अमेरिका और इजरायल के ईरान से जारी युद्ध के बीच रूस के लिए एक और गुड न्यूज आई है। कच्चे तेल के बाद अब रूस के गेहूं की निर्यात कीमत अगस्त के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है।
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स से बातचीत में विश्लेषकों ने इसकी वजह वैश्विक कीमतों में हो रही बढ़ोतरी और मौसम में सुधार के साथ बंदरगाहों से होने वाली शिपमेंट में आई तेजी को बताया।
विश्लेषकों के अनुसार, 12.5 प्रतिशत प्रोटीन वाले रूसी गेहूं की फ्री-ऑन-बोर्ड (FOB) कीमत अप्रैल डिलीवरी के लिए पिछले हफ्ते के अंत में 238 डॉलर प्रति टन रही। यह कीमत एक सप्ताह पहले के मुकाबले 2 डॉलर ज्यादा है। यह जानकारी IKAR कंसल्टेंसी के प्रमुख दिमित्री रील्को ने दी।
प्रतिस्पर्धी देशों के निर्यात भाव बढ़ने से कीमतों को समर्थन मिला
विश्लेषण संस्था सोवेकॉन के मुताबिक, 12.5% प्रोटीन वाले रूसी गेहूं की कीमत 238 से 240 डॉलर प्रति टन FOB आंकी गई, जबकि इससे पहले हफ्ते यह 234 से 236 डॉलर प्रति टन थी।
सोवेकॉन के प्रमुख आंद्रेई सिजोव ने कहा कि रूसी गेहूं की FOB कीमत अगस्त 2025 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है। अगस्त 2025 में यह 240 डॉलर प्रति टन थी।
उन्होंने बताया कि वैश्विक वायदा बाजार में मजबूती और प्रमुख प्रतिस्पर्धी देशों के निर्यात भाव बढ़ने से कीमतों को समर्थन मिला है। उन्होंने कहा कि साथ ही गेहूं की मांग मजबूत बनी हुई है और बंदरगाहों से निर्यात की रफ्तार भी तेज हो रही है।
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वैश्विक अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा समुद्री व्यापार पर निर्भर करता है और ये सात समुद्री मार्ग इस व्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं। इनमें से किसी भी मार्ग में रुकावट आने से तेल की कीमतों में उछाल, सप्लाई चेन में बाधा और वैश्विक व्यापार में भारी नुकसान हो सकता है। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें।
