बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को आम चुनाव होने हैं। भारत को ढाका की तरफ से चुनाव पर्यवेक्षक (Election Observer) के तौर पर शामिल होने का न्योता मिला जिसे भारत ने ठुकरा दिया है। वहीं, मलेशिया, पाकिस्तान, तुर्किये जे देश अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ मौजूद रहेंगे। वहीं, चुनावों से कुछ दिन पहले बांग्लादेश में ज्यादातर जगहों पर खालिदा जिया के पोस्टर लगे हैं जबकि पूर्व पीएम शेख हसीना का एक भी नहीं।
ढाका के व्यस्त इलाके में स्थित बीएनपी के कार्यालय के पास वाली सड़क के बाहरी हिस्से और इमारत के आसपास खालिदा जिया और उनके बेटे तारिक रहमान के बैनर, होर्डिंग और पोस्टर लगे हुए हैं। कुछ पेंटर और इलेक्ट्रीशियन 12 फरवरी को होने वाले चुनावों से पहले दीवारों को सफेद रंग से रंगने और लाइटें ठीक करने में लगे हुए हैं । इन चुनावों में बीएनपी के 20 साल बाद सत्ता में वापसी की उम्मीद है।
बीएनपी की स्थायी समिति (पार्टी की सर्वोच्च नीति-निर्माण संस्था) के सदस्य और सबसे प्रमुख हिंदू नेता गोयेश्वर चंद्र रॉय ने द इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत के दौरान कहा, “हम लोगों से बाहर जाकर वोट देने का आग्रह कर रहे हैं, उन्हें पिछले 17 वर्षों से इससे वंचित रखा गया है।”
पढ़ें- बांग्लादेश: चुनाव से पहले इंकलाब मोर्चा का उग्र प्रदर्शन
बांग्लादेश के चुनाव के केंद्र में दो प्रमुख राजनीतिक दल
बांग्लादेश के चुनाव के केंद्र में इस बार दो प्रमुख राजनीतिक दल हैं जिनमें से एक मौजूद है और दूसरा अनुपस्थित। एक ओर है बीएनपी जो सर्वव्यापी है और राष्ट्रीय चुनावों में जीत हासिल करने के लिए तैयार है, जब तक कि जमात-ए-इस्लामी द्वारा कोई बड़ा चुनावी उलटफेर न हो जाए। दूसरी ओर है अवामी लीग, जिसे चुनावों में भाग लेने से प्रतिबंधित कर दिया गया है। पार्टी के नेता जिनमें पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना भी शामिल हैं , या तो देश छोड़कर भाग गए हैं या छिप गए हैं और उसके समर्थक और कार्यकर्ता कहीं नजर नहीं आ रहे हैं।
जहां एक ओर बीएनपी के चुनाव चिन्ह वाले पोस्टर हर जगह दिखाई दे रहे हैं, वहीं अवामी लीग के ‘नाव’ चिन्ह का एक भी पोस्टर नहीं है। यह 2014, 2018 और 2024 के चुनावों से पहले के माहौल से बिलकुल उलट है, जब शेख हसीना के पोस्टर हर जगह नज़र आते थे। इस बार उनकी जगह दिवंगत खालिदा जिया के पोस्टर लगे हुए हैं।
क्या कहता है बीएनपी का घोषणापत्र
चुनावी मैदान में कोई मजबूत प्रतिद्वंद्वी न होने के कारण, बीएनपी की स्पष्ट जीत की उम्मीद है। ढाका विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर काजी मोहम्मद महबूबुर रहमान ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, “बीएनपी के पास जमीनी स्तर पर पार्टी कार्यकर्ताओं का एक मजबूत नेटवर्क है और वह अपने प्रतिद्वंद्वियों से आगे है।” रहमान ने कहा कि अवामी लीग की अनुपस्थिति में धर्मनिरपेक्ष मतदाता बीएनपी को चुन सकते हैं। उन्होंने कहा कि लोग अवामी लीग द्वारा की गई चुनावी धांधली से निराश हैं और वे बीएनपी के पक्ष में मतदान करना चाहेंगे।
तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बीएनपी अपने घोषणापत्र के अनुसार, “बदले और प्रतिशोध की राजनीति के विपरीत, भविष्य की ओर उन्मुख एक नई राजनीतिक संस्कृति स्थापित करने की कोशिश कर रही है।” पार्टी के घोषणापत्र का हवाला देते हुए, बीएनपी नेताओं ने कहा कि पार्टी का मानना है कि राष्ट्र निर्माण केवल राज्य शासन के बारे में नहीं है, बल्कि विभाजनों पर काबू पाकर एक एकीकृत राष्ट्रीय पहचान बनाने के बारे में है।
बीएनपी के वरिष्ठ नेता गोयेश्वर चंद्र रॉय ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, “हिंदू अल्पसंख्यक आबादी कम है फिर भी हमारी पूजा-अर्चना में कई गुना वृद्धि हुई है। इससे पता चलता है कि हिंदू अल्पसंख्यक समुदाय अपने त्योहारों को मनाने के लिए स्वतंत्र है और अल्पसंख्यकों को निशाना नहीं बनाया जा रहा है?”
अवामी लीग का कार्यालय सुनसान
वहीं, दूसरी ओर अवामी लीग के सुनसान कार्यालय में एक पोस्टर लगा है जिस पर इसे अंतर्राष्ट्रीय फासीवाद और नरसंहार अनुसंधान संस्थान बताया गया है। अवामी लीग और शेख हसीना के शासन के प्रति इतना आक्रोश है कि सड़क का नाम बंगबंधु एवेन्यू से बदलकर शहीद अबरार फहद एवेन्यू कर दिया गया है।
पढ़ें- बांग्लादेश और अमेरिका के बीच 9 फरवरी को हो सकती है ट्रेड डील
