पाकिस्तान सरकार और सेना की दमनकारी नीतियों को लेकर बलोच कार्यकर्ता ओमर करीम ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री के सरकारी निवास 10 डाउनिंग स्ट्रीट के सामने शांतिपूर्ण भूख हड़ताल शुरू कर दी है। उन्होंने पाकिस्तान पर बलोच के राजनीतिक कार्यकर्ता के खिलाफ लगातार दबाव बनाने का आरोप लगाया है और बलोचिस्तान की स्थिति पर दुनिया का ध्यान आकर्षित करने की अपील की है।
ओमर करीम ने अपने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि यह अनशन गुरुवार से बलोच की जनता के समर्थन में शुरू हुआ है और शुक्रवार 3 जुलाई को शाम 6:30 बजे तक जारी रहेगा।
क्यों हो रहा प्रदर्शन?
एएनआई के मुताबिक, ओमर करीम के यह भूख हड़ताल इसलिए शुरू किया क्योंकि हाल ही में बलोचिस्तान कार्यकर्ता महरंग बलोच और सिबगतुल्लाह शाहजी को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है और वे इसका विरोध कर रहे हैं। इसके अलावा बीबोव बलोच, बेबर्ग जेहरी और गुलजादी बलोच की गिरफ्तारी के कारण भी वे पाकिस्तानी सरकार व सेना से नाराज हैं।
उन्होंने कहा “इस अन्याय को नजरंदाज नहीं किया जा सकता है।” इस प्रदर्शन का उद्देश्य बलोच कार्यकर्ताओं के हालात और पाकिस्तान में लगातार मानवाधिकार के हनन की ओर दुनिया का ध्यान आकर्षित कराना है।
किंग चार्ल्स स्ट्रीट के बाहर भी करेंगे अनशन
उन्होंने बताया कि वह गुरुवार और शुक्रवार तक 10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर प्रदर्शन करेंगे और शुक्रवार को वह ब्रिटेन के विदेश, राष्ट्रमंडल एवं विकास कार्यालय (FCDO), किंग चार्ल्स स्ट्रीट के बाहर अपना अनशन शुरू करेंगे।
ओमर ने पत्रकारों, ब्रिटेन संसद के सदस्यों, मानवाधिकार संगठनों, दुनिया भर के बलोच समुदाय (डायस्पोरा) और आम जनता से इस प्रदर्शन में शामिल होकर बलोच समुदाय का साथ देने की अपील की।
उन्होंने कहा, “एकजुटता का हर घंटा महत्वपूर्ण है।” उन्होंने लोगों से प्रदर्शन में शामिल होने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्रवाई की मांग को और मजबूत करने का अनुरोध किया है।
लंबे समय से पाकिस्तानी सेना लोगों को कर रही गायब
बलूचिस्तान लंबे समय से पाकिस्तानी सेना द्वारा लोगों को उठाया जा रहा है। हालांकि इसमें से कुछ लोगों को बाद में रिहा भी कर दिया जाता है, जबकि अन्य लंबे समय तक हिरासत में रहते हैं या उनकी हत्या कर दी जाती है।
दावा किया गया है कि इन कथित मानवाधिकार उल्लंघनों ने बलूचिस्तान के लोगों में असुरक्षा और सरकारी संस्थाओं के प्रति अविश्वास बढ़ा दिया है। साथ ही पाकिस्तानी सेना की मनमानी, गिरफ्तारियों और जवाबदेही की कमी ने बलूचिस्तान में शांति, न्याय और जनता के विश्वास को बहाल करने के प्रयासों को कमजोर किया है।
(यह खबर कल्याणी चौधरी के द्वारा लिखी गई है, जो जनसत्ता में इंटर्न हैं।)
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पाकिस्तान में एक मानवाधिकार कार्यकर्ता को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। बलूचिस्तान यूनिटी कमेटी (बीवाईसी) की नेता महरंग बलोच को साल 2024 में एक रैली में एक अर्धसैनिक सैनिक की हत्या के आरोप में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
