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1 लाख रोहिंग्या मुसलमानों को निर्जन द्वीप पर ‘जबरन’ बसाने की तैयारी कर रहा बांग्लादेश! मोबाइल सेवा भी की बंद

बांग्लादेश सरकार ने करीब एक साल पहले इस द्वीप पर सड़कें, शिविर और बाढ़ से बचाने वाली दिवारें बनवानी शुरू कीं। एक परियोजना को पूरा करने में करीब 28 करोड़ डॉलर का खर्च आया।

करीब बीस साल पहले बंगाल की खाड़ी में यह द्वीप बनना शुरू हुआ था। विशेषज्ञों का कहना है कि यह द्वीप ऐसी जगह पर जहां मानसून में हमेशा बाढ़ का खतरा होगा।

म्यांमार हिंसा के बाद जान बचाकर बंग्लादेश पहुंचे करीब दस लाख रोहिंग्या मुस्लिमों में से एक लाख लोगों को सरकार अब जबरन स्थानांतरित करने की योजना बना रही है। सरकार की योजना एक लाख रोहिंग्याओं को दूर भाशन चार द्वीप भेजने की तैयारी है। बंगाल की खाड़ी में स्थित इस द्वीप को निर्जन द्वीप भी कहा जाता है। डीडब्ल्यू की खबर के मुताबिक इस द्वीप पर सैकड़ों घर बनाए गए हैं। हालांकि संयुक्त राष्ट्र, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और खुद रोहिंग्या शरणार्थियों ने सरकार की इस योजना पर सवाल उठाए हैं। दरअसल भाशन चार एक छोटा और तलछट से बना द्वीप है, जिसपर बाढ़ और तूफान आने का खतरा हमेशा बना रहता है।

रिपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेश सरकार ने करीब एक साल पहले इस द्वीप पर सड़कें, शिविर और बाढ़ से बचाने वाली दिवारें बनवानी शुरू कीं। एक परियोजना को पूरा करने में करीब 28 करोड़ डॉलर का खर्च आया। बता दें कि करीब बीस साल पहले बंगाल की खाड़ी में यह द्वीप बनना शुरू हुआ था। विशेषज्ञों का कहना है कि यह द्वीप ऐसी जगह पर जहां मानसून में हमेशा बाढ़ का खतरा होगा।

अब बंग्लादेश सरकार की योजना है कि इस द्वीप पर बनाए गए 1,440 घरों में करीब एक लाख रोहिंग्याओं को भेजा जाए। म्यांमार सीमा से सेट बांग्लादेश के कोक्स बाजार में स्थित शरणआर्थी शिविरों में इस समय करीब दस लाख शरणार्थी हैं। मामले में बंग्लादेश सरकार में एक वरिष्ठ मंत्री ने बताया कि द्वीप पर निर्माण कार्य पूरा हो गया है और अगले महीने लोगों को वहां भेजा जाएगा।

बता दें कि बांग्लादेश के दूरसंचार नियामक निकाय ने ऑपरेटरों से देश के दक्षिणपूर्व में बेतरतीबी से फैले हुए शिविरों में सुरक्षा खतरे और फोन के गैरकानूनी इस्तेमाल का हवाला देते हुए मोबाइल सेवाएं बंद करने को कहा है। इन शिविरों में म्यामां से भागे हुए हजारों रोहिंग्या शरणार्थी रह रहे हैं। बांग्लादेश दूरसंचार नियामक आयोग के प्रवक्ता जाकिर हुसैन खान ने कहा कि उन्होंने ऑपरेटरों से सात दिन के भीतर आदेश पर जवाब देने के लिए कहा है।

उन्होंने फोन पर कहा, ‘‘राष्ट्रीय सुरक्षा की वजहों से यह फैसला लिया गया है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम यह देखकर हैरान रह गए कि रोहिंग्या शरणार्थी गैरकानूनी तरीके से मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रहे हैं और हमें स्थिति स्पष्ट नहीं है।’’ यह पूछे जाने पर कि देश किस तरह के सुरक्षा खतरे का सामना कर रहा है, इस पर खान ने कहा कि शिविरों में हाल के एक सर्वेक्षण से पता चला कि वहां सेलफोन गैरकानूनी तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि ऐसी रिपोर्टें हैं कि वहां ऐसे लोग मौजूद हैं जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हैं। हालांकि उन्होंने विस्तृत जानकारी नहीं दी।

पिछले महीने सत्तारूढ़ पार्टी के एक सदस्य की इस इलाके में हत्या कर दी गई और पुलिस ने इस हत्या के लिए रोहिंग्या को जिम्मेदार ठहराया। खान ने बताया कि जब तक सेलफोन सेवाएं रोकी गई है तब तक ऑपरेटरों से कॉक्स बाजार जिले में शिविरों में हर दिन शाम पांच से सुबह पांच बजे के बीच डेटा और इंटरनेट सेवा निलंबित करने के लिए कहा गया है जिसका मतलब है कि केवल फोन कॉल ही की जा सकती हैं। (भाषा इनपुट)

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