Sheikh Hasina Bangladesh News: बांग्लादेश सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की स्वदेश वापसी के बयानों पर बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी है। बांग्लादेश ने मंगलवार को कहा कि वह सत्ता से हटाई गईं पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की घर वापसी की योजना का “स्वागत” करता है। बांग्लादेश के वर्तमान प्रधानमंत्री तारिक रहमान के सलाहकार ने चुनौती देते हुए कहा, “उन्हें दुनिया के सर्वश्रेष्ठ वकीलों को अपने साथ लाने दें, उन्हें न्याय का सामना करना ही होगा।”

बांग्लादेश की तरफ से ये बयानबाजी ऐसे समय में हुई है, जब हाल ही में शेख हसीना ने एक इंटरव्यू में इस साल के अंत तक बांग्लादेश लौटने की संभावना जताई थी। हालांकि, बांग्लादेश की वर्तमान सरकार और पिछली अंतरिम सरकार भारत से कई शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग कर चुकी है लेकिन इस मुद्दे पर भारत की तरफ से कोई कदम नहीं उठाया गया है।

सबसे अच्छे वकील लाएं शेख हसीना

दरअसल, अब शेख हसीना की बांग्लादेश में वापसी की संभावनाओं और उनके बयानों बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के सूचना एवं रणनीति सलाहकार ज़ाहिद उर रहमान ने एक मीडिया ब्रीफिंग में बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि शेख हसीना को एक दोषी के रूप में अदालती न्याय का सामना करना होगा।

जाहिद उर रहमान ने कहा, “हम उनके लौटने की घोषणा का स्वागत करते हैं क्योंकि हम न्याय सुनिश्चित करना चाहते हैं। देश की जनता चाहती है कि उनके द्वारा किए गए अपराधों के लिए उन्हें मौत की सजा दी जाए। उस स्थिति में उनके मृत्युदंड को अंजाम दिया जाएगा क्योंकि जनता यही देखना चाहती है। वे चाहे तो दुनिया के सबसे अच्छे वकीलों को अपने बचाव के लिए ले आएं।”

छात्र आंदोलन के बाद भारत में रह रही हैं हसीना

गौरतलब है कि बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर रहमान की बेटी और अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना को 5 अगस्त, 2024 को छात्रों के नेतृत्व में हुए हिंसक और बड़े सड़क विरोध प्रदर्शनों के बाद सत्ता छोड़नी पड़ी थी। फिलहाल वे एक शरणार्थी के तौर पर भारत में रह रही हैं और उनकी हाई सिक्योरिटी के इंतजाम भारत की टॉप एजेंसियां देख रही हैं।

शेख हसीना के खिलाफ आ चुका है मौत की सजा का फैसला

पिछले साल नवंबर में ढाका के एक विशेष न्यायाधिकरण ने शेख हसीना की अनुपस्थिति में ही उन्हें मौत की सजा सुनाई थी। उन पर 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान अपनी सरकार के जरिए क्रूर कार्रवाई करवाने और मानवता के खिलाफ अपराध करने का गंभीर आरोप है। दूसरी तरफ अवामी लीग की नेता शेख हसीना ने अपने खिलाफ आई इस मौत की सजा, आपराधिक दोषसिद्धि और सभी आरोपों को पूरी तरह राजनीति से प्रेरित बताया है।

शेख हसीना के प्रत्यर्पण पर क्या है भारत का रुख?

इस अदालती फैसले के बाद से ही ढाका लगातार नई दिल्ली से शेख हसीना को सौंपने का आग्रह कर रहा है ताकि उन पर कानूनी कार्रवाई की जा सके। इस मामले पर भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को दोहराया कि शेख हसीना के संबंध में भारत के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है।

उन्होंने साफ किया कि किसी भी नागरिक का प्रत्यर्पण पूरी तरह से एक कानूनी मुद्दा होता है और इससे कानून के दायरे में रहकर ही निपटा जाएगा। बांग्लादेशी सलाहकार ज़ाहिद का मानना है कि दोनों देशों के बीच कोई भी कागजी या प्रक्रियात्मक मुद्दा शेख हसीना की वापसी में बाधा नहीं बनेगा और नई दिल्ली इस मामले पर ढाका से बातचीत के बाद जरूरी व्यवस्था कर सकती है।

क्या बदला जा सकता है शेख हसीना का फैसला?

जब ज़ाहिद उर रहमान से पूछा गया कि क्या शेख हसीना के खिलाफ दी गई मौत की सजा को पलटा जा सकता है? तो उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT-BD) में हसीना के खिलाफ होने वाली आगामी कानूनी कार्यवाही पूरी तरह पारदर्शी रहेगी। इसकी निगरानी के लिए अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षक मौजूद रह सकेंगे और अदालत की पूरी कार्यवाही का वीडियो कवरेज भी प्रसारित किया जाएगा।

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