अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की हत्या मध्य पूर्व में बहुत बड़ा घटनाक्रम है। खामेनेई की हत्या के बाद ईरान और इसके आसपास के इलाकों में बड़े पैमाने पर उथल-पुथल हो सकती है। ऐसा लगता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को पिछले साल जून में हुए संघर्ष के दौरान खामेनेई को निशाना बनाने से रोका था लेकिन इस बार ट्रंप ने खुद इसकी अुगवाई की।

सवाल यह है कि क्या खामेनेई की हत्या के बाद मिडिल ईस्ट पहले जैसा ही रहेगा? इसका साफ उत्तर है- नहीं। आने वाले दिनों में मिडिल ईस्ट में क्या हो सकता है?

वर्तमान हालात में कुछ सवाल हमारे सामने हैं।

क्या ईरान का मौजूदा शासन सत्ता में बना रहेगा

पहला सवाल यह है कि क्या ईरान का मौजूदा शासन सत्ता में बना रहेगा? इस बार संघर्ष की शुरुआत में ही अयातुल्लाह अली खामेनेई के साथ-साथ कई वरिष्ठ राजनेता, सैन्य और खुफिया अफसर भी मारे गए हैं लेकिन इसके बाद भी ईरान की सरकार पर कोई बहुत बड़ा खतरा नहीं आया है।

हालांकि 1989 में जब खामेनेई सुप्रीम लीडर बने थे तब और अब के हालात में काफी अंतर है। देश में धार्मिक, राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों को लेकर लोग बेहद गुस्से में हैं। ऐसे हालत में जब तक कुछ बड़ी राजनीतिक और धार्मिक रियायतें नहीं दी जाती, ईरान में धार्मिक नेतृत्व की पकड़ बने रहना मुश्किल हो जाएगा।

ईरान में स्थिरता रहेगी?

दूसरा सवाल यह है कि क्या खामेनेई के जाने के बाद भी ईरान में स्थिरता रहेगी? खामेनेई की हत्या के तुरंत बाद इजरायल ने ईरान पर अपने हमले तेज कर दिए। यह हमले पिछले साल से कहीं ज्यादा बड़े थे।

क्या गृह युद्ध छिड़ जाएगा?

तीसरा सवाल यह है कि क्या गृह युद्ध छिड़ जाएगा? ईरान ने जब अमेरिकी ठिकानों पर हमले किए तो उसने अरब में अपने दुश्मनों और दोस्तों के बीच कोई फर्क नहीं किया। उसकी मिसाइल और ड्रोन ने ओमान और कतर सहित खाड़ी के छह देशों को निशाना बनाया जबकि 1979 से ही ओमान ने कभी भी ईरान के खिलाफ रुख नहीं अपनाया। ईरान की सरकार के वरिष्ठ अफसरों ने संकेत दिया है कि ईरान की सेना ‘स्वतंत्र’ रूप से कम कर रही है और अगर ऐसा ही जारी रहा तो गृह युद्ध छिड़ सकता है। यह भी संभावना है कि नरमपंथियों और कट्टरपंथियों के बीच लंबे समय से चल रहा सत्ता संघर्ष एक खुली लड़ाई में तब्दील हो जाएगा।

क्या ईरान में सत्ता परिवर्तन होगा?

चौथा सवाल इस बात का है कि क्या ईरान में सत्ता परिवर्तन होगा? ईरान का इतिहास बताता है कि बाहर के दखल से सत्ता परिवर्तन कम ही होता है। 1979 में ईरान में हुई इस्लामिक क्रांति के लिए जनता ने लंबा संघर्ष किया था। इसी तरह बड़ी संख्या में ऐसे ईरानी जो मौलवियों के शासन को पसंद नहीं करते, उनके लिए इसे उखाड़ फेंकना भी आसान नहीं होगा इसके लिए लोगों को सड़कों पर उतरना होगा।

खामेनेई की विरासत का क्या होगा?

पांचवा सवाल यह है कि खामेनेई की विरासत का क्या होगा? खामेनेई लंबे वक्त तक ईरान के राष्ट्रपति रहे और 1989 के बाद सुप्रीम लीडर बने। उनके लंबे शासन का असर ईरान पर पड़ा। कई ईरानी उन्हें इस्लाम के दुश्मनों का शिकार मानते हैं, इसलिए कई लोग उनकी तुलना इमाम अली से कर रहे हैं।

क्या ईरान में सांप्रदायिक तनाव बढ़ेगा?

छठा सवाल यह है कि क्या ईरान में सांप्रदायिक तनाव बढ़ेगा? खामेनेई की हत्या के बाद ईरान ने छह खाड़ी देशों में शामिल जॉर्डन, साइप्रस और उत्तरी इराक को भी निशाना बनाया। अब देश जॉर्डन साइप्रस और उत्तरी इराक में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया लेकिन इसका असर आबादी वाले इलाकों पर भी हुआ। इससे अरबी-फारसी बंटवारा और गहरा हो गया है। ईरान को इसे हल करना आसान नहीं होगा।

वलायत-ए-फकीह का पद रहेगा?

सातवां सवाल यह है कि क्या खामेनेई की मौत के बाद वलायत-ए-फकीह का पद रहेगा? जब अयातुल्लाह खोमैनी ने खुद को ‘गार्डियन ऑफ द ज्यूरिस्ट’ घोषित किया था, तब से इस पद को लेकर शिया इस्लाम के धर्मगुरुओं में मतभेद रहे हैं। इसलिए खामेनेई की मौत के बाद इस पद का क्या होगा, इसे लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

अंत में क्या होगा?

आठवां सवाल है कि अंत में क्या होगा? इसका जवाब है कि युद्ध कभी भी आसानी से खत्म नहीं होते। अमेरिका और इजरायल अपने सैन्य अभियानों को लगातार तेज कर रहे हैं और ऐसा नहीं लगता कि इस युद्ध का तत्काल कोई अंत होगा। ईरान के जवाबी हमलों ने सदियों पुराने अरब-फारसी और सुन्नी-शिया विवाद को फिर भड़का दिया है।

ईरान, इजरायल और अमेरिका तीनों ही सैन्य कार्रवाई को तेज कर रहे हैं। इसलिए युद्ध के जल्द रुकने के कोई आसार नहीं दिखते। ट्रंप और नेतन्याहू की जोड़ी ने ऐसे खतरनाक हालात पैदा कर दिए हैं जिसमें इस हिंसा का अंत नहीं दिखाई देता।

(लेखक पीआर कुमारस्वामी जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली में पढ़ाते हैं।)