Angad Singh Dhillon: पंजाब के लुधियाना जिले से गहरी जड़ें रखने वाले 35 वर्षीय भारतीय मूल के सिख युवा अंगद सिंह ढिल्लों को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में कनाडा का नया राजदूत नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति कनाडाई सरकार में विदेश मंत्री अनीता आनंद द्वारा की गई है, जिसे ग्लोबल अफेयर्स कनाडा की आधिकारिक घोषणा के बाद वैश्विक स्तर पर एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
इस महत्वपूर्ण राजनीतिक और कूटनीतिक पद पर पहुंचने के बाद अंगद को ‘असाधारण और पूर्ण अधिकार प्राप्त राजदूत’ घोषित किया गया है। कूटनीति की दुनिया में यह किसी एक संप्रभु राष्ट्र द्वारा दूसरे देश में अपने मिशन का नेतृत्व करने के लिए भेजा जाने वाला सर्वोच्च और सबसे प्रतिष्ठित राजनायिक पद होता है, जिससे भारत और विशेषकर पंजाब के प्रवासियों में खुशी की लहर दौड़ गई है।
याद किया पैतृक जुड़ाव
द इंडियन एक्सप्रेस के साथ एक टेलीफोनिक बातचीत में अंगद ने अपने पैतृक जुड़ाव को याद करते हुए साझा किया कि वह भले ही आज कनाडा में सर्वोच्च कूटनीतिक पदों पर क्यों न पहुंच जाएं, लेकिन उनका दिल हमेशा उनके अपने पिंड यानी गांव में ही बसता है। उनके परिवार की जड़ें पंजाब के लुधियाना जिले के ऐतिहासिक घुंगराना गांव से जुड़ी हैं, जबकि उनके माता-पिता चंडीगढ़ में निवास करते हैं, जहां अंगद का जन्म और शुरुआती जीवन बीता था।
पंजाब कभी नहीं निकल सकता
साल 2010 में उच्च शिक्षा के लिए कनाडा जाने वाले अंगद ने अपनी जड़ों के प्रति प्रेम जताते हुए कहा कि उनके भीतर से पंजाब कभी नहीं निकल सकता। उन्होंने हंसते हुए बताया कि वह आज भी हफ्ते में कम से कम पांच दिन भारतीय भोजन का ही आनंद लेते हैं, हालांकि एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में उनकी पूर्ण निष्ठा उस देश के प्रति है जहां वे अब रहते हैं और अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
प्रधानमंत्री कार्यालय के भरोसेमंद ढिल्लों
कनाडा के संघीय विभाग ग्लोबल अफेयर्स के अनुसार, अंगद सिंह ढिल्लों प्रधानमंत्री कार्यालय में एक बेहद भरोसेमंद और करीबी रणनीतिकार के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। उन्होंने भारत और चीन जैसे प्रमुख द्विपक्षीय साझेदारों के साथ कनाडा के कूटनीतिक संबंधों को सुधारने, उच्च स्तरीय संवाद बहाल करने और आर्थिक कूटनीति को गति देने में प्रधानमंत्री को महत्वपूर्ण सलाह दी थी।
मोहाली से हुई थी प्राथमिक शिक्षा
उनकी शैक्षणिक यात्रा की बात करें तो अंगद ने अपनी शुरुआती स्कूली शिक्षा मोहाली के प्रतिष्ठित यादवेंद्र पब्लिक स्कूल से पूरी की। इसके बाद उन्होंने पुणे के महिंद्रा यूनाइटेड वर्ल्ड कॉलेज से अपनी बारहवीं की पढ़ाई संपन्न की और वर्ष 2010 में मात्र 19 वर्ष की उम्र में न्यू Brunswick की माउंट एलिसन यूनिवर्सिटी से इंटरनेशनल रिलेशंस में स्नातक की डिग्री लेने के लिए कनाडा की ओर रुख किया।
2015 में रखा था कनाडाई राजनीति में कदम
कनाडा की मुख्यधारा की राजनीति में अंगद ने साल 2015 में कदम रखा था। चुनावी कैंपेन के दौरान पील क्षेत्र में एक फील्ड ऑर्गेनाइजर के तौर पर शुरुआत करने के बाद वे ओटावा पहुंचे और लिबरल रिसर्च ब्यूरो से जुड़कर नीतिगत मामलों पर काम किया। इसके अलावा, उन्होंने लघु उद्योग और परिवहन विभागों में दो संघीय कैबिनेट मंत्रियों के चीफ ऑफ स्टाफ के रूप में भी कनिष्ठ और वरिष्ठ भूमिकाएं निभाई हैं।
कई बड़े वैश्विक मंचों पर किया है कनाडा का प्रतिनिधित्व
अपनी कूटनीतिक जिम्मेदारियों के दौरान उन्होंने जी-7, जी-20, संयुक्त राष्ट्र महासभा, एपेक, इंटरनेशनल ट्रांसपोर्ट फोरम और कॉन्फ्रेंस ऑफ द पार्टीज जैसे दुनिया के सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कनाडा का प्रतिनिधित्व किया है। इसके साथ ही, जब भी वे भारत यात्रा पर आते हैं, तो अपने पैतृक गांव घुंगराना जाना और अपने पुश्तैनी घर व खेतों की मिट्टी से जुड़ना उनकी प्राथमिकता में हमेशा शामिल रहता है।
दादा थे 1937 में SGPC के सदस्य
अंगद का यह राजनीतिक और सामाजिक कद उनके समृद्ध पारिवारिक इतिहास की मजबूत नींव पर टिका है। उनके परदादा गुरनाम सिंह साल 1937 में एसजीपीसी के सदस्य थे और महान सुधारक मास्टर तारा सिंह के करीबी सहयोगी माने जाते थे, जबकि उनके दादा जगजीत सिंह ढिल्लों अकाली दल के वरिष्ठ नेता और एक प्रगतिशील कृषि विशेषज्ञ थे जिन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह के कार्यकाल में उच्चाधिकार प्राप्त कृषि समिति में भी योगदान दिया था।
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