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आसियान सम्मेलन: मोदी और लाओस के प्रधानमंत्री में द्विपक्षीय वार्ता, दक्षिण चीन सागर रहा अहम मुद्दा

दक्षिण चीन सागर के क्षेत्र पर स्वामित्व को लेकर बीजिंग का फिलीपीन, वियतनाम, ताइवान, मलेशिया और ब्रुनेई के साथ विवाद चल रहा है।
Author वियंतियन | September 8, 2016 14:36 pm
वियंतियन के लाओस में आसियान देशों के ग्रुप फोटो के लिए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मंच पर ले जाते लाओस के प्रधानमंत्री थोंगलोउन सिसोउलिथ। (AP Photo/Bullit Marquez/8 Sep 2016)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार (8 सितंबर) लाओस के प्रधानमंत्री थोंगलोउन सिसोउलिथ के साथ द्विपक्षीय वार्ता में दक्षिण चीन सागर के मुद्दे समेत विभिन्न क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा की। विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने बताया कि दोनों पक्षों ने दक्षिण चीन सागर पर एक ही नजरिया सामने रखा। आसियान-भारत सम्मेलन को संबोधित करते हुए मोदी ने समुद्री मार्गों को ‘वैश्विक व्यापार की जीवन रेखाएं’ बताते हुए कहा कि समुद्रों की सुरक्षा एक साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र के समुद्री कानून समझौते (यूएनसीएलओएस) के अनुरूप नौवहन की स्वतंत्रता का समर्थन करता है। भारत की ओर से ये टिप्पणियां चीन द्वारा विवादित दक्षिण चीन सागर में अपनी दबंगई दिखाए जाने और ‘उभरती क्षेत्रीय चुनौतियों’ के बीच की गई हैं। दक्षिण चीन सागर के क्षेत्र पर स्वामित्व को लेकर बीजिंग का फिलीपीन, वियतनाम, ताइवान, मलेशिया और ब्रुनेई के साथ विवाद चल रहा है। दक्षिण चीन सागर एक व्यस्त जलमार्ग है, और भारत का 50 प्रतिशत व्यापार इसी मार्ग से होता है।

इससे पहले चीन ने भारत के ओएनजीसी (ऑयल एंड नेचुरल गैस कमीशन) द्वारा वियतनाम के निमंत्रण पर दक्षिण चीन सागर में खनन शुरू करने पर भी आपत्ति जताई थी। माना जाता है कि दक्षिण चीन सागर की गहराईयों में तेल एवं गैस का बड़ा संग्रह मौजूद है। भारत और अमेरिका अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में आवागमन की स्वतंत्रता का आह्वान करते रहे हैं। उनकी इस मांग से बीजिंग असहज हो जाता है। हालांकि हाल ही में दक्षिण चीन सागर पर चीन के दावे को एक अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण ने खारिज करते हुए फिलीपीन के पक्ष में फैसला सुनाया था।

आसियान-भारत एवं पूर्व एशिया सम्मेलन में शिरकत करने आए मोदी ने इन बैठकों से इतर लाओस के प्रधानमंत्री के साथ बैठकें कीं। सिसोउलिथ ने कहा कि उनका देश संशोधित एवं विस्तारित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन करता है। दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों की स्थापना की 60वीं वर्षगांठ को उचित तरीके से मनाने पर भी सहमति बनी। मोदी ने कहा कि वह भारत और लाओस द्वारा वर्षगांठ मनाए जाने के अवसर पर वियंतियन में मौजूद होने पर खासतौर से खुश हैं। उन्होंने कहा कि भारत और लाओस के बीच संबंध बेहद प्राचीन हैं और 2000 साल से भी ज्यादा पुराने हैं।

लातोस के प्रधानमंत्री ने भारत की ओर से उनके देश को दिए जाने वाले सतत सहयोग के लिए भारत की सराहना की। यह सहयोग खासतौर पर मानव संसाधन विकास, कृषि, सिंचाई और बिजली के क्षेत्र में दिया जाता है। अपनी दो दिवसीय यात्रा के दौरान मोदी इन सम्मेलनों से इतर कई द्विपक्षीय वार्ताएं करेंगे। इनमें अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा, दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति पार्क गुन-हे और म्यांमा की स्टेट काउंसलर आंग सान सू ची के साथ मुलाकात शामिल है। बुधवार (7 सितंबर) को जापान के प्रधानमंत्री शिंझो आबे के साथ वार्ता के दौरान, भारत और जापान ने आतंकवाद से मुकाबले, असैन्य परमाणु सहयोग, व्यापार एवं निवेश के क्षेत्र में संबंधों को मजबूत करने का संकल्प लिया।


“Terrorism Is Common Security Threat To Our… by Jansatta

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