आरिफ अल्वी: पाक राष्ट्रपति ने जम्हूरियत की बहाली के लिए लड़ी थी जंग, बांह में आज भी मौजूद है पुलिस की गोली

पीटीआई के एक कार्यकर्ता के हवाले से डॉन ने कुछ दिनों पहले बड़ी दिलचस्प जानकारी लिखी थी कि एक बार लाहौर में एक प्रदर्शन के दौरान अल्वी गोली लगने से घायल हो गए थे और वह गोली आज भी उनकी उनकी दाहिनी भुजा में मौजूद हैं, जिसे पाकिस्तान में लोकतंत्र के संघर्ष का प्रतीक मानकर वह गौरवान्वित होते हैं।

पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक अल्वी ने एक बार प्रदर्शन के दौरान बांह में गोली खाई थी, जो आज भी मौजूद है। (फोटो सोर्स- एपी)

इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के उम्मीदवार आरिफ अल्वी ने मंगलवार (4 सितंबर) को 13वें राष्ट्रपति पद का चुनाव जीता। पाकिस्तानी मीडिया के अनुसार राजनीति में अल्वी का करीब पांच दशक का अनुभव है। पाकिस्तानी अखबार डॉन की खबर के मुताबिक अल्वी ने छात्र जीवन से ही राजनीति की शुरुआत कर दी थी। वह लाहौर के दंत चिकित्सा के de’Montmorency कॉलेज के छात्र संघ के अध्यक्ष चुने गए थे। 1969 में जनरल अयूब खान के सैन्य शासन के दौरान अल्वी ने छात्र आंदोलन में भाग लिया था। उनकी पार्टी के लोग बताते हैं कि अल्वी ने देश में लोकतंत्र की बहाली के लिए लड़ाई लड़ी थी। पीटीआई के एक कार्यकर्ता के हवाले से डॉन ने कुछ दिनों पहले बड़ी दिलचस्प जानकारी लिखी थी कि एक बार लाहौर में एक प्रदर्शन के दौरान अल्वी गोली लगने से घायल हो गए थे और वह गोली आज भी उनकी दाहिनी भुजा में मौजूद हैं, जिसे पाकिस्तान में लोकतंत्र के संघर्ष का प्रतीक मानकर वह गौरवान्वित होते हैं। अल्वी पहली दफा 1977 में चुनावी मैदान में उतरे थे। वह करांची की सिंध असेंबली सीट के लिए पाकिस्तान नेशनल अलायंस का टिकट पाने में सफल रहे थे। हालांकि, वह चुनाव नहीं लड़ पाए थे क्योंकि विपक्षी दलों ने चुनाव का बहिष्कार कर दिया था।

1949 में जन्मे और पेशे से दंत चिकित्सक अल्वी उन 100 उम्मीदवारों में से एक रहे जिन्होंने 1997 के चुनाव में पीटीआई की तरफ से उम्मीदवारी की थी। उम्मीदवारों में इमरान भी शामिल थे लेकिन उनमें से ज्यादातर उम्मीदवार पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज से चुनाव हार गए थे। पीटीआई की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक अल्वी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं और 2006 से लेकर 2013 तक पार्टी के महासचिव के पद पर रहे।

राष्ट्रपति पद का चुनाव जीतने के बाद वैश्विक मीडिया की सुर्खियों आए अल्वी की जीवनी से कई दिलचस्प राज भी खुलने लगे हैं। उनमें से एक राज यह है कि अल्वी के पिता डॉक्टर हबीब उर रहमान भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के निजी दंत चिकित्सक थे। पीटीआई की वेबसाइट के अनुसार अल्वी के परिवार के पास नेहरू के लिए पत्र भी सुरक्षित हैं। अल्वी के पिता बंटवारे से पहसे भारत में बतौर दंत चिकित्सक काम करते थे। बंटवारे के बाद अल्वी परिवार कराची चला गया था।

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