पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू और कश्मीर (पीओके) में पाकिस्तानी सेना द्वारा की जा रही कार्रवाई के विरोध में हजारों ब्रिटिश कश्मीरियों ने लंदन में मार्च निकाला। लोगों ने इस दौरान बैनर लहराए और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के खिलाफ नारे लगाए।
ब्रिटिश कश्मीरी रविवार को ‘पार्लियामेंट स्क्वेयर’ में इकट्ठा हुए और ट्रैफ़लगर चौक तक मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने ‘ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी’ (जेएएसी) का समर्थन किया और मानवाधिकारों की बहाली की मांग की।
प्रदर्शनकारियों ने ”पाकिस्तानी सेना वापस जाओ” के नारे भी लगाए। उन्होंने पीओके में आम नागरिकों की हत्याओं, महिलाओं के उत्पीड़न और शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों के खिलाफ ताकत के इस्तेमाल पर भी चिंता जताई।
पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग (एचआरसीपी) समेत कई संगठनों ने पीओके की सरकार के उस फैसले पर गहरी चिंता जताई है, जिसके तहत जेएएसी को आतंकवाद-रोधी कानूनों के अंतर्गत प्रतिबंधित कर दिया गया है।
पीओके में हुई हिंसा
पीओके के रावलाकोट में पुलिस और जेएएसी कार्यकर्ताओं के बीच हाल में हुई झड़पों में कई नागरिक और पुलिसकर्मी मारे गए हैं। पीओके में हुई हिंसा और जेएएसी के विरोध प्रदर्शन के आह्वान के बाद पीओके के अलग-अलग हिस्सों में दुकानें और बाजार बंद रहे थे।
जेएएसी आटे और बिजली की कीमत में सब्सिडी दिए जाने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रही है। इसके अलावा वह पीओके की विधानसभा में 12 ‘शरणार्थी सीटों’ को खत्म करने की मांग भी लंबे समय से कर रही है। ये सीट कश्मीर से आए उन शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं जो 1947 के बाद पाकिस्तान में बस गए थे। पीओके में पाकिस्तान की सेना और सुरक्षाबलों के जवान तैनात हैं।
भारत का कहना है कि पाकिस्तान ने केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के कुछ हिस्से पर अवैध कब्जा कर रखा है।
पीओके में फिर क्यों भड़की हिंसा?
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में एक बार फिर अशांति का माहौल है। वहां बड़े पैमाने पर हिंसा हुई है। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर।
