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चीनी धरती से पाक को झटका- ब्रिक्स ने जैश व लश्कर को बताया आतंकी संगठन

ब्रिक्स नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने, साजिश रचने और सहयोग करने वालों को जवाबदेह ठहराना चाहिए।
Author श्यामेन | September 5, 2017 02:13 am
9वें ब्रिक्स सम्मेलन में पीएम नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिन पिंग।

ब्रिक्स देशों ने घोषणापत्र में पहली बार सीधे तौर पर क्षेत्र में हिंसक गतिविधियों को अंजाम देने वाले लश्कर ए तैयबा और जैश ए मोहम्मद जैसे पाकिस्तान स्थित संगठनों को आतंकवादी बताया है। इसे पाकिस्तान के लिए करारे झटके और भारत की एक बड़ी राजनयिक जीत के रूप में देखा जा रहा है। ब्रिक्स नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने, साजिश रचने और सहयोग करने वालों को जवाबदेह ठहराना चाहिए। भारत के लिए बड़ी राजनयिक जीत के घटनाक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ब्राजील के राष्ट्रपति माइकल टेमर और दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति जैकब जुमा ने इन संगठनों की आतंकी गतिविधियों की कड़ी निंदा की और इस समस्या से मिलकर लड़ने की प्रतिबद्धता जताई।
उधर, डोकलाम गतिरोध खत्म होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच मंगलवार को यहां पहली विधिवत द्विपक्षीय मुलाकात होगी। विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार दोनों नेता दिन में 12:30 बजे (भारतीय समयानुसार सुबह 10 बजे) मिलेंगे। सूत्रों का कहना है
कि मोदी और शी की इस मुलाकात के दौरान दोनों नेता विश्वास बहाली के कदमों के उपायों पर चर्चा कर सकते हैं। सूत्रों ने दोनों नेताओं के बीच की बातचीत में आने वाले मुद्दों के बारे में ब्योरा देने से इनकार किया लेकिन कहा कि दोनों देशों के बीच यह भाव है कि डोकलाम गतिरोध के बाद अब ‘आगे बढ़ना चाहिए’।

ब्रिक्स नेताओं की बैठक के बाद 43 पृष्ठों का ‘श्यामेन घोषणापत्र’ पास किया जिसमें इस बात पर जोर दिया गया कि अफगानिस्तान में हिंसा पर तत्काल विराम लगाने की जरूरत है। इसमें कहा गया, ‘इस संदर्भ में, हम क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति और तालिबान, आइएसआइएस, अल-कायदा और इसके सहयोगियों द्वारा की जाने वाली हिंसा पर चिंता जाहिर करते हैं। अल कायदा के सहयोगियों में ईस्टर्न तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट (ईटीआइएम), इस्लामिक मूवमेंट आॅफ उजबेकिस्तान, हक्कानी नेटवर्क, लश्कर ए तैयबा, जैश ए मोहम्मद, तहरीक ए तालिबान पाकिस्तान और हिज्ब उल तहरीर शामिल हैं।’ बताते चलें कि ईटीआइएम चीन में मुसलिमों की बहुतायत वाले शिनजियांग स्वायत्त क्षेत्र में सक्रिय है और वह ‘ईस्ट तुर्किस्तान’ की स्थापना की मांग कर रहा है।
ब्रिक्स देशों के नौवें शिखर सम्मेलन में शामिल नेताओं ने सभी तरह के आतंकवाद और उसके सभी स्वरूपों की भर्त्सना की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आतंकवाद की किसी भी गतिविधि को किसी भी तरह से जायज नहीं ठहराया जा सकता। बयान में कहा गया, ‘हम इस पर जोर देते हैं कि आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने, साजिश रचने और सहयोग करने वालों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।’ आतंकवाद से निपटने और इसकी रोकथाम में देशों की प्राथमिक भूमिका व जिम्मेदारी को रेखांकित करते हुए समूह ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्त्व पर बल दिया। इसमें कहा गया कि यह सहयोग देशों की संप्रभु समानता और उनके आंतरिक मामलों में बिना दखलअंदाजी के अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुरूप होना चाहिए।

