Indus Waters Treaty News: भारत की ओर से सिंधु जल संधि स्थगित करने करने के बाद पाकिस्तान की लगभग एक-तिहाई आबादी, खासकर सिंध और बलूचिस्तान के कृषि-प्रधान इलाकों में पानी की भारी किल्लत का सामना कर रही है।
डॉन के अनुसार, सिंधु नदी पर बने सबसे बड़े और अहम सिंचाई ढांचों में से एक, सुक्कुर बैराज के आसपास यह संकट तेजी से दिखाई दे रहा है। यह बैराज सिंध और बलूचिस्तान के कुछ हिस्सों में लाखों एकड़ खेती की जमीन के लिए पानी का जरिया है। इससे यह पाकिस्तान की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए बहुत अहम हो जाता है।
सिंध की नहरों में पानी की कमी चिंताजनक स्तर पर
सिंध की नहरों में पानी की कमी चिंताजनक स्तर पर पहुंच गई है। उत्तर पश्चिम नहर में 64.1 प्रतिशत, राइस नहर में 38 प्रतिशत और दादू नहर में 82 प्रतिशत की भयावह कमी है। ऊपरी इलाकों में पानी के गैर-कानूनी इस्तेमाल और असमान बंटवारे के आरोपों से स्थिति और भी बिगड़ रही है।
सिंध के सिंचाई विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पंजाब अपने तय हिस्से 44000 क्यूसेक के मुकाबले 53394 क्यूसेक पानी ले रहा है, जो उसके हक से 21 प्रतिशत से ज्यादा है। इसी तरह तौंसा बैराज भी अपने मंजूरशुदा हिस्से 24000 क्यूसेक के मुकाबले 25694 क्यूसेक पानी ले रहा है। यह लगभग 9.3 प्रतिशत ज्यादा है।
चश्मा बैराज में पानी का स्तर बढ़ रहा
वहीं दूसरी ओर, चश्मा बैराज में पानी का स्तर लगातार बढ़ रहा है। इससे पता चलता है कि ऊपरी इलाकों में पानी जमा हो रहा है, जबकि निचले इलाकों में पानी की कमी बढ़ती जा रही है। इस संकट का असर जमीन पर दिखने लगा है।
डॉन के अनुसार, सुक्कुर बैराज सिस्टम की ‘राइट बैंक’ नहरों में पानी की भारी कमी है। ये नहरें लरकाना, कंबर-शहदादकोट, दादू, शिकारपुर और बलूचिस्तान के कुछ हिस्सों में सिंचाई करती हैं। सिंध आबादगार बोर्ड की कंबर-शहदादकोट शाखा के पूर्व अध्यक्ष इशाक मुघेरी ने बताया कि नॉर्थ वेस्टर्न नहर में 64.1 प्रतिशत, राइस नहर में 38 प्रतिशत और दादू नहर में 82 प्रतिशत पानी की कमी है।
दादू नहर को कितना पानी मिल रहा?
ये आंकड़े समस्या की गंभीरता को दिखाते हैं। दादू नहर के लिए 4995 क्यूसेक पानी तय किया गया था, लेकिन अभी उसे सिर्फ 860 क्यूसेक पानी मिल रहा है। नॉर्थ वेस्टर्न नहर को 6260 क्यूसेक के आवंटन के मुकाबले 2100 क्यूसेक पानी मिल रहा है, जबकि राइस नहर को 8700 क्यूसेक के मंजूर हिस्से के मुकाबले 5300 क्यूसेक पानी मिल रहा है। सालों से बुनियादी ढांचे को अपग्रेड करने में देरी और सिंचाई नहरों के अधूरे रीमॉडलिंग के काम ने स्थिति को और खराब कर दिया है, जिससे किसान मौसमी खेती शुरू नहीं कर पा रहे हैं।
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सिंधु जल संधि भारत ने अपना रुख और सख्त कर लिया है। भारत सरकार ने इस संधि को लेकर कहा कि आने वाले समय में पाकिस्तान को सिंधु जल सिस्टम से एक बूंद पानी भी नहीं मिलेगा। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने मंगलवार को कहा कि मोदी सरकार सिंधु जल सिस्टम को लेकर काम कर रही कि पाकिस्तान को एक बूंद पानी भी नहीं मिलेगा। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर…
