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सत्ता वापसी: दुनिया भर में चाहत मजबूत नेता की

मजबूत नेता की चाहत केवल भारत में नजर आ रही हो, ऐसा नहीं है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन, तुर्की में राष्ट्रपति रेसेप तैय्यप आर्दोगान, हंगरी के विक्टर ओर्बान, ब्राजील के जैर बोलसोनारो और फिलिपींस के रोड्रिगो दुर्तेते की सत्ता में मजबूत पकड़ को लेकर जनसमर्थन बढ़ा है।

Author May 28, 2019 3:36 AM
बेंजामिन नेतन्याहू

भारत में लोकसभा चुनावों की लगभग दो महीने की प्रक्रिया अब खत्म हो चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में भाजपा नीत राजग गठबंधन दोबारा सत्ता में आ गई है। दिलचस्प तथ्य यह है कि दुनिया के एक तिहाई हिस्से में भारत के लोकसभा चुनावों के साथ ही चुनाव हो रहे थे। इस साल भारत समेत कई देशों में चुनाव मजबूत नेता की छवि के आधार पर लड़े गए। भारत के साथ इजराइल, ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया का उदाहरण सामने है, जहां बीते दो महीने में सरकारें बनी हैं।

इस साल 23 फरवरी को नाइजीरिया, तीन मार्च को एस्टोनिया, 10 मार्च को उत्तर कोरिया, 24 मार्चा को थाइलैंड में संसदीय चुनाव, 31 मार्च से 21 अप्रैल के बीच यूक्रेन (राष्ट्रपति चुनाव), छह अप्रैल को मालदीव में संसदीय चुनाव, नौ अप्रैल को इजरायल, 17 अप्रैल को इंडोनेशिया, 28 अप्रैल को स्पेन, आठ मई को दक्षिण अफ्रीका, 13 मई को फिलीपींस, 18 मई को ऑस्ट्रेलिया और 26 मई को बेल्जियम में आम चुनाव हुए। इनमें अधिकांश देशों में राष्ट्रवादी विचार वाले अधिकांश नेताओं ने सत्ता में वापसी की है। भारत में नरेंद्र मोदी को बेहद मजबूत नेता के तौर पर लोगों ने पसंद किया है। अंतरराष्ट्रीय सर्वे एजंसियों ने दुनिया भर में इस बढ़ती सोच पर मुहर लगाई है। अंतरराष्ट्रीय एजंसी प्यू की 2017 की एक रिपोर्ट में 55 फीसद लोगों ने कहा था कि ऐसी शासन व्यवस्था होनी चाहिए जिसमें कोई भी मजबूत नेता, संसद और अदालत के दखल के बिना फैसले ले सके।

मजबूत नेता की चाहत केवल भारत में नजर आ रही हो, ऐसा नहीं है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन, तुर्की में राष्ट्रपति रेसेप तैय्यप आर्दोगान, हंगरी के विक्टर ओर्बान, ब्राजील के जैर बोलसोनारो और फिलिपींस के रोड्रिगो दुर्तेते की सत्ता में मजबूत पकड़ को लेकर जनसमर्थन बढ़ा है। नाइजीरिया में इस साल हुए चुनाव में कम संख्या में मतदान के लिए निकले। कम मतदान की वजह से मोहम्मदो बुहारी आसानी से सत्ता में वापसी करने में सफल रहे। क्राइमिया से रूसी प्रभाव के मुक्त होने के बाद यूक्रेन में हुए चुनाव पर पूरी दुनिया की नजर थी। इस चुनाव में हास्य अभिनेता व्लादिमिर जेलंस्की राष्ट्रपति पद के लिए चुने गए। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने वहां सत्ता में वापसी की। वह गठबंधन सरकार बनाने वाले हैं। उनकी लिकुड पार्टी ने समान सोच वाले छोटे दक्षिणपंथी समूहों, राष्ट्रवादी पार्टी और धुर परंपरावादी पार्टियों का समर्थन जुटाया है।

नेतन्याहू पर गबन, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। जांच चल रही है, उन्हें आरोप साबित होने तक सत्ता पर कायम रहने के लिए अनुमति दी गई है। उनकी पार्टी अब एक ऐसा प्रस्ताव पारित कराने की तैयारी कर रही है, जिससे वहां की संसद के सदस्य ही ढाल बनकर उनकी रक्षा करेंगे। अमेरिका में रिपब्लिकन पार्टी के सत्ता में आने के साथ दुनिया की राजनीति का झुकाव नए सिरे से राष्ट्रवाद और दक्षिणपंथ की ओर दिख रहा है। फ्रांस और जर्मनी की राजनीति भी दक्षिणपंथ की ओर बढ़ रही है। ऐसे में भारत का दक्षिणपंथी राजनीति की ओर झुकाव वैश्विक ट्रेंड का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें राष्ट्रवाद नए सिरे से परिभाषित हो रहा है और सांस्कृतिक पहचान को भी नए सिरे से तय किया जा रहा है।

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