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अंतरिक्ष में गामा किरणों से भी अधिक चमकीली रोशनी दिखी, वैज्ञानिक बता रहे GRB

अमेरिका स्थित जॉर्ज वाशिंगटन विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों सहित शोधकर्ताओं ने इस विस्फोट को पहली बार 14 जनवरी को देखा और इसे जीआरबी 190114सी नाम दिया। यह खोज अंतरिक्ष के विभिन्न स्रोतों से हो रहे विकिरण का पता लगाने की एकीकृत कोशिश के तहत हुई है।

वाशिंगटन | November 22, 2019 2:43 PM
यह खोज अंतरिक्ष के विभिन्न स्रोतों से हो रहे विकिरण का पता लगाने की एकीकृत कोशिश के तहत हुई है।

शोधकर्ताओं ने ब्रह्मांड में सबसे चमकीली विद्युत चुंबकीय घटना देखी है जिसे गामा किरणों का धमाका (जीआरबी) कहते हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक यह रोशनी आंखों से दिखने वाली रोशनी से करीब एक हजार अरब गुना अधिक है। जर्नल ‘नेचर’ में प्रकाशित शोधपत्र में कहा गया कि इस तरह की रोशनी का पूर्वानुमान सैद्धांतिक अध्ययनों में व्यक्त किया गया था और माना जाता है कि इस तरह की रोशनी की उत्पत्ति तारे में विस्फोट या दो मरणासन्न तारों के मिलने से उत्पन्न होता है लेकिन अबतक इसे देखा नहीं गया था।

अमेरिका स्थित जॉर्ज वाशिंगटन विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों सहित शोधकर्ताओं ने इस विस्फोट को पहली बार 14 जनवरी को देखा और इसे जीआरबी 190114सी नाम दिया। यह खोज अंतरिक्ष के विभिन्न स्रोतों से हो रहे विकिरण का पता लगाने की एकीकृत कोशिश के तहत हुई है। पूरी दुनिया में 20 से अधिक वेधशालाएं इस काम में लगी हैं। शोधकर्ताओं ने पाया कि यह विस्फोट पृथ्वी से करीब पांच अरब वर्ष दूर चमकीले आकाशगंगा के मध्य में सघन वातावरण में हुआ।

जॉर्ज वांिशगटन विश्वविद्यालय में भौतिक शास्त्र के प्रोफेसर और शोधपत्र के सह लेखक क्रिस्सा कोवेलियोटौ ने कहा, ‘‘ करीब 45 साल से जीआरबी का अध्ययन करने के बाद हम उसकी उपस्थिति की पुष्टि कर सके हैं। हालांकि, इसमें मौजूद पदार्थों को लेकर अनभिज्ञ हैं, जिससे गामा किरणों के विस्फोट और उसके बाद नाटकीय तरीके से ऊर्जा में वृद्धि होती है।’’ शोधकर्ताओं ने कहा कि इस प्रकार के जीआरबी महज कुछ क्षण के लिए होते हैं और अत्यधिक ऊर्जा वाले किरणों का विस्फोट होता है।

उन्होंने कहा, जीआरबी के विद्युत चुंबकीय स्पेक्ट्रम में निम्न ऊर्जा रेडियो तरंगे एक ओर होती हैं, बीच में दिखने वाली रोशनी होती है, उसके बाद गामा किरणें और उच्च ऊर्जा वाले हिस्से में एक्स रे होती है। शोधकर्ताओं ने बताया कि विस्फोट के बाद एक्स रे का उत्सर्जन का पता लगाने के लिए दक्षिण अफ्रीका स्थित नए मीरकैट रेडियो दूरबीन का इस्तेमाल किया गया। मीरकैट नई रेडियो वेधशाला है जो बहुत संवेदनशील है।

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