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भारत के लिए जासूसी करने के आरोप में 15 साल पाकिस्तानी जेल में गुजारने वाले बांग्लादेशी की मौत

सरकार ने 27 वर्ष की उम्र में 1989 में घर छोड़ा, वहां से भारत गए और फिर बिना पासपोर्ट के ही पाकिस्तान चले गए। छह साल बाद जब वह घर लौट रहे थे तो पाकिस्तानी अधिकारियों ने उन्हें भारत की सीमा पर गिरफ्तार कर लिया।

Author ढाका | April 8, 2016 2:35 PM
मुस्लिमुद्दीन सरकार के भतीजे अब्दुल अल मामुन ने बताया कि कि वह खराब स्वास्थ्य के साथ चार साल पहले घर लौटे।(Photo Source:AP)

‘भारतीय जासूस’ होने के संदेह में 15 साल पाकिस्तानी जेल में गुजारने वाले बांग्लादेशी नागरिक की घर वापसी के चार साल बाद मौत हो गई। मधुमेह और किडनी फेल होने के कारण 50 वर्षीय मुस्लिमुद्दीन सरकार की मौत हुई है। सरकार के भतीजे अब्दुल अल मामुन ने बताया कि कि वह खराब स्वास्थ्य के साथ चार साल पहले घर लौटे। उनकी आज अपने गांव में मौत हो गई। पाकिस्तान की जेल में रहने के दौरान ही उन्हें मधुमेह, गुर्दे की समस्या सहित और कई दिक्कतें हो गई थीं।

मामून ने बताया, सरकार ने 27 वर्ष की उम्र में 1989 में घर छोड़ा, वहां से भारत गए और फिर बिना पासपोर्ट के ही पाकिस्तान चले गए। छह साल बाद जब वह घर लौट रहे थे तो पाकिस्तानी अधिकारियों ने उन्हें भारत की सीमा पर गिरफ्तार कर लिया।उन्हें (पाकिस्तान) संदेह था कि वह भारतीय जासूस हैं और इसके कारण 15 साल जेल में रहे, जबतक कि रेड क्रास ने हस्तक्षेप नहीं किया।

मामून ने कहा, उत्तरी मैमनसिंह जिले के एक गांव में रहने वाले सरकार के परिवार को 23 साल तक उनकी कोई खबर नहीं थी। उन्हें लगा कि सरकार मर चुके हैं। लेकिन एक दिन उन्हें सरकार की एक चिट्ठी मिली, जिसमें उन्होंने लिखा था कि वह पाकिस्तान की जेल में हैं। हमने इसके बाद रेडक्रास की मदद ली और उनके हस्तक्षेप से सरकार जेल से छूटकर अपने घर लौट सके।

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