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वीडियो: लाइव रिपोर्टिंग के दौरान लड़के ने बिना इजाजत रिपोर्टर को चूम लिया, देखिए फिर क्‍या हुआ

इन स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट को कभी ना कभी काम के दौरान उत्पीड़न से गुजरना पड़ा है। यही वजह है कि इन जर्नलिस्ट्स ने इसके खिलाफ आवाज उठाने का फैसला किया है।

(image source-Twitter)

काम के दौरान महिलाओं के उत्पीड़न की खबरें हम आए दिन सुनते रहते हैं। लेकिन ब्राजील में अब इसके खिलाफ बड़े स्तर पर एक अभियान चलाया जा रहा है। दरअसल यह अभियान ब्राजील की महिला स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट द्वारा चलाया जा रहा है। इन स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट को कभी ना कभी काम के दौरान उत्पीड़न से गुजरना पड़ा है। यही वजह है कि इन जर्नलिस्ट्स ने इसके खिलाफ आवाज उठाने का फैसला किया है। इन जर्नलिस्ट ने अपने कैंपेन की शुरुआत सोशल मीडिया पर एक वीडियो अपलोड करके की है। इस वीडियो में दिखाई दे रहा है कि जब एक महिला जर्नलिस्ट लाइव रिपोर्टिंग कर रही होती है, तभी एक लड़का उसे चूम लेता है। इस पर महिला रिपोर्टर डर जाती है। बता दें कि इस तरह की एक और घटना इस वीडियो में दिखाई गई है। वीडियो में महिला जर्नलिस्ट बारी-बारी से इस कैंपेन के स्लोगन #letherwork (#उसे काम करने दो) को कहते दिखाई दे रही हैं।

ब्राजील की स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट बिबिआना बोल्सन को भी काम के दौरान उत्पीड़न झेलना पड़ा। वीडियो में बिबिआना बोल्सन कहते दिखाई दे रही हैं कि यूरो कप के दौरान उन्होंने जैसे ही कैमरा ऑन किया तो उन्हें किस करने, गले लगाने और छूने की कोशिश की गई। यह बेहद भयावह अनुभव था। एक अन्य घटना का जिक्र करते हुए बिबिआना ने कहा कि मैं ब्राज़ील में एक मैच कवर कर रही थी और एक लड़के ने गुस्से में कहा कि तुम स्पोर्ट्स के बारे में नहीं बोल सकती, क्योंकि तुम महिला हो। इतना ही नहीं उस लड़के ने मुझ पर थूका। वीडियो में दिखाई दे रहीं अन्य जर्नलिस्ट ने कहा कि हम महिलाएं है और हम प्रोफेशनल हैं। हम भी इज्जत चाहते हैं, स्टेडियम में, न्यूजरुम में, सड़कों पर….

महिला जर्नलिस्ट्स की कोशिश है कि उनके इस कैंपेन को #Metoo कैंपेन की तरह दुनियाभर में समर्थन मिले। बता दें कि कुछ समय पहले #Metoo कैंपेन ने दुनियाभर में सुर्खियां बटोरी थी। इस कैंपेन में महिलाओं ने अपने साथ हुए यौन उत्पीड़न की घटनाओं का जिक्र किया था। इन स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट की मांग है कि अब बहुत हो गया, यह बेहद घिनौना है। हम महिलाएं है, प्रोफेशनल हैं और हम भी इज्जत चाहते हैं। इनका कहना है कि यह सिर्फ ब्राजील की समस्या नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया की समस्या है।

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