बांग्लादेश में 12 फरवरी को आम चुनाव होने वाले हैं। अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की गैरमौजूदगी में यह चुनाव काफी अहम होने वाला है। शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग चुनाव नहीं लड़ सकती है क्योंकि उस पर बैन लगा हुआ है। ऐसे में सभी दलों की निगाहें उसके वोटरों को अपनी तरफ लाने पर होगी। वहीं बीते डेढ़ साल में बांग्लादेश के साथ भारत के रिश्ते भी खराब हुए हैं। इसकी जिम्मेदार वहां की आंतरिम यूनुस सरकार बताई जाती है।
तीन प्रमुख दलों ने जारी किया है घोषणापत्र
बांग्लादेश की तीन प्रमुख पार्टियों ने अपना घोषणापत्र जारी किया है और भारत को लेकर भी इसमें जिक्र किया गया है। बांग्लादेश के आम चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP), जमात-ए-इस्लामी और नेशनलिस्ट सिटीजन पार्टी (NCP) के प्रदर्शन पर लोगों की नजर है।
बीएनपी ने क्या कहा?
बीएनपी पूर्व प्रधानमंत्री और दिवंगत खालिदा जिया की पार्टी है। इसका नेतृत्व उनके बेटे तारिक रहमान कर रहे हैं। इस पार्टी का ध्यान बांग्लादेश को विकसित बनाने और स्वतंत्र विदेश नीति लागू करने पर है। भारत को लेकर बीएनपी का कहना है कि विदेश नीति को समानता और आत्मसम्मान के सिद्धांतों पर रखा जाएगा।
अपने घोषणा पत्र में बीएनपी ने सीमापार होने वाली अवैध घुसपैठ के लिए भी सख्त रुख अपनाने का वादा किया है। इसके अलावा रहमान ने कहा है कि बांग्लादेश किसी भी देश का प्रॉक्सी नहीं बनेगा। उन्होंने बांग्लादेश के अल्पसंख्यकों यानी हिंदू, सिख और ईसाइयों को लेकर कहा है कि उनके पूजा स्थलों की सुरक्षा के लिए सख्त कानून बनाया जाएगा। बीएनपी ने यह भी कहा है कि सभी धर्म के धार्मिक नेताओं के लिए सरकारी वजीफा और कल्याणकारी कार्यक्रम शुरू किया जाएंगे।
जमात-ए-इस्लामी का किस बात पर जोर
अगर हम जमात-ए-इस्लामी के घोषणापत्र की बात करें तो इसने सुरक्षित और मानवीय बांग्लादेश पर जोर दिया है। इस पार्टी ने वादा किया है कि 2040 तक बांग्लादेश को दो ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाएंगे और प्रति व्यक्ति आय $10,000 तक पहुंचाएंगे। वर्तमान में बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था 35वें स्थान पर है और इसे 20वें स्थान पर लाने का लक्ष्य रखा गया है। भारत के साथ रिश्तों को लेकर जमात-ए-इस्लामी का कहना है कि वह अगर सत्ता में आती है तो रिश्ते शांतिपूर्ण होंगे और सहयोग बढ़ाए जाएंगे। घोषणापत्र में पाकिस्तान का कोई जिक्र नहीं है। जमात-ए-इस्लामी ने धार्मिक अल्पसंख्यको का जिक्र अपने घोषणापत्र में नहीं किया है
नेशनलिस्ट सिटीजन पार्टी के क्या हैं वादे?
नेशनलिस्ट सिटीजन पार्टी का गठन फरवरी 2025 में हुआ था। यह छात्रों के नेतृत्व वाली पार्टी है और इसी ने शेख हसीना के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व किया था। यह पार्टी पहली बार चुनाव लड़ रही है और इसने युवाओं पर फोकस करते हुए घोषणापत्र जारी किया है। इस पार्टी का मुख्य वादा अगले 5 सालों में एक करोड़ नौकरी पैदा करना और मतदान की उम्र घटाकर 16 वर्ष करना है। वहीं इसी पार्टी ने भारत के लिए संसद में 100 सीटें आरक्षित करने का भी वादा किया है।
भारत के साथ रिश्तों पर एनसीपी का रुख है कि वह सीमाओं पर होने वाली हत्याओं और पानी को लेकर विवाद को सुलझाएगी। सरकार में आने पर ये पार्टी शेख हसीना के मामले को लेकर अंतरराष्ट्रीय अदालत भी जा सकती है। इस दल को युवा बड़ी संख्या में समर्थन करते हैं।अल्पसंख्यकों के खिलाफ हुई हिंसा पर एक विशेष जांच सेल बनाने का वादा किया है। पढ़ें शेख हसीना के बिना बांग्लादेश में चुनाव
