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जोहानिसबर्ग: ब्रिक्स देशों के सम्मेलन में भारत के गोल्ड माइन्स प्रोजेक्ट की सराहना

भारत द्वारा रूस के साइबेरिया में संचालित स्वर्ण खनन परियोजना की ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में सराहना की गयी।

Author जोहान्सिबर्ग | July 27, 2018 5:20 PM
भारत द्वारा रूस के साइबेरिया में संचालित स्वर्ण खनन परियोजना की ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में सराहना की गयी। यह ब्राजील , रूस , भारत , चीन और दक्षिण अफ्रीका समेत पूरे ब्रिक्स समूह के उद्देश्यों का पहला व्यावहारिक कार्यान्वयन है। (Photo-Reuters)

भारत द्वारा रूस के साइबेरिया में संचालित स्वर्ण खनन परियोजना की ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में सराहना की गयी। यह ब्राजील , रूस , भारत , चीन और दक्षिण अफ्रीका समेत पूरे ब्रिक्स समूह के उद्देश्यों का पहला व्यावहारिक कार्यान्वयन है। भारत के सन गोल्ड लिमिटेड द्वारा शुरू की गयी क्लुचेवसकोय स्वर्ण खान परियोजना को पहली औद्योगिक सार्वजनिक – निजी भागीदारी निवेश परियोजना के रूप में देखा जा रहा है , जिसमें ब्रिक्स समूह के सभी देशों की इकाइयां साझेदार हैं। पूर्वी साइबेरिया के चीटा क्षेत्र में स्थित परियोजना में चाइना नेशनल गोल्ड ग्रुप कॉर्पोरेशन , रशियन सॉवरेन इनवेस्टमेंट फंड , फार ईस्ट एंड बैकाल रिजन डेवलपमेंट फंड और ब्राजील तथा दक्षिण अफ्रीका के अग्रणी निजी निवेशक और कारोबारी दिग्गज सहयोग कर रहे हैं।

इस परियोजना से हर साल 6.5 टन सोना उत्पादन की उम्मीद है। उत्पादन शुरू होने से पहले 50 करोड़ डॉलर का निवेश करने की योजना है। सन ग्रुप के उपाध्यक्ष शिव खेमका ने कहा कि इस परियोजना ने हमें समझाया है कि वास्तव में ब्रिक्स व्यावहारिक तरीके से कैसे काम कर सकता है , जहां हम एक – दूसरे की ताकत का उपयोग कर सकते हैं। ” इसके जरिये सभी देशों की विशेषज्ञता को एक टीम के रूप में कार्य करने के लिये लाया गया है। हम आशा करते हैं कि हम इसमें सफल होंगे।

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खेमका ने कहा कि स्थानीय सरकार से बहुत सहयोगी मिला है जो कि हमारे लिये बहुत जरूरी है। ट्रांस अफ्रीका कैपिटल के इवोर इचिकोविट्ज ने कहा कि यह परियोजना ब्रिक्स समूह की उन्नति में महत्वपूर्ण चरण है। इस परियोजना का प्रभाव सिर्फ आर्थिक वृद्धि पर ही नहीं पड़ेगा बल्कि इससे नौकरियां भी सृजित होंगी। जिसका असर नागरिकों के जीवन पर होगा।
बिर्क्स बिजनेस काउंसिल के चेयरमैन इकबाल सुर्वे इस उद्यम को लेकर आशावादी है और उनका कहना है कि यह अन्य देशों के लिये बहुपक्षीय सहयोग के मॉडल के रूप में होगा।

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