बांग्लादेश के आम चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने बड़ी जीत दर्ज की है जबकि जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11 दलों के गठबंधन को जनता ने लगभग खारिज कर दिया है। बांग्लादेश के चुनाव नतीजों के बीच एक सवाल का जवाब जानना जरूरी है कि ऐसी सीटों पर जहां हिंदू मतदाता असरदार हैं, वहां पर किस राजनीतिक दल को जीत मिली है?

इस सवाल का जवाब तलाशने से पहले एक अहम बात यह कि इस बार पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग चुनाव मैदान में नहीं थी। अवामी लीग के चुनाव लड़ने पर मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया था।

ऐसी स्थिति में राजनीतिक विश्लेषकों की नजर इस बात पर थी कि हिंदू वोट किसे मिलेंगे क्योंकि बांग्लादेश में हिंदू मतदाताओं के वोटों का बहुत बड़ा हिस्सा अवामी लीग को मिलता था।

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चुनाव नतीजों को देखें तो हिंदू मतदाताओं के असर वाली सीटों- गोपालगंज, खुलना, सिलहट, चटगांव और ठाकुरगंज में बीएनपी को जीत मिली है। ऐसे में यह कहा जा सकता है कि हिंदू मतदाताओं ने अवामी लीग की गैर मौजूदगी में बीएनपी पर भरोसा जताया है।

गोपालगंज में तीनों सीटों पर जीती बीएनपी

गोपालगंज जिले में लगभग 22% हिंदू आबादी है और यहां की तीनों सीटों पर बीएनपी को जीत मिली है। चुनाव नतीजों में गोपालगंज एक, गोपालगंज दो और गोपालगंज तीन सीट से बीएनपी जीती है। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना भी गोपालगंज सीट से ही चुनाव लड़ती थीं। गोपालगंज को अवामी लीग का गढ़ माना जाता है।

तारिक रहमान जब 17 साल तक लंदन में रहने के बाद ढाका लौटे थे तब उन्होंने उनके स्वागत में जुटे पार्टी के कार्यकर्ताओं और आम लोगों के सामने देश में शांति बनाए रखने और एक नया बांग्लादेश को बनाने का संकल्प लिया था। बांग्लादेश में पिछले कुछ महीनों में हिंदू समुदाय के लोगों पर अत्याचार की कई घटनाएं हुई हैं।

ऐसे में जब तारिक रहमान का प्रधानमंत्री बनना लगभग तय है तो उनके नेतृत्व वाली सरकार के सामने एक बहुत बड़ी चुनौती अल्पसंख्यकों विशेषकर हिंदू समुदाय के लोगों की सुरक्षा करना और उनके भरोसे पर खरा उतरने की होगी।

तब रहमान ने अपने भाषण में कहा था कि बांग्लादेश मुसलमानों, हिंदुओं, बौद्धों, ईसाइयों और सभी धर्मों के मानने वालों का है और हम एक सुरक्षित बांग्लादेश बनाना चाहते हैं।

8-9 प्रतिशत है हिंदू आबादी

बांग्लादेश में लगभग एक करोड़ 30 लाख हिंदू हैं और इस इस्लामिक मुल्क की कुल आबादी में वह आठ से नौ प्रतिशत हैं। शेख हसीना को सत्ता से हटाए जाने के बाद से ही हिंदू समुदाय के लोगों को कट्टरपंथियों के हाथों जुल्म का शिकार होना पड़ा है लेकिन जैसा वादा तारिक रहमान ने किया था कि वह बांग्लादेश को सभी धर्मों के लोगों के लिए सुरक्षित जगह बनाएंगे, देखना होगा कि क्या वह अपना वादा पूरा कर पाएंगे?

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