Bangladesh Election 2026: बांग्लादेश में गुरुवार को संसदीय चुनाव होने जा रहे हैं। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफे और खालिदा जिया के निधन के बाद यह देश का पहला आम चुनाव है। इन दोनों नेताओं ने 1991 से 2024 तक बांग्लादेश की राजनीति को प्रभावित किया है। इसके परिणामस्वरूप, देश लगभग 35 सालों के बाद एक नए राजनीतिक अध्याय में प्रवेश करने जा रहा है और एक नए प्रधानमंत्री के चुने जाने की संभावना है।
चुनाव आयोग ने 2024 के छात्र प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा में अवामी लीग की कथित भूमिका का हवाला देते हुए उसे चुनाव में भाग लेने से प्रतिबंधित कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, ये चुनाव न केवल देश की घरेलू राजनीति के लिए बल्कि दक्षिण एशिया में कूटनीतिक संतुलन के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इसलिए, भारत, पाकिस्तान और चीन स्थिति पर कड़ी नजर रख रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगस्त 2024 में नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार के गठन के बाद से बांग्लादेश की विदेश नीति में बदलाव आया है। पर्यवेक्षकों का मानना है कि भारत के साथ संबंध बिगड़े हैं, जबकि पाकिस्तान के साथ संपर्क बढ़े हैं और चीन के साथ रणनीतिक निकटता मजबूत हुई है।
भारत और बांग्लादेश के बीच तनाव
हाल के दिनों में कई मुद्दों पर भारत और बांग्लादेश के बीच तनाव बढ़ गया है। छात्र आंदोलन के बाद शेख हसीना को भारत में शरण देना, अल्पसंख्यकों पर अत्याचार के आरोप, बॉर्डर पर बीएसएफ और बीजीबी के बीच तनाव और सोशल मीडिया पर भड़काऊ प्रचार ने दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित किया है। भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों के आसपास बांग्लादेश की भू-राजनीतिक स्थिति भी दिल्ली के लिए एक संवेदनशील मुद्दा बन गई है।
दूसरी ओर, पाकिस्तान के साथ संबंधों में सुधार के संकेत मिले हैं। दोनों देशों के बीच हाई लेवल मीटिंग हो चुकी है, कराची और चटगांव के बीच माल ढुलाई फिर से शुरू हो गई है और ढाका-कराची के बीच सीधी फ्लाइट भी शुरू हो गई हैं। वीजा नियमों में ढील और क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस्लामाबाद ढाका के साथ संबंध मजबूत करके क्षेत्रीय रणनीतिक संतुलन में अपनी स्थिति मजबूत करना चाहता है।
बांग्लादेश का चीन के साथ आर्थिक और रक्षा सहयोग भी बढ़ा है। बुनियादी ढांचे, बंदरगाहों, बिजली और प्रौद्योगिकी में निवेश के अलावा, रक्षा उपकरणों पर भी समझौते किए गए हैं। चीन बांग्लादेश में निवेश और व्यापार बढ़ाने में रुचि रखता है और उसने चुनाव के बाद सत्ता में आने वाली किसी भी सरकार के साथ काम करने की इच्छा व्यक्त की है।
विश्लेषकों के अनुसार, बांग्लादेश में होने वाले इस चुनाव का दक्षिण एशिया में सत्ता संतुलन पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है। भौगोलिक दृष्टि से, बांग्लादेश लगभग सभी ओर से भारत के उत्तर पूर्वी राज्यों को घेरे हुए है। सिलीगुड़ी कॉरिडोर से जुड़ा यह क्षेत्र संचार और सुरक्षा की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है। साथ ही, बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर क्षेत्र में बांग्लादेश की रणनीतिक स्थिति इंटरनेशनल ट्रेड और जहाजरानी के लिहाज से भी बेहद अहम है।
चीन ने पिछले कुछ सालों में बांग्लादेश में भारी निवेश किया
भारत-चीन प्रतिद्वंद्विता के संदर्भ में ढाका की स्थिति खास महत्व रखती है। चीन ने पिछले कुछ सालों में बांग्लादेश में भारी निवेश किया है। चुनाव के बाद बनने वाली सरकार की नीति क्षेत्रीय रणनीतिक समीकरण को प्रभावित कर सकती है। इसके अलावा, इस्लामी राजनीति और संभावित चरमपंथ का मुद्दा भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चर्चा का विषय बना हुआ है।
हाल के समय में भारत और बांग्लादेश के बीच व्यापारिक तनाव भी देखने को मिला है। वित्त वर्ष 2024-25 में दोनों देशों के बीच व्यापार लगभग 13.51 अरब डॉलर रहने का अनुमान है। इसमें से भारत का निर्यात लगभग 11.46 अरब डॉलर और आयात लगभग 2.05 अरब डॉलर रहा। हालांकि, विशेषज्ञों को आशंका है कि अगर राजनयिक तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो व्यापार प्रभावित हो सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, चुनाव के परिणाम बांग्लादेश के भविष्य के रणनीतिक मार्ग को निर्धारित करेंगे। अगर एक मजबूत एकल सरकार बनती है, तो विदेश नीति में कई बदलाव हो सकते हैं। वहीं, अगर गठबंधन सरकार बनती है, तो नीतिगत अस्थिरता का खतरा है। कुल मिलाकर, 12 फरवरी का चुनाव न केवल बांग्लादेश के राजनीतिक भविष्य को, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया में सत्ता संतुलन को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। बांग्लादेश चुनाव के बीच हिंदुओं के हाल पर सबसे बड़ी ग्राउंड रिपोर्ट यहां पढ़ें
