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ऑस्‍ट्रेलियन नेवी कैडेट्स का खुलासा: ट्रेनिंग के दौरान एक दूसरे का रेप करने के लिए करते थे मजबूर

ट्रेनिंग की शुरुआत में प्राइवेट पार्ट्स पर शूू पॉलिश लगाने को कहा जाता है। इसे वे 'ब्‍लैकबॉलिंग' कहते थे।

Author सिडनी | June 24, 2016 3:00 PM
चित्र का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है।

ऑस्‍ट्रेलियाई नेवी सके कैडेट्स ने कुछ सनसनीखेज दावे किए हैं। उन्‍होंने एक कमीशन के सामने दावा किया है कि उन्‍हें ट्रेनिंग के दौरान यौन दुर्व्यवहार से गुजरना पड़ा। कैडेट्स के मुताबिक, उन्‍हें एक दूसरे का रेप करने के लिए मजबूर किया गया। ट्रेनिंग की शुरुआत में प्राइवेट पार्ट्स पर शूू पॉलिश लगाने को कहा जाता है। इसे वे ‘ब्‍लैकबॉलिंग’ कहते थे। उनके सिरों को टॉयलेट्स में डालकर फ्लश चलाया जाता था। वे इसे ‘रॉयल फ्लश’ कहते थे। कैडेट्स का दावा है कि ऐसा बर्ताव करने वाले लोग इन हरकतों को ‘मर्द बनने का तरीका’ करार देते थे।

एक पूर्व नेवी मेंबर ने बताया कि एक रात उसे बिस्‍तर से उठा लाया गया और पूरी ट्रेनिंग के दौरान उसके साथ कई बार यौन उत्‍पीड़न हुआ। कैडेट ने एक मीडिया हाउस से बातचीत में कहा, ‘कई मौकों पर वे मुझे बीच रात को बिस्‍तर से खींच ले गए और खेल के मैदान में ले गए।’ एक अन्‍य शख्‍स ने बताया, ‘उसे एक दूसरे रंगरूट का प्राइवेट पार्ट मुंह में लेने को कहा गया। इसके अलावा, उसे दूसरे जूनियर रिक्रूट के प्राइवेट पार्ट में मुंह लगाने के लिए मजबूर किया गया। कुछ अन्‍य मौकों पर मुझे जूनियर रिक्रूट्स के साथ अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने के लिए गया। या फिर कुछ रंगरूटों ने मेरा रेप किया, क्‍योंकि पुराने रंगरूट्स या बेस स्‍टाफ ने ऐसा करने का आदेश दिया था।’

‘किशोरी को आत्‍महत्‍या के लिए किया गया मजबूर’
ऑस्‍ट्रेलियाई रॉयल कमीशन ने उस किशोरी की मौत के मामले पर भी सुनवाई की, जिसे कथित तौर पर अपने इंस्‍ट्रक्‍टर के साथ शारीरिक संबंध रखने की वजह से धमकी दी गई थी। 15 साल की इस लड़की का नाम इलेनोर टिब्‍ब्‍ल था। उसके कथित तौर पर अपने 30 वर्षीय इंस्‍ट्रक्‍टर के साथ सेक्‍शुअल रिलेशनशिप थे। आरोप है कि इस वजह से उसे धमकाया गया और बाद में उसने आत्‍महत्‍या कर ली।
बता दें कि रॉयल कमीशन की स्‍थापना 2012 में हुई थी, जब करीब 24 हजार शिकायतें मिलीं। उसके पास से कमीशन ने 111 लोगों की शिकायतें सुनी हैं। उनका दावा है कि उन्‍हें ऑस्‍ट्रेलियन डिफेंस फोर्स (एडीएफ) में शारीरिक और मानसिक शोषण से गुजरना पड़ा। कमीशन ने डिफेंस के अलावा धार्मिक संस्‍थानों, स्‍कूलों, चिल्‍ड्रेन होम, स्‍पोर्ट्स अकादमी और यहां तक चैरिटी संस्‍थानों में भी इस तरह की भयावह वारदात से जुड़े अनुभव सुने। एडीएफ में शोषण से जुड़ी शिकायतों पर मंगलवार से चर्चा हुई है। चूंकि अधिकतर कैडेट्स किशोर हैं, इसलिए इनमें से अधिकतर मामले बाल शोषण के हैं।

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