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भारत की कोवैक्सीन को लगा झटका, ईयूए के बाद अमेरिका ने भी किया नामंजूर, जाने क्यों?

भारत बायोटेक की कोवैक्सीन को झटका देते हुए अमेरिकी खाद्य एवं दवा नियामक ने इसके इस्तेमाल को मंजूरी देने से इंकार दिया है।

भारत बायोटैक देश भर में कोवैक्सीन की सप्लाई कर रहा है। (एक्सप्रेस फोटो)।

भारत बायोटेक की कोवैक्सीन को झटका देते हुए अमेरिकी खाद्य एवं दवा नियामक ने इसके इस्तेमाल को मंजूरी देने से इंकार दिया है। भारत बायोटेक की अमेरिकी साझेदार ओक्यूजेन इंक को सलाह दी गई है कि वह भारतीय वैक्सीन के इस्तेमाल की मंजूरी हासिल करने के लिए और अधिक आंकड़ों के साथ इसकी मंजूरी के लिए बीएलए से अनुरोध करे। ऐसे में अब कोवैक्सीन को अमेरिकी मंजूरी मिलने में थोड़ा और वक्त लग सकता है।

वहीं मंजूरी न मिलने पर भारत बायोटेक ने कहा है कि 14 देशों में उसे इमरजेंसी यूज़ ऑथराइजेशन के लिए मिल चुकी है। अभी 50 से ज्यादा देशों में प्रक्रिया जारी है। इसके अलावा भारत से निर्मित या विकसित किसी भी वैक्सीन को कभी भी EUA या USFDA से पूर्ण लाइसेंस प्राप्त नहीं हुआ है। संयुक्त राज्य अमेरिका ने भारत बायोटेक की कोवैक्सीन को मंजूरी न मिलने के कारण लोगों के मन में कई प्रकार के सवाल होंगे। इस खबर के जरिये उन सवालों के जवाब देने की कोशिश की गई है।

कोवैक्सीन क्या है?: यह भारत का पहला कोरोना टीका है। कोवैक्सीन कोरोना वायरस के इनएक्टिवेटेड वायरस पर आधारित है। कोरोना वायरस का इनएक्टिवेटेड वर्जन पर तैयार वैक्सीन संक्रमण से सुरक्षा प्रदान करता है । इस वैक्सीन के पहले और दूसरे चरण के ट्रायल के नतीजे दिखाते हैं कि इस वैक्सीन का कोई सीरियस साइड इफेक्ट नहीं है।

इसे मार्च में भारत में आपातकालीन उपयोग की अनुमति मिली थी। बता दें कि क्लिनिकल स्टेज बायोफर्मासिटिकल कंपनी Ocugen ने अमेरिका में भारत की बायोटेक द्वारा निर्मित कोवैक्सीन के साथ साझेदारी की है।

अमेरिका ने Covaxin के लिए क्यों नहीं दिया EUA ?: इसका मुख्य कारण यह है कि इस टीके के लिए EUA के अनुरोध पर निर्णय लेने के लिए आंकड़े पूरे नहीं है। Ocugen के अनुसार यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (US FDA) ने सिफारिश की है कि वह कोवैक्सीन के EUA के लिए बीएलए के जरिये अनुरोध करे।

आपको बता दें कि यह Ocugen के लिए बड़ा झटका है क्योंकि Ocugen को अब अमेरिका में Covaxin प्रदान करने के लिए लाइसेंस के लिए अधिक मेहनत करनी होगी। ईयूए की तुलना में बीएलए प्राप्त करने में अधिक समय लगने की उम्मीद है।

क्या इसका मतलब यह है कि वैक्सीन में कुछ गड़बड़ है?: ज़रूरी नहीं। इसका मतलब यह है कि यूएस एफडीए को प्रीक्लिनिकल अध्ययन, केमिस्ट्री, विनिर्माण और नियंत्रण (सीएमसी) और क्लिनिकल अध्ययन के नतीजों की पर्याप्त जानकारी देनी होगी। जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि टीका पूरी तरह से सुरक्षित है।

बता दें कि भारत बायोटेक की कोवैक्सीन के लिए अमेरिकी साझेदार Ocugen ने अमेरिकी दवा नियामक FDA को मास्टर फाइल सौंप दी थी। जिसके बाद से यह उम्मीद लगाई जा रही थी कि वहां भी इस टीके के आपातकालीन इस्तेमाल की इजाजत जल्द ही मिल जाएगी ।

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