बांग्लादेश में गुरुवार को चुनाव की वोटिंग हो रही है। बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी गठबंधन के बीच मुकाबला देखने को मिल रहा है। शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग को ये चुनाव लड़ने का मौका नहीं मिला है। इस चुनाव को हर मायने में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, ओपिनियन पोल्स, तो बीएनसपी को बढ़त भी दिखा रहे हैं। अब इस बड़े चुनाव के बीच इंडियन एक्सप्रेस ने बीएनपी के प्रधानमंत्री उम्मीदवार तारिक रहमान के साथी महदी अमीन से खास बातचीत की है, उन्होंने ना सिर्फ इन चुनावों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है बल्कि भारत के साथ रिश्ते पर भी विस्तार से बात की है। उस पूरे इंटरव्यू को यहां पढ़ें-

सवाल- इस चुनाव से आपको क्या उम्मीद है?

जवाब: सबसे पहली उम्मीद तो यही है कि लंबे समय बाद बांग्लादेश के लोग वोट कर पा रहे हैं। एक दशक से भी ज्यादा वक्त से उन्हें वोटिंग के अधिकार से रोका जा रहा था। ऐसे में पूरा विश्वास है कि बांग्लादेश के लोग पूरे उत्साह, जुनून के साथ वोटिंग करने आएंगे और अपने प्रतिनिधि को चुनेंगे। इस चुनाव में बीएनपी की सरकार बनने जा रही है।

सवाल: तारिक रहमान की वापसी का बांग्लादेश के लिए क्या मतलब?

जवाब: तारिक रहमान बांग्लादेश में नहीं था, लेकिन वो बांग्लादेश की जनता के साथ हमेशा से ही जुड़ा हुआ था। वो सिर्फ पार्टी कार्यकर्ताओं के संपर्क में नहीं था बल्कि दूसरे लोगों से भी बात कर रहा था। ऐसे में उसके वापस आने का मतलब है कि फिर विकास के रास्ते पर बांग्लादेश चलेगा और लोगों की तकदीर को बदला जाएगा। अगर वो जीत जाता है तो बांग्लादेश की शिक्षा, हेल्थकेयर, कृषि, रोजगार, पर्यावरण की दिशा में कई कदम उठाए जाएंगे। लोग पहली की तुलना में खुद को ज्यादा सशक्त महसूस करेंगे।

सवाल: भारत ने समावेशी चुनाव की बात की है, लेकिन आवामी लीग तो लड़ ही नहीं रही?

जवाब: बांग्लादेश के लोगों ने अपना विकल्प चुन लिया है। जिस पार्टी की आप बात कर रहे हैं, उसका मानवाधिकारों के उल्लंघन का पुराना इतिहास है, विपक्ष के खिलाफ फर्जी केस करने के लिए मशहूर है। इसी वजह से बांग्लादेश के लोगों ने अपना फैसला ले लिया है। उनका फैसला है कि उस एक पार्टी को खारिज करना और दूसरों के साथ आगे बढ़ना।

सवाल: जमात के बारे में क्या कहेंगे, क्या ये बीएनपी के लिए चुनौती?

जवाब: उनकी अपनी एक राजनीति है, जमात और बीएनपी की विचारधारा अलग है। बात अगर महिला सशक्तिकरण की करें तो बीएनपी ने यहां बड़े कदम उठाए हैं। इसकी शुरुआत जिया उर रहमान ने की थी जब उन्होंने महिला मंत्रालय का गठन किया। इसके बाद जब बेगम खालिदा जिया प्रधानमंत्री बनीं, उन्होंने महिला सशक्तिकरण के नए आयाम स्थापित किए। जब बीएनपी की सरकार थी, सबसे ज्यादा महिलाएं काम कर रही थीं, 12वीं तक लड़कियों को मुफ्त शिक्षा मिल रही थी।

सवाल: अगर आप सत्ता में आते हैं तो सबसे बड़ी प्राथमिकता क्या होगी?

जवाब: सबसे पहले कानून व्यवस्था को ठीक करना होगा, जवाबदेही तय करेनी होगी, लंबे समय से इसका आभाव देखने को मिल रहा है। इसके अलावा हम लोगों को सशक्त करने पर जोर देंगे। अगली BNP सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि सत्ता की जड़ें जनता से निकलें, पारदर्शिता, जवाबदेही तय रहे।

सवाल: अल्पसंख्यक की सुरक्षा पर क्या कहेंगे, वो काफी प्रभावित हुए हैं?

जवाब: बीएनपी राष्ट्रवादी की विचारधारा पर चलती है जहां पर सभी को बांग्लादेश के नागरिक के रूप में देखा जाता है, उसकी विचारधारा, धर्म के आधार पर नहीं। सभी के पास समान अधिकार हैं। बीएनपी सरकार की यही पहचान भी रहने वाली है। अगस्त पांच के बाद देख लीजिए बीएनपी ने कोशिश की कि सभी धर्म के लोगों से बात की जाए. कई के हमने घर बचाए, मंदिर बचाए। हम एक एकजुट बांग्लादेश का सपना देखते हैं।

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