Bangladesh News: बांग्लादेश ने निर्णायक फैसला सुना दिया है, बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी ने संसदीय चुनाव में शानदार जीत हासिल की है और तारिक रहमान अगले प्रधानमंत्री बनने के लिए तैयार हैं। जहां कई लोग रहमान और बीएनपी की जीत का जश्न मना रहे हैं, वहीं कुछ लोग यह सोच रहे हैं कि मोहम्मद यूनुस का क्या होगा। साथ ही, इतिहास उनके कार्यकाल को किस रूप में याद रखेगा?

दक्षिण-पूर्वी बंगाल के चटगांव में जन्मे यूनुस ने चटगांव विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र पढ़ाया। उन्हें 2006 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 2024 में हुए विद्रोह के बाद यूनुस को सर्वसम्मति से अंतरिम प्रशासन का नेतृत्व करने के लिए चुना गया। शुरू में यूनुस कथित तौर पर इस पद को लेकर हिचकिचा रहे थे और उनका कहना था कि वे राजनीतिक व्यक्ति नहीं हैं।” लेकिन जैसे-जैसे विरोध प्रदर्शन बढ़े और मौतें बढ़ती गईं, उन्होंने कर्तव्य की भावना में यह जिम्मेदारी संभाली।

उनके सामने चुनौती थी एक खंडित देश को स्थिर करना, एक विश्वसनीय चुनावी प्रक्रिया को बहाल करना और अलग-अलग राज्य संस्थानों के बीच शक्ति संतुलन बनाकर सत्तावादी शासन की वापसी को रोकने के उद्देश्य से सुधारों पर आम सहमति बनाना।

यूनुस के लिए चुनाव के बाद का भविष्य

गौरतलब है कि इस चुनाव में मोहम्मद यूनुस उम्मीदवार नहीं थे। चुनाव से पहले उन्होंने दावा किया था कि वे बांग्लादेश के केवल कार्यवाहक हैं और चुनावी प्रक्रिया के एक निष्पक्ष संचालक के रूप में अपनी भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा था कि चुनाव के बाद उनकी तत्काल जिम्मेदारी सत्ता का सुचारू और शांतिपूर्ण हस्तांतरण सुनिश्चित करना है।

मंगलवार (10 फरवरी) को राजनीतिक अभियान खत्म होने के कुछ घंटों बाद टेलीविजन पर प्रसारित अपने संबोधन में नोबेल पुरस्कार विजेता ने कहा, “अंतरिम सरकार का कार्य नई सरकार के चुनाव के साथ खत्म हो जाएगा। नव निर्वाचित सरकार को खुशी और गर्व के साथ सत्ता सौंपने के बाद हम अपने-अपने व्यवसायों में लौट लौटेंगे।” मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार के गठन के बाद यूनुस सेंटर और ग्रामीण बैंक में अपने काम पर लौटने का इरादा रखते हैं, जहां वे सामाजिक व्यवसाय और गरीबी उन्मूलन पर फोकस करेंगे।

युनुस के नेतृत्व में हसीना के शासनकाल में हुए अत्याचारों की जांच के लिए कई समितियां गठित की गईं। इनमें आलोचकों की गिरफ्तारी, गैर-न्यायिक हत्याएं और जबरन गायब करना शामिल थे। शेख हसीना को मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए उनकी गैरमौजूदगी में मृत्युदंड दिया गया और अन्य मामलों में दोषी ठहराया गया। यूनुस ने जबरन गुमशुदगी की जांच के लिए एक आयोग का गठन भी किया। हालांकि, कानून-व्यवस्था के मामले में यूनुस उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे। ‘गॉथम बट नो बैटमैन’ शीर्षक वाली एक रिपोर्ट में अल जजीरा ने बताया कि अंतरिम सरकार के शासनकाल में बांग्लादेश की राजधानी में लूटपाट, मारपीट और बलात्कार की घटनाएं बढ़ गईं।

बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ते अपराधों का मुद्दा भी है। बांग्लादेश अल्पसंख्यक मानवाधिकार कांग्रेस की जनवरी की एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि बांग्लादेश में मात्र सात महीनों में अल्पसंख्यक समुदायों के कम से कम 116 सदस्यों की हत्या कर दी गई। यूनुस के प्रशासन के दौरान ही बांग्लादेश ने अमेरिका के साथ 2026 का व्यापार समझौता और चीन से बुनियादी ढांचे के लिए 2.1 बिलियन डॉलर की धनराशि हासिल की। बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी का कहना है कि चुनाव कराना ही एक बड़ी उपलब्धि थी।

बांग्लादेश में किस पार्टी ने कितनी सीटें जीतीं?

बांग्लादेश में 13वीं राष्ट्रीय सभा के चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी (BNP) ने स्पष्ट बहुमत से सरकार बनाई है। बीएनपी ने 209 सीटें जीती हैं। इसके अलावा, बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी ने 68, एनसीपी ने 6, बांग्लादेश खिलाफत मजलिस ने 2, इस्लामी आंदोलन बांग्लादेश ने 1, गण अधिकार परिषद ने 1, बांग्लादेश जातीय पार्टी (BJP) ने 1, गण संघती आंदोलन ने 1, खिलाफत मजलिस ने 1 और निर्दलीय उम्मीदवारों ने 7 सीटें जीती हैं। पीएम मोदी ने तारिक रहमान को जीत पर बधाई दी है। पढ़ें पूरी खबर…