ताज़ा खबर
 

बांग्लादेश में निजामी को फांसी के बाद हिंसा पर उतरे जमात-ए-इस्लामी समर्थक

निजामी सबसे वरिष्ठ इस्लामी नेता थे जिन्हें 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान किए गए युद्ध अपराधों के लिए मंगलवार (10 मई) रात फांसी पर लटका दिया गया। जमात पाकिस्तान से बांग्लादेश की स्वतंत्रता के खिलाफ थी।

Author ढाका | May 12, 2016 12:09 AM
पाकिस्तान के कराची में धार्मिक दल जमाते इस्लामी के समर्थक पार्टी अध्यक्ष मोतिउर रहमान निजामी को फांसी दिए जाने का विरोध करते हुए। (AP Photo/Fareed Khan)

बांग्लादेश में जमाते इस्लामी प्रमुख मोतिउर रहमान निजामी को 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान किए गए युद्ध अपराधों के लिए फांसी पर लटकाए जाने के बाद देश के कई शहरों में जमाते इस्लामी के कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच झड़पें शुरू हो गईं। बांग्लादेश में जमात द्वारा अपने शीर्ष नेता को फांसी के खिलाफ मंगलवार (10 मई) को देशव्यापी हड़ताल के आहवान के बाद सुरक्षा बढ़ाए जाने के बाद झड़पें हुईं। इससे मुस्लिम बहुल देश में तनाव और बढ़ गया जहां धर्मनिरपेक्ष कार्यकर्ताओं की श्रृंखलाबद्ध हत्याओं को लेकर पहले से तनाव है।

पुलिसकर्मियों ने तब रबर की गोलियां चलाईं जब जमात के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने उन पर उत्तर पश्चिमी राजशाही शहर में पथराव किया। राजशाही में ही पिछले महीने इस्लामवादियों ने एक उदारपंथी प्रोफेसर की धारदार हथियार से हमला करके हत्या कर दी थी। 73 वर्षीय निजामी को यहां स्थित केंद्रीय जेल में मंगलवार (10 मई) मध्य रात्रि में फांसी पर लटका दिया गया था। देश के सुप्रीम कोर्ट ने उनकी अंतिम अपील खारिज कर दी थी।

सैकड़ों पुलिसकर्मियों ने मध्य ढाका के बैतुल मुकर्रम राष्ट्रीय मस्जिद में निजामी की जनाजे की नमाज के लिए एकत्रित जमात कार्यकर्ताओं पर नजर रखी। यह नमाज अन्य प्रमुख शहरों में भी पढ़ी गई। बांग्लोदश में सुरक्षा के कड़े प्रबंध थे। राष्ट्रीय राजधानी में हिंसा को रोकने के लिए मुख्य सड़कों पर जांच चौकियां स्थापित की गई थीं। हजारों पुलिसकर्मी सड़कों पर गश्त कर रहे थे।

बंदरगाह शहर चटगांव में जनाजे की नमाज के बाद जमात की छात्र इकाई छतरा शिबिर और पुलिस के बीच झड़प शुरू हो गई। जनाजे की नमाज के बाद सैकड़ों जमात समर्थक सड़क पर उतर गए और पुलिस पर ईंट और पत्थर फेंकने लगे। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए गोलीबारी की। देशी बमों का भी इस्तेमाल भिी हुआ । ‘‘आजादी समर्थक’’ कार्यकर्ताओं ने बंदरगाह शहर स्थित परेड मैदान से जमात कार्यकर्ताओं को बाहर करने का प्रयास किया।

जमात द्वारा गुरुवार (12 मई) को देशव्यापी हड़ताल का आह्वान करने के बाद गृह मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘‘सुरक्षा चौक पावंद रखने के आदेश जारी कर दिये गए हैं ताकि कहीं भी कानून एवं व्यवस्था की कोई स्थिति उत्पन्न नहीं हो।’’ बांग्लादेश की सबसे बड़ी इस्लामी पार्टी जमात ने निजामी की फांसी को एक ‘‘नियोजित हत्या’’ करार दिया। जमात के कार्यवाहक प्रमुख मकबूल अहमद ने लोगों से हड़ताल करने का आग्रह करते हुए एक बयान में कहा, ‘‘उसे (निजामी) न्याय से वंचित किया गया। वह राजनीतिक प्रतिशोध का शिकार बने।’’

युद्ध अपराधों में अपने नेताओं पर मुकदमे के खिलाफ जमात द्वारा पूर्व में आहूत की गई इस तरह की हड़तालों को लोगों ने ज्यादा तवज्जो नहीं दी। निजामी सबसे वरिष्ठ इस्लामी नेता थे जिन्हें 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान किए गए युद्ध अपराधों के लिए मंगलवार (10 मई) रात फांसी पर लटका दिया गया। जमात पाकिस्तान से बांग्लादेश की स्वतंत्रता के खिलाफ थी।

जमात ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा निजामी की पुनरीक्षा याचिका खारिज किए जाने और उसकी मौत की सजा की पुन: पुष्टि किए जाने के एक दिन बाद गत छह मई को भी राष्ट्रव्यापी हड़ताल की थी। ढाका सेंट्रल जेल के अधिकारियों के पास सुप्रीम कोर्ट का फैसला पहुंचने के एक दिन बाद निजामी को मंगलवार (10 मई) रात फांसी पर चढ़ा दिया गया।

निजामी को बुधवार (11 मई) सुबह उत्तर पश्चिमी पाब्ना के साथिया उप जिला स्थित उसके पैतृक गांव में उसके परिजन और पड़ोसियों की मौजूदगी में इस्लामी रस्मों के मुताबिक दफना दिया गया। इस दौरान सशस्त्र पुलिस ने कड़ी निगरानी रखी।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App