अधिकारियों के अनुसार मोदी ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में आतंकवाद का मुद्दा जोरदार ढंग से उठाया और दूसरे नेताओं ने भी उनका समर्थन किया और इस समस्या से लड़ने की इच्छा प्रकट की। विदेश मंत्रालय में सचिव (पूर्व) प्रीति सरन ने संवाददाताओं से कहा कि पहली बार आतंकी संगठनों का स्पष्ट उल्लेख किया गया है। घोषणापत्र में पाकिस्तानी आतंकी संगठनों के नाम शामिल करना खासा अहम है क्योंकि यह पाकिस्तान पोषित आतंकवादी समूहों को लेकर चीन की राय में थोड़ा बदलाव का संकेत है। आतंकवाद पर भारत की स्थिति को स्पष्ट करते हुए प्रीति सरन ने संवाददाताओं से कहा कि आतंकवाद एक ऐसी आपदा है, जिससे संपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समुदाय को मिलकर निपटना चाहिए। मुझे लगता है कि अब यह अहसास बढ़ रहा है कि इस आपदा से निपटने में आप दोहरे मापदंड नहीं अपना सकते। उन्होंने कहा कि आप आतंकियों को अच्छे आतंकी और बुरे आतंकी के रूप में नहीं देख सकते। आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई एक सामूहिक कार्रवाई है। सरन ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने शिखर सम्मेलन में सुरक्षा परिषद सुधार की प्रक्रिया तेज करने का मुद्दा उठाया है।
ब्रिक्स देशों ने सभी देशों का आह्वान किया कि वे आतंकवाद का मुकाबला करने को लेकर समग्र रूख अपनाएं। इसमें कहा गया कि हम सभी देशों से अपील करते हैं कि वे आतंकवाद से निपटने के लिए एक समग्र रूख अपनाएं। इसमें चरमपंथ से निपटना, आतंकियों की भर्ती से निपटना, विदेशी आतंकी लड़ाकों और अन्य आतंकियों के आवागमन से निपटना, उनके वित्तीय स्रोतों को अवरूद्ध करना शामिल है। इस घोषणा में जिन चुनौतियों का जिक्र किया गया, उनमें हथियारों की आपूर्ति और नशीली दवाओं की तस्करी पर लगाम लगाना, आतंकी ठिकानों को नष्ट करना और आतंकियों द्वारा इंटरनेट, सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर लगाम लगाना आदि शामिल है।

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में कहा गया था कि हम संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रासंगिक प्रस्तावों और एफएटीएफ अंतराष्ट्रीय मानकों के त्वरित और प्रभावी क्रियान्वयन का आह्वान करते हैं। हम वित्तीय कार्रवाई बल (एफएटीएफ) और एफएटीएफ जैसी क्षेत्रीय इकाइयों में सहयोग बढ़ाने का प्रयास करेंगे। ब्रिक्स ने उत्तर कोरिया के परमाणु परीक्षण की भी कड़ी निंदा की।ब्रिक्स ने कहा कि हम कोरियाई प्रायद्वीप में चल रहे तनाव और लंबे समय से चले आ रहे परमाणु हथियारों के मुद्दे पर गहरी चिंता जताते हैं। हम जोर देते हैं कि इसका समाधान शांतिपूर्ण तरीकों से होना चाहिए। इस मुद्दे को सभी संबंधित पक्षों के बीच सीधी बातचीत से सुलझाया जाना चाहिए। ब्रिक्स खुफिया बैंक की स्थापना करने के ब्राजील के प्रस्ताव भी इस घोषणापत्र में संज्ञान लिया गया है।

पुतिन से मिले मोदी, अफगानिस्तान सहित कई मुद्दों पर की बात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को रूसी राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात की और द्विपक्षीय व्यापार व निवेश बढ़ाने के तरीकों के साथ ही अफगानिस्तान में सुरक्षा स्थिति पर चर्चा की। दोनों नेताओं की यह मुलाकात दक्षिण पूर्वी चीनी शहर में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन से इतर हुई। प्रधानमंत्री मंगलवार को म्यांमा रवाना होंगे।  विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा-‘दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं को छुआ।  प्रवक्ता ने कहा कि अफगानिस्तान के हालात सहित कुछ क्षेत्रीय मुद्दों पर भी चर्चा हुई।

मोदी और पुतिन की बैठक के दौरान तेल एवं प्राकृतिक गैस क्षेत्र में सहयोग सहित कई द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की गई। दोनों नेताओं ने व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए एकसाथ काम करने पर भी जोर दिया। चाहिए। बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर भी चर्चा की। प्रवक्ता ने कहा, ‘राष्ट्रपति पुतिन ने इसी साल रूस में आयोजित हुए ‘फेस्टिवल आॅफ इंडिया’ का भी जिक्र किया। दोनों देशों के बीच पर्यटन को बढ़ावा दिए जाने और छात्रों के आदान-प्रदान पर भी बात हुई।’

 

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