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BREXIT: रायशुमारी के बाद क्‍या? अगस्‍त से लेकर अक्‍टूबर तक इस तरह बदलेगा ब्रिटेन

BREXIT: जमनत संग्रह में आए फैसले की वजह से इस बार ब्रिटिश सांसद संसद सत्र के दौरान बेहद बिजी नजर आने वाले हैं।

Author नई दिल्‍ली | June 24, 2016 19:45 pm
लंदन में बैलेट की गिनती करती महिला। (Source: Reuters)

ब्रिटेन की जनता ने यूरोपियन यूनियन से अलग होने का फैसला किया है। यह जनमत कोई अंत नहीं, एक लंबी और थकाऊ प्रक्रिया की शुरुआत है। ऐसे में यह जानना दिलचस्‍प होगा कि ब्रिटेन में अब क्‍या होने वाला है। अक्‍टूबर में ब्र‍िटिश पीएम कैमरन पद छोड़ेंगे, लेकिन उससे पहले भी काफी कुछ होना है। बदलाव की प्रक्रिया तो अभी शुरू हुई है। जूून और जुलाई में क्‍या होगा, यहां पढ़ें।   अगस्‍त से अक्‍टूबर तक होने वाले बदलाव के बारे में नीचे बताया गया है:

अगस्‍त के मध्‍य में

>2005 में जिस तरीके से कंजरवेटिव पार्टी ने तेजी दिखाई थी, अगर वो इस साल भी वैसे ही फैसला लेती है तो मुमकिन है कि कैमरन के उत्‍तराधिकारी का नाम तय हो जाए।

>इस उत्‍तराधिकारी से उम्‍मीद होगी कि वो ईयू से चल रही बातचीत को तेजी से अागे बढ़ाए। ऐसे में बोरिस जॉनसन का नाम ब्रिटेन के अगले पीएम की दौड़ में सबसे आगे माना जा रहा है।

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सितंबर
>संसद कामकाज पर लौटेगी। जिन लोगों को यह लगता है कि इस दौरान सांसद ज्‍यादा मेहनत से काम नहीं करते उनकी शिकायतें इस बार दूर हो जाएगी। इस बार वे बेहद व्‍यस्‍त नजर आने वाले हैं।

>संसद के वर्तमान सत्र में कानूनी प्रक्रिया अपनाकर यह कोशिश की जाएगी कि ब्रिटेन की राष्‍ट्रीय सुरक्षा के मामलों से यूरोपियन कोर्ट की दखल खत्‍म हो और सरकार को ईयू से अपराधियों को डिपोर्ट करने की मंजूरी मिले।

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>ब्रिटेन के ईयू से अलग होने की तरफदारी करने वालों ने यह भी वादा किया है कि घरेलू बिजली पर लगने वाले पांच पर्सेंट वैट को खत्‍म किया जाए। इसके लिए वैल्‍यू एडेड टैक्‍स 1994 में बदलाव किया जा सकता है।

>ब्रेक्‍स‍िट का समर्थन करने वालों ने यह भी वादा किया है कि संसद सत्र में उस नियम को खत्‍म किया जाएगा, जिसमें ईयू के सभी नागरिकों को ब्रिटेन में दाखिल होने की मंजूरी होती है। इसके लिए यूरोपियन कम्‍युनिटीज एक्‍ट 1972 (रिपील) बिल को खत्‍म किया जा सकता है। यही वो कानून है, जिसके जरिए घरेलू नियमों पर ईयू के कानूनों का प्रभुत्‍व बना रहता है।

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>हालांकि, यह अभी साफ नहीं है कि ब्रिटेन के ईयू से अलग होने की पैरवी करने वाले इस प्रक्रिया को कितनी जल्‍दी पूरी कर पाएंगे। करीब तीन चौथाई सांसद ऐसे हैं, जिन्‍होंने ईयू की मेंबरशिप की तरफदारी की। ऐसे में मुमकिन है कि पब्‍लिक की इच्‍छा को नजरअंदाज करने की कोशिश की जाए।

>कुछ जानकारों का माना है कि अगर सांसद जनमत के नतीजों को नजरअंदाज करते हैं तो इससे संवैधानिक संकट पैदा हो सकता है, जिसके बाद मुमकिन है कि आम चुनाव करवाना पड़े।

अक्‍टूबर 5

इस बार कंजरवेटिव पार्टी का कॉन्‍फ्रेंस बेहद अहमियत वाला होगा। हो सकता है कि ब्रिटेन का नया पीएम बर्मिंघम में मंच पर भाषण देते नजर आए। अगर बोरिस देश के पीएम बनते हैं तो शायद वे यह समझाने में कामयाब हों कि देश ने एक आजाद सफर की शुरुआत की है, जिस पर ब्रसेल्‍स का कोई अख्‍त‍ियार नहीं है।

इस आर्टिकल का पहला पार्ट (जून-जुलाई में होने वाली प्रक्रिया) पढ़ने के लिए यहां क्‍ल‍िक करें 

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