बांग्लादेश के एक मंत्री ने इस बात की संभावना जताई है कि उनका देश मक्का पैक्ट में शामिल होने पर विचार कर सकता है। अगर ऐसा होता है तो पाकिस्तान, तुर्की और साऊदी अरब के बाद बांग्लादेश इस संगठन का चौथा देश होगा। बांग्लादेश के जूनियर विदेश हुमायूं कबीर ने कहा है, “अगर मिडिल ईस्ट में इस्लामिक देशों के बीच कोई सुरक्षा व्यवस्था है तो हमारे लिए उसमें हिस्सा लेने पर विचार करना कोई अजीब बात नहीं है। इसे पॉजिटिव तरीके से देखा जा रहा है।”

बता दें कि मक्का पैक्ट इसी महीने पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब के बीच साइन किया गया एक आपसी डिफेंस एग्रीमेंट है। अगर बांग्लादेश इसमें शामिल होता है तो इसका असर उसके विदेशी रिश्तों पर पड़ेगा। भारत के साथ रिश्तों पर भी इसका असर पड़ने की संभावना है। भारत और बांग्लादेश के बीच कुछ समय से रिश्ते तनावपूर्ण ही चल रहे हैं फिर चाहे सीमा विवाद हो या फिर बांग्लादेश में हिंदुओं की हत्या या फिर शेख हसीना का प्रत्यार्पण मामलो हो।

‘सऊदी ने बांग्लादेश को दिया था न्योता’

मक्का पैक्ट में बांग्लादेश के शामिल होने की संभावना को लेकर हुमायूं कबीर ने कहा, “वे बांग्लादेश की लीडरशिप, खासकर प्रधानमंत्री तारिक रहमान को आने और हिस्सा लेने के लिए बुला रहे हैं।” रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब ने ढाका को समझौते में शामिल होने के लिए बुलाया था, लेकिन यह नहीं बताया कि यह न्योता कब दिया गया था।

भारत पर इसका क्या असर पड़ सकता है?

बांग्लादेश के मक्का पैक्ट में शामिल होने की चर्चाओं के बीच इसका असर भारत पर क्या पड़ेगा ये जानना भी अहम है। अगर बांग्लादेश से पैक्ट में शामिल होता है तो यह भारत के साथ उसके संबंधों को कहीं न कहीं और खराब कर सकता है, क्योंकि मक्का पैक्ट समझौते में शामिल देशों में से अगर किसी एक पर हमला होता है तो वह हमला अन्य सदस्य देशों पर भी माना जाएगा। इसी महीने हुए इस समझौते का आधार ही यही था और पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब इस पर अमल कर रहे हैं।

बांग्लादेश का स्वागत करने को तैयार अन्य देश

इस पैक्ट के सदस्य देशों ने यह वादा किया कि एक सदस्य पर हथियारों से लैस हमला सभी पर हमला माना जाएगा, यह उस इलाके में बढ़ते तनाव के बीच होगा जिसकी वजह से ईरान ने पूरे मिडिल ईस्ट में मिसाइल दागे हैं। बांग्लादेश भी तुर्की की तरह एक सेक्युलर रिपब्लिक है। हालांकि इसकी 90% से से अधिक आबादा खुद को सुन्नी मुसलमान बताती है। वहीं तुर्की जिसके पास NATO की दूसरी सबसे बड़ी आर्मी है उसने कहा है कि न्यूक्लियर हथियारों से लैस पाकिस्तान और टॉप ऑयल एक्सपोर्टर सऊदी अरब के साथ समझौता बढ़ाने के लिए खुला है।

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