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बांग्लादेश के पूर्व सीजेआई ने कहा- मोदी हमारी निरंकुश सरकार का दे रहे साथ, भारत को चुकानी होगी कीमत

बांग्लादेश के पूर्व प्रधान न्यायाधीश सुरेंद्र कुमार सिन्हा ने भारत से आग्रह किया है कि वह पड़ोसी देश में कानून के शासन और लोकतंत्र का समर्थन करे।

Author ढाका | October 2, 2018 4:56 PM
बांग्लादेश के पूर्व प्रधान न्यायाधीश सुरेंद्र कुमार सिन्हा

बांग्लादेश के पूर्व प्रधान न्यायाधीश सुरेंद्र कुमार सिन्हा ने भारत से आग्रह किया है कि वह पड़ोसी देश में कानून के शासन और लोकतंत्र का समर्थन करे। उन्होंने कहा कि निरंकुश आवामी लीग नीत सरकार का समर्थन करके भारत सरकार को लोगों की इच्छाओं की उपेक्षा नहीं करना चाहिए। सिन्हा (67) बांग्लादेश के पहले हिंदू, प्रधान न्यायाधीश रहे हैं। उन्होंने अमेरिका में राजनीतिक शरण ले रखी है। उनका आरोप है कि उन्हें इस्तीफा देने पर मजबूर किया गया क्योंकि उन्होंने अलोकतांत्रिक तथा अधिकारवादी शासन का विरोध किया था। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना के नेतृत्व वाली सरकार ने सिन्हा के आरोपों का खंडन किया और उन पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। सिन्हा ने अपनी किताब ‘ ए ब्रोकन ड्रीम : रूल ऑफ लॉ, ह्यूमन राइट्स ऐंड डेमोक्रेसी ’ के विमोचन के अवसर पर यहां पीटीआई-भाषा से कहा कि भारत सरकार हसीना सरकार के पक्ष में मजबूती से खड़ी होकर बांग्लादेशी लोगों की इच्छा की उपेक्षा कर रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि हसीना सरकार ने चुनाव का स्वांग रचकर इनमें खुद को निर्वाचित कराया। सिन्हा ने कहा, अगर भारत निरंकुशता का समर्थन करेगा और अगर यह तानाशाही, यह आतंकवाद (लोगों की आवाज का दमन) जारी रहेगा तो एक दिन लोग विद्रोह कर देंगे। सत्तारूढ़ आवामी लीग ने उन पर भ्रष्टाचार तथा सत्ता के दुरूपयोग का आरोप लगाया है, हालांकि सिन्हा इन आरोपों को खारिज करते हैं। उन्होंने यह माना कि बांग्लादेश में मुस्लिम कट्टरपंथी समूहों और नेताओं के प्रति भारत चिंतित है।

उन्होंने यह भी कहा कि चिंता के इन मुद्दों को उन्होंने मोदी सरकार तथा सत्तारूढ़ दल के अन्य नेताओं तक पहुंचाया है। सिन्हा ने कहा, मैं भारत गया था और उन्हें (मोदी को) उन समस्याओं के बारे में बताया जिनका मैं सामना कर रहा हूं। मुझे नहीं पता कि उन्हें किसने सलाह दी है लेकिन वह बांग्लादेश की निरंकुश सरकार की तरफ हैं। दीर्घकाल में, भारत को इसकी कीमत चुकानी होगी।

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