नाकाफी साबित चीनी कवायद

पिछले कुछ सालों में चीन ने अपने यहां के शहरों की आबोहवा में सुधार के लिए कई बड़े फैसले किए हैं।

pollutionसांकेतिक फोटो।

पिछले कुछ सालों में चीन ने अपने यहां के शहरों की आबोहवा में सुधार के लिए कई बड़े फैसले किए हैं। इस कारण पूरी दुनिया में इस बात के लिए चीन की तारीफ भी हुई कि शहरों को प्रदूषण से बाहर निकालने का चीनी तरीका न सिर्फअनुुकरणीय है बल्कि सुधार के लिहाज से कारगर भी है। पर इस विरोधाभासी सच्चाई को क्या कहेंगे कि आइक्यू एअर 2020 रिपोर्ट ने एक तरह से चीन की इस कामयाबी को सामने से आईना दिखाया है।

रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में सबसे ज्यादा प्रदूषित शहर है चीन का शिंजियांग। उसके बाद शीर्ष दस में से नौ शहर भारत के हैं। गाजियाबाद का स्थान शिंजियांग के बाद दूसरा है। यह स्थिति भारत के लिए तो खतरे की घंटी है ही, यह चीन के लिए भी इस बात का संकेत है कि उसे अपने शहरों की आबोहवा में सुधार के लिए अभी और मशक्कत करनी होगी।

बहरहाल, इस बात से तो इनकार नहीं ही किया जा सकता है कि चीन ने एक दशक से भी कम समय में इस दिशा में जो प्रयास किए हैं, वे प्रदूषण मुक्ति के प्रति दृढ़ इच्छाशक्ति को दिखाने वाले रहे हैं और भारत जैसे देश को इससे सीख लेनी चाहिए। एक वक्त था जब दिल्ली-एनसीआर की तरह ही चीन के कई बड़े शहर धुंध (स्मॉग) की चादर में लिपटे रहते थे। पर भारत के इस पड़ोसी मुल्क ने वायु प्रदूषण के खिलाफ 2013 में जंग छेड़ी और आज हालात ये हैं कि वहां के शहरों में धुंध और वायु प्रदूषण की समस्या काफी हद तक नियंत्रित हो चुकी है। जाहिर है कि इस दौरान चीन ने इसके लिए कई बड़े कदम उठाए हैं।

दिलचस्प है कि 2012 तक चीन के 90 फीसद शहरों की हवा का स्तर वहां के तय मानकों से कई गुना ज्यादा था। आलम यह था कि चीन के 74 बड़े शहरों में से महज आठ शहरों में वायु प्रदूषण तय स्तर से कम था। स्थिति की भयावहता को देखते हुए चीन ने 2013 में वायु प्रदूषण दूर करने के लिए राष्ट्रीय कार्ययोजना तैयार की। चीन की सरकार ने इस पर 277 अरब डॉलर खर्च करने का फैसला किया।

74 शहरों को वायु प्रदूषण घटाने के लिए सबसे पहले चुना गया। इनमें मानकों के अनुसार योजनाएं लागू की गईं। इसका असर यह हुआ कि पीएम 2.5 प्रदूषक तत्व का स्तर वातावरण में 2013 से 2018 के बीच 42 फीसद घट गया। वहीं, सल्फर डाईआॅक्साइड के स्तर में इस दौरान 68 फीसद की कमी आई। चीन ने ये सारे कदम देश के प्रमुख शहरों में 2020 तक वायु प्रदूषण 60 फीसद तक कम करने का लक्ष्य तय करते हुए उठाया। कोविड-19 जैसे आकस्मिक संकट के बीच चीन अपने लक्ष्य को पाने में पूरी तरह सफल तो नहीं रहा पर अब आइक्यू एअर 2020 की चेतावनी के बाद उम्मीद की जा रही है शहरी आबोहवा को साफ करने की चीन की कवायद नतीजों तक जल्द ही पहुंचेगी।

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