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नवाज़ शरीफ़ से बोले बान की मून, पाकिस्तान-भारत को सुलझाना चाहिए कश्मीर विवाद

शरीफ ने बान को कश्मीर के उन ‘मासूम और निहत्थे’ लोगों की ‘तस्वीरें’ भी दिखाईं, जो कथित तौर पर ‘बल के निर्मम इस्तेमाल और अत्याचारों से पीड़ित’ हैं।

Author संयुक्त राष्ट्र | September 22, 2016 13:21 pm
संयुक्त राष्ट्र महासभा के 71वें सत्र से इतर संरा प्रमुख से मुलाकात करते पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़। (एपी फोटो/21 सितंबर, 2016)

कश्मीर का मुद्दा सुलझाने के लिए पाकिस्तान की ओर से संयुक्त में बार-बार अनुरोध किए जाने पर संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की-मून ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से कहा कि पाकिस्तान और भारत को कश्मीर समेत अपने लंबित मुद्दे ‘वार्ता’ के जरिए सुलझाने चाहिए। बान की टिप्पणियां ऐसे समय पर आई हैं, जब शरीफ ने उन्हें कश्मीर में भारतीय बलों द्वारा किए जा रहे मानवाधिकार के कथित उल्लंघनों से जुड़ा एक डोजियर सौंपा है। बान और शरीफ की बैठक से जुड़ा विवरण देते हुए बान के प्रवक्ता ने बताया, ‘महासचिव ने पाकिस्तान और भारत द्वारा कश्मीर समेत अपने लंबित मुद्दों को वार्ता के जरिए सुलझाए जाने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि यह दोनों देशों के और पूरे क्षेत्र के हित में है।’ बान और शरीफ की बैठक बुधवार (21 सितंबर) को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 71वें सत्र से इतर हुई थी।

संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान मिशन की ओर से दिए गए बयान के अनुसार, शरीफ ने बान को एक डोजियर सौंपा, जिसमें कश्मीरियों के खिलाफ किए जाने वाले कथित अत्याचारों और मानवाधिकार उल्लंघनों के सबूत और जानकारी थी। शरीफ ने बान को कश्मीर के उन ‘मासूम और निहत्थे’ लोगों की ‘तस्वीरें’ भी दिखाईं, जो कथित तौर पर ‘बल के निर्मम इस्तेमाल और अत्याचारों से पीड़ित’ हैं। बयान में कहा गया, ‘(पाकिस्तानी) प्रधानमंत्री ने कश्मीर में न्यायेत्तर हत्याओं की स्वतंत्र जांच के साथ-साथ वहां की स्थिति की जांच संयुक्त राष्ट्र के तथ्यान्वेषी मिशन से करवाने की मांग दोहराई। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत को कश्मीर के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के पालन के लिए कहा जाना चाहिए।’

शरीफ कश्मीर के मुद्दे का अंतरराष्ट्रीयकरण करने के लिए अपने प्रयासों को तेज करते रहे हैं। इसके लिए वह संयुक्त राष्ट्र और बान को पत्र देते रहे हैं और साथ ही साथ संयुक्त राष्ट्र महासभा से इतर होने वाली अपनी द्विपक्षीय बैठकों में यह मुद्दा उठाते रहे हैं। हालांकि भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद बने हुए कश्मीर के मुद्दे को सुलझाने के लिए शरीफ की ओर से बार-बार किए जाने वाले अनुरोध को कोई महत्व मिलता नहीं दिख रहा क्योंकि संयुक्त राष्ट्र महासभा को संयुक्त राष्ट्र प्रमुख के तौर पर दिए गए अपने अंतिम भाषण में उन्होंने न तो कश्मीर का कोई संदर्भ दिया और न ही घाटी की स्थिति का।

बान ने संयुक्त राष्ट्र के एजेंडे में विभिन्न वैश्विक मुद्दों का जिक्र किया। इनमें म्यांमा और श्रीलंका की स्थिति, कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव और पश्चिम एशिया का भी जिक्र था लेकिन कश्मीर का कोई उल्लेख यहां नहीं था। हालांकि बान ने सीरियाई संकट, फलस्तीनी मुद्दे, शरणार्थियों एवं विस्थापितों की आवाजाही, दक्षिण सूडान के तनाव, हिंसक चरमपंथ और यमन, लीबिया, इराक, अफगानिस्तान, लेक चाड बेसिन तक के क्षेत्रों पर इसके प्रभाव पर भी बात की।

शरीफ ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को दिए संबोधन में कहा कि पाकिस्तान कश्मीर के मुद्दे को सुलझाने के लिए महासचिव की ओर से दिए गए मदद के प्रस्ताव का स्वागत करता है। बान के कार्यालय ने लगातार कहा है कि कश्मीर के मुद्दे को सुलझाने के लिए संयुक्त राष्ट्र प्रमुख की मदद तभी उपलब्ध है, जब भारत और पाकिस्तान दोनों इसके लिए अनुरोध करें। इस तरह बान ने यह स्पष्ट संदेश दे दिया कि कश्मीर द्विपक्षीय मुद्दा है और इसे उनके ही द्वारा सुलझाया जाना चाहिए।

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