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जलवायु परिवर्तन पर ओबामा ने दिखाई दिलचस्पी, मोदी को किया फोन

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने पेरिस में जलवायु परिवर्तन पर चल रही बातचीत में हुई प्रगति पर चर्चा के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन किया।

Author वाशिंगटन / पेरिस | December 9, 2015 11:00 PM
(File Pic)

अंतरराष्ट्रीय जलवायु समझौते को मूर्त रूप देने के लिए की गई वार्ताओं में बड़े मतभेद बने रहने पर, अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ फोन पर बात की और इस दौरान दोनों नेताओं ने एक ‘मजबूत’ समझौता करने की अपनी ‘निजी प्रतिबद्धताओं’ को रेखांकित किया। ओबामा की ओर से मोदी को यह फोन एक ऐसे समय पर आया, जबकि मंगलवार को अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन कैरी ने पेरिस में चल रहे जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के साथ एक ‘सकारात्मक और सार्थक’ बैठक की थी। इस बैठक में दोनों ने ग्लोबल वॉर्मिंग को सीमित करने के लिए एक समझौते तक पहुंचने की दिशा में किए गए विभिन्न द्विपक्षीय प्रयासों के बारे में बात की। भारत एक ‘महत्त्वाकांक्षी और न्यायसंगत’ समझौते पर जोर दे रहा है। वार्ताकार जहां, इन जलवायु वार्ताओं में एक महत्त्वपूर्ण समझौते को जल्द से जल्द मूर्त रूप देने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं इन वार्ताओं में विकसित और विकासशील देशों के बीच एक खाई भी पैदा हो गई है। ओबामा ने पेरिस में चल रहे इस सम्मेलन कॉन्फ्रेंस आॅफ पार्टीज पर चर्चा के लिए मोदी को फोन किया। यह सम्मेलन शुक्रवार को संपन्न होना है।

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वाइट हाउस ने फोन पर हुई बातचीत का ब्योरा देते हुए कहा, ‘दोनों नेताओं ने इस हफ्ते जलवायु परिवर्तन पर मजबूत समझौता हासिल करने के प्रति अपनी निजी प्रतिबद्धता और सफल परिणाम के लिए हमारे देशों के मिलकर काम करने से जुड़ी अपनी रुचि पर जोर दिया । एक दिन पहले ओबामा ने ब्राजील के अपने समकक्ष से बात की थी। वाइट हाउस के प्रेस सचिव जोश अर्नेस्ट ने संवाददाताओं से कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति पेरिस में हो रहे घटनाक्रम पर करीब से नजर रखे हुए हैं जहां 180 से अधिक देश जलवायु परिवर्तन पर एक समझौते पर पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। अर्नेस्ट ने कहा, ‘मैं आपको बता सकता हूं कि जारी वार्ता पर चर्चा करने के लिए (अमेरिकी) राष्ट्रपति ने कल सुबह भारत के प्रधानमंत्री को फोन किया।

उन्होंने कहा कि ओबामा पेरिस में मौजूद अपनी टीम से वार्ता के बारे में नियमित तौर पर जानकारी ले रहे हैं । उन्होंने कहा, ‘मैं उम्मीद कर सकता हूं कि राष्ट्रपति बातचीत जारी रहने के बीच विश्व के अन्य नेताओं के भी संपर्क में रहेंगे । ओबामा ने पिछले हफ्ते पेरिस में जलवायु परिवर्तन शिखर सम्मेलन से इतर मोदी से मुलाकात की थी । उन्होंने अपने चीनी समकक्ष शी चिनफिंग से भी मुलाकात की थी । अर्नेस्ट ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति पेरिस शिखर सम्मेलन की सफलता को लेकर आशावादी हैं। फोन पर बातचीत के दौरान मोदी ने पिछले सप्ताह कैलिफोर्निया में हुई गोलीबारी में हुई लोगों की मौतों पर संवेदनाएं भी जाहिर कीं।

सोमवार रात को पेरिस पहुंचे कैरी ने सीओपी 21 के भारतीय कार्यालय में लगभग एक घंटे के लिए जावड़ेकर से मुलाकात की थी। कैरी ने संक्षिप्त टिप्पणियों में कहा, हमारी बैठक बेहद सकारात्मक और रचनात्मक रही। हम बहुत मेहनत कर रहे हैं। हम भारतीय प्रतिनिधिमंडल की ओर से किए गए अच्छे प्रयास की सराहना करते हैं। बाद में जावड़ेकर ने कहा कि एक निष्पक्ष और महत्त्वाकांक्षी जलवायु परिवर्तन समझौते की दिशा में दोनों देशों की ओर से किए गए विभिन्न प्रयासों पर चर्चाएं की गईं।

जावड़ेकर ने कहा, कैरी आए और आपने देखा कि हम (भारत) सभी समूहों और देशों के साथ चर्चा कर रहे हैं। अगले 72 घंटे तक हम यह जारी रखेंगे। हमने अमेरिका या हमारे द्वारा किए जा रहे प्रयासों पर चर्चा की। उन्होंने कहा, हम पेरिस में एक महत्त्वाकांक्षी और निष्पक्ष समझौता चाहते हैं। हमने उन्हें उन प्रयासों के बारे में बताया, जो हम इसे मूर्त रूप देने के लिए कर रहे हैं। चर्चाएं जारी रहेंगी। जब उनसे पूछा गया कि क्या इक्विटी और सीबीडीआर (साझा लेकिन भिन्न दायित्व) के मुद्दे पर चर्चा की गई, तो जावड़ेकर ने कहा कि भारत की भूमिका के बारे में अमेरिका अच्छी तरह से जानता है और चर्चाएं इस बात पर हुईं कि ‘किस तरह से समझौता किया जाए’ और ‘कहां परेशानी है’।

भारत ने केरी द्वारा एक साक्षात्कार में की गई टिप्पणी की कड़ी आलोचना की थी, जिसमें उन्होंने महत्त्वपूर्ण जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में भारत को एक ‘चुनौती’ करार दिया था। जावड़ेकर पहले ही इस टिप्पणी की आलोचना करते हुए कह चुके हैं कि ऐसा बयान ‘अवांछनीय’ था और इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि भारत ‘को किसी के दबाव में आने की आदत नहीं है’।

वार्ताओं की शुरुआत के बाद से ही भारत की आलोचना होती रही है। इनमें से अधिकतर आलोचनाएं पश्चिमी देशों के मीडिया द्वारा की गई हैं, जो कि भारत द्वारा अपनी ऊर्जा की जरूरतों को पूरा करने के लिए कोयले के इस्तेमाल को विस्तार देने की योजना को लेकर हैं।

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