया है।

पाकिस्तान पर बदहाली इतनी ज्यादा छा चुकी है कि सरकार पीएम आवास को किराए पर देने के लिए विवश हो गई है। खुद इमरान खान बानी गाला आवास पर रह रहे हैं। वह केवल प्रधानमंत्री कार्यालय का इस्तेमाल करते हैं। इमरान के सत्ता में आने के बाद से पिछले तीन सालों में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था 19 अरब डॉलर तक सिकुड़ गई है। जब वे प्रधानमंत्री बने, तो उन्होंने देश की अर्थव्यवस्था को राहत देने के लिए सरकारी खर्चों में कटौती करने के लिए कई कड़े कदम उठाए। लेकिन उनका असर कुछ समय तक ही दिखा। हालात फिर से जस के तस हो गए, क्योंकि सरकारी कोष बिलकुल खाली है।

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