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ब्रिटिश संसद में पाकिस्‍तान के ख‍िलाफ पास हुआ प्रस्‍ताव, कहा गया- भारत का ह‍िस्‍सा है गिलगिट-बालटिस्तान

ब्रिटिश संसद में पाकिस्तान का विरोध करते हुए कहा गया है कि साल 1947 के बाद से पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर के जिस हिस्से पर कब्जा कर रखा है वो अवैध है।

प्रस्ताव में गिलगिट बालटिस्तान में चाईना-पाकिस्तान इकॉनोमिक कोरिडोर प्रोजेक्ट का विरोध भी किया गया है। (Source: AP Photo/AP)

ब्रिटिश संसद में पाकिस्तान का विरोध करते हुए गिलगिट-बालटिस्तान में अवैध कब्जे को लेकर उसके खिलाफ प्रस्ताव पास किया गया है। संसद में कहा गया है कि साल 1947 के बाद से पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर के जिस हिस्से पर कब्जा कर रखा है वो अवैध है।

ये प्रस्ताव 23 मार्च को कंजरवेटिव पार्टी द्वारा लाया गया। पार्टी के लीडर बॉब ब्लेकमेन ने कहा कि पाकिस्तान का ये कहना कि गिलगिट-बालटिस्तान पर उसका कब्जा है और ये उसके पांचवे सीमांत प्रांत का हिस्सा है, गलत है। साल 1947 से गिलगिट-बालटिस्तान पर पाकिस्तान का कब्जा अवैध है। संवैधानिक रूप से यह जम्मू-कश्मीर का अभिन्न हिस्सा हैं। उन्होंने प्रस्ताव में आगे कहा कि वहां के लोगों को बुनियादी अधिकारों से वंचित रखा जाता है। अभिव्यक्ति की आजादी नहीं है।

उन्होंने प्रस्ताव में गिलगिट बालटिस्तान में चाईना-पाकिस्तान इकॉनोमिक कोरिडोर प्रोजेक्ट का विरोध करते हुए कहा कि ये गैर कानूनी निर्माण है। बता दें कि इसी दौरान चीन के विदेश मामलों के प्रवक्ता ने कहा कि चीन इस्लामाबाद के साथ CPEC को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह से तैयार है। प्रवक्ता ने आगे कहा कि CPEC से दोनों ही देशों के नागरिकों को फायदा होगा।

आपको बता दें कि ये चीन-पाकिस्तान का ये इकॉनोमिक कोरिडोर करीब 51.5 अरब डॉलर का है। इस प्रोजेक्ट का उद्देश चीन के काशगर को पाकिस्तान के बलूचिस्तान को जोड़ना है।

बोब ब्लेमेन ने प्रस्ताव में गिलगिट बालटिस्तान में चाईना-पाकिस्तान इकॉनोमिक कोरिडोर प्रोजेक्ट का विरोध करते हुए कहा कि ये गैर कानूनी निर्माण है। बता दें कि इसी दौरान चीन के विदेश मामलों के प्रवक्ता ने कहा कि कोरिडोर से होने वाले लाभ से दोनों ही देशों के नागिरकों को फायदा होगा।

बता दें कि भारत का तीन देशों के साथ सीमा विवाद लंबे वक्त से चला आ रहा है। हांलाकि भारत ने बीते वक्त में बांग्लादेश के साथ सीमा विवाद को सुलझा लिया। केन्द्र सरकार ने दोनों ही देशों के नागरिकों को आजादी देते हुए कहा कि दोनों ही देशों के नागरिक अपनी मर्जी से भारत-बांग्लादेश में से किसी एक देश में रह सकते हैं। जबकि चीन, पाकिस्तान के साथ ये विवाद अभी भी जारी है।

चीन बारंमबार अरुणाचल प्रदेश पर अपना हक जताता रहा है। पिछले दिनों तिब्बत धर्म गुरु दलाई लामा के अरुणाचल प्रदेश दौरे को लेकर उसने कड़ा ऐतरात जताया था। वहीं, पाकिस्तान के साथ भारत का जम्मू-कश्मीर मुद्दा जस का तस बना हुआ है। इसी के चलते पाकिस्तान कश्मीर में आतंकी गतिविधियों में लगातार संलिप्त रहा है। इसी के चलते चीन पाकिस्तान के साथ मिलकर पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले गिलगिट-बालटिस्तान में CPEC का निर्माण कर रहा है।

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