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अमेरिका के नए रक्षा मंत्री बनें एश्‍टन कार्टर

एश्टन बी.कार्टर अमेरिका के नए रक्षा मंत्री बन गए हैं। राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कार्टर को रक्षा मंत्री नामित किया था, जिसे सीनेट ने मंजूरी दे दी है। कार्टर ने भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी के सतत विकास को प्राथमिकता देने का संकल्प लिया है। पूर्व उप रक्षा मंत्री कार्टर अब चक हेगल का स्थान लेंगे। कार्टर […]

Author Published on: February 14, 2015 3:03 PM

एश्टन बी.कार्टर अमेरिका के नए रक्षा मंत्री बन गए हैं। राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कार्टर को रक्षा मंत्री नामित किया था, जिसे सीनेट ने मंजूरी दे दी है। कार्टर ने भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी के सतत विकास को प्राथमिकता देने का संकल्प लिया है।

पूर्व उप रक्षा मंत्री कार्टर अब चक हेगल का स्थान लेंगे। कार्टर को गुरुवार को सीनेट में पांच के मुकाबले 93 सीनेटरों का समर्थन मिला। हेगल ने पिछले नवंबर में दबाव में आकर इस्तीफा दे दिया था। ओबामा ने सीनेट में हुए मतदान के बाद कहा कि कार्टर अपने दशकों के अनुभव के साथ हमारी सेना को मजबूत करेंगे, जैसा कि हमने आतंकवादियों के नेटवर्क के खिलाफ लड़ाई अपने अभियान, हमारे गठबंध को आधुनिक बनाने के काम, लंबे समय तक के खतरे से लड़ने के लिए हमारे सैनिकों की नई क्षमता में निवेश करना जारी रखा है।

ओबामा ने कहा कि विश्व के इतिहास में हमारी सेना सबसे मजबूत रही है और पेंटागन में रक्षा मंत्री कार्टर और हमारे जवान विश्वभर में बहादुरी से अपनी सेवा दे रहे हैं, हम इसे आगे जारी रखने वाले हैं। कार्टर ने पिछले सप्ताह भारत के साथ रक्षा प्रौद्योगिकी एवं व्यापार पहल (डीटीटीआई) की शुरुआत की थी और अतिरिक्त सह-उत्पादन और सह-विकास की गतिविधियों के साथ डीटीटीआई को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया था।

उन्होंने सीनेट आर्म्ड सर्विसिस कमेटी से कहा कि हम अपने हितों और चिंताओं की तरफ पहले की अपेक्षा ज्यादा झुकाव देख रहे हैं और विशेषकर यह हमारे एशिया और भारत के एक्ट एशिया नीति में दोबारा संतुलन बिठाने के प्रति दिख रहा है। कार्टर ने कहा कि भारत-अमेरिका संबंध को मजबूती देना उप रक्षा मंत्री होने के नाते मेरी सर्वोच्च प्राथमिकता रही है, अगर मेरे रक्षा मंत्री बनने की पुष्टि होती है, तो इस संबंध में मजबूती देना मेरी प्राथमिकता रहेगी।

रक्षा भारत-अमेरिका संबंध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिसमें सैन्य आदान-प्रदान और अभ्यास, बेहतर रक्षा व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर विचार-विमर्श करना शामिल है।

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