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बैंक ऑफ अमेरिका में वाइस प्रेसिडेन्ट मैनेजर ने अमेरिका में लगाया लिट्टी-चोखा का स्टॉल, 2 घंटे में ही हुआ आउट ऑफ स्टॉक

अमेरिका में बिहार-झारखंड के इस तरह के पारंपरिक व्यंजनों को बनाने और उसे बेचने वाले ग्रुप का नाम स्पर्श है। इसमें 150 लोग जुड़े हुए हैं।

बिहार-झारखंड का परंपरागत व्यंजन लिट्टी-चोखा।

बिहार-झारखंड के कुछ युवकों ने अपने परंपरागत खान-पान की खुशबू सात समंदर पार भी बिखेरी है। उनकी वजह से आज अमेरिका के पूर्वी तटीय शहरों नॉर्थ कैरोलिना, साउथ कैरोलिना, न्यूयॉर्क, न्यूजर्सी, मैरी लैंड और फ्लोरिडा जैसे कई शहरों में लिट्टी-चोखा को खूब पसंद किया जा रहा है। रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज के कुछ पूर्व छात्रों ने अल्यूमनी मीट में बताया कि उनकी एक छोटी से पहल ने लिट्टी-चोखा को वर्ल्ड फेमस बना दिया है। इन लोगों ने कुछ महीने पहले अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना के चारलोट में आयोजित इंडियन फेयर में एक फूड स्टॉल लगाया था जिसमें लिट्टी-चोखा सर्व किया गया था। देखते ही देखते अमेरिकियों ने लिट्टी-चोखा को पहले दिन चार घंटे में ही खाकर खत्म कर दिया।

अभिषेक सिन्हा नाम के एक अप्रवासी भारतीय, जो बैंक ऑफ अमेरिका में वाइस प्रेसिडेन्ट मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि पिछले सितंबर में उन्होंने कुछ बिहार-झारखंड के लोगों के साथ मिलकर इंडियन फेयर में एक फूड स्टॉल लगाया था। जिसमें लिट्टी-चोखा, समोसा और चावल-मटन परोसा था। उन्होंने बताया कि यह देखकर वे लोग आश्चर्यचकित थे कि अमेरिकियों ने लिट्टी-चोखा को खूब पसंद किया। बतौर अभिषेक चूंकि लिट्टी-चोखा मसालेदार था इसलिए अमेरिकी लोगों को यह ज्यादा पसंद आया। लोगों ने सारे भारतीय व्यंजन खत्म कर दिए।

इसके बाद वे लोग लगातार इन व्यंजनों की मांग करते रहे। अभिषेक के मुताबिक चूंकि अमेरिका में खाद्य कानून बहुत कठोर है, इसलिए हमलोग जल्दबाजी में घर गए, वहां 100 लिट्टी-चोखा बनाया और फिर लौटकर फेयर में आए। उन्होंने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि पहले दिन अमेरिकियों ने पहले चार घंटे में सभी भारतीय व्यंजन खत्म कर दिए तो दूसरे दिन सिर्फ 2 घंटे में ही लिट्टी-चोखा खत्म हो गया। सिन्हा ने बताया कि अमेरिका में बिहार-झारखंड के इस तरह के पारंपरिक व्यंजनों को बनाने और उसे बेचने वाले ग्रुप का नाम स्पर्श है। इसमें 150 लोग जुड़े हुए हैं।

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