बांग्लादेश में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) सरकार ने शनिवार को बांग्लादेश और भारत के रिश्तों के भविष्य की डोर गंगा जल बंटवारे संधि के भरोसे पर छोड़ दी है। बांग्लादेश की राजधानी ढाका में एक कार्यक्रम के दौरान बीएनपी के महासचिव और ग्रामीण विकास और सहकारिता मंत्री मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने कहा कि भारत के साथ अच्छे संबंध बनाने का अवसर गंगा जल बंटवारा संधि पर निर्भर करेगा।

आगे उन्होंने यह भी कहा, “भारत के साथ अच्छे संबंध बनाने का अवसर गंगा जल बंटवारा संधि पर साइन होने पर निर्भर करेगा। बांग्लादेश भारत को एक स्पष्ट संदेश देना चाहता है कि बांग्लादेशी लोगों के हितों के अनुरूप बातचीत के माध्यम से एक नए समझौते को अंतिम रूप दिया जाना चाहिए।” गंगा जल बंटवारा संधि को फरक्का समझौते भी कहा जाता है।

दिया वर्तमान संधि लागू रहने का तर्क भी

मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने यह भी तर्क देते हुए कहा कि जब तक एक नया समझौता साइन नहीं हो जाता, तब तक वर्तमान समझौता लागू रहना चाहिए और सुझाव दिया कि दोनों पड़ोसी देशों के बीच भविष्य में जल-संधि व्यवस्था को एक निश्चित अवधि तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए।

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के कार्यकाल के दौरान 1996 में मौजूदा भारत-बांग्लादेश गंगा जल बंटवारा संधि साइन की गई थी, जो इस वर्ष दिसंबर में समाप्त होने वाली है।

क्यों अहम है गंगा संधि का मुद्दा?

चपाई नवाबगंज जिले से बांग्लादेश में बहने वाली पद्मा के नाम से जानी जाने वाली गंगा नदी, निचले इलाकों में स्थित इस कृषि, जैव विविधता और जल आपूर्ति प्रणालियों के लिए अहम है।

बांग्लादेश सैकड़ों नदियों से घिरा हुआ है, जिनमें से 54 नदियां या तो भारत से निकलती है या तो भारत से होकर बहती हैं, बांग्लादेश जल-बंटवारे की व्यवस्थाओं पर अधिक निर्भर है। मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर के मुताबिक, बांग्लादेश की 17 करोड़ आबादी का लगभग एक तिहाई हिस्सा आजीविका और परिस्थितिक स्थिरता के लिए नदियों पर निर्भर हैं।

बांग्लादेस के लिए फरक्का का मुद्दा काफी समय से राजनीतिक और भावनात्मक रूप से संवेदनशील है। बंग्लादेश की सरकारों और जल विशेषज्ञों का तर्क रहा कि फरक्का बैराज के कारण शुष्क मौसम में नदी के निचले इलाकों में जल प्रवाह कम होने से खारा पानी बढ़ गया है, जो नदी को नुकसान पहुंचा रहा है और कई इलाकों में खेती और परिस्थितिकी को भी हानि हुई है।

हालांकि भारत लगातार कहता रहा है कि फरक्का बैराज का निर्माण मुख्य रूप से हुगली नदी में पानी मोड़कर गाद को बहाकर कोलकाता बंदरगाह पर नावों की आवाजाही बनाए रखने के लिए किया गया था।

बांग्लादेश की पद्मा बांध योजना से हुआ विवाद

बीएनपी नेता की टिप्पणी बांग्लादेश के पद्मा नदी पर एक बांध बनाने के प्रोजेक्ट को मंजूरी देने के कुछ दिनों बाद आई है। बांध प्रोजेक्ट के बारे में बांग्लादेश सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य फरक्का बांध के नकारात्मक प्रभाव को कम करना है।

इस प्रोजेक्ट के 2033 तक पूरा होने की उम्मीद है। प्रोजेक्ट को इस सप्ताह की शुरुआत में बांग्लादेश पीएम तारिक रहमान की मौजूगी में बैठक के दौरान राष्ट्रीय आर्थिक परिषद की कार्यकारी समिति की ओर से मंजूरी दी गई थी।

यह भी पढ़ें: बांग्लादेश की जेल में 500 दिन से कैद हैं हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास, डिप्टी सीएम पवन कल्याण ने की रिहाई की मांग

बांग्लादेश के हाई कोर्ट ने रविवार (10 मई, 2026) को हिंदू संत ब्रह्मचारी चिन्मय कृष्ण दास की जमानत याचिका खारिज कर दी। इसको लेकर अब आंध्र प्रदेश के डिप्टी सीएम पवन कल्याण ने मांग की है कि चिन्मय कृष्ण दास को जमानत दी जाए। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें