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अमेरिका में H1-B वीजा से जुड़ा बिल पास हुआ तो इन 10 कंपनियों पर होगा सबसे ज्यादा असर

अमेरिकी कांग्रेस में H1-B से जुड़ा बिल नियमों में बदलाव करके पेश कर दिया गया है।

USA Kansas killing, new york times Trump, new york times vs Donald trumpअमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। (Source: AP Photo)

अमेरिकी कांग्रेस में H1-B से जुड़ा बिल नियमों में बदलाव करके पेश कर दिया गया है। यह वीजा उन विदेशी प्रॉफेशनल्स के लिए जारी किया जाता है जिन्हें किसी ‘खास’ काम में महारत हासिल होती है। हर साल अमेरिका द्वारा ऐसे लगभग 65000 वीजा जारी किए जाते हैं और इसी वीजा के आधार पर हजारों भारतीय अमेरिका में गूगल या माइक्रोसॉफ्ट जैसी आईटी कंपनियों में काम करते हैं। यानी की इस बिल से सीधे तौर पर अमेरिका में नौकरी पाने की कोशिश करने वाले भारतीय प्रभावित होंगे। इस बिल को मंजूरी मिलने पर अमेरिकी कंपनियों के लिए विदेशी लोगों के लिए नियुक्ति करना मुश्किल हो जाएगा। वहीं बिल में H-1B वीजा हॉल्डर्स की मिनिमन सैलरी को दोगुना करने का प्रस्ताव भी रखा गया है। वहीं अमेरिकियों को नौकरियों में प्राथमिकता देने का प्रस्ताव भी रखा गया है। वहीं इस बिल से सीधे तौर पर भारतीय आईटी कंपनियों पर भी फर्क पड़ने वाला है क्योंकि इनका आधे से ज्यादा रेवेन्यू अमेरिका से ही आता है।

सबसे ज्यादा असर इन 10 कंपनियों पर होगा

इंफोसिस- बेंगलुरु बेस्ड ये आईटी कंपनी देश ही नहीं बल्कि दुनिया की चुनिंदा मशहूर आईटी कंपनियों में से एक है। कंपनी के दुनियाभर में 30 से ज्यादा ऑफिस हैं और यह एक बहुराष्ट्रीय कंपनी है।

टीसीएस- टाटा ग्रुप की टीसीएस भी बहुराष्ट्रीय कंपनी है। एक अनुमान के मुताबिक टीसीएस ग्रुप का लगभग 70 फीसद रेवेन्यु जेनरेट करती है और फॉर्ब्स द्वारा यह दुनिया की कुछ सबसे इनोवेटिव कंपनियों में शुमार की गई थी।

विप्रो- देश की चुनिंदा आईटी कंपनियों में विप्रो का नाम भी शामिल है। वहीं इस कंपनी का भी लगभग 57 देशों में नेटवर्क है और कई खाड़ी देशों की फर्मों के साथ इसका टाइअप है।

एल एंड टी- निर्माण, पावर, इंजिनीयरिंग, डिफेंस समेत कई सेक्टर्स में काम करने वाली एल एंड टी का काफी दबदबा आईटी क्षेत्र में भी है।

कैपजेमिनी- इस बहुराष्ट्रीय फ्रेंच आईटी कंपनी का लगभग 40 देशों में नेटवर्क है और इससे लगभग 1 लाख 80 हजार से ज्यादा कर्मचारी जुड़े हुए हैं।

एक्सेंचर- आयर्लैंड की इस मल्टीनेशनल कंपनी का दुनियाभर के आईटी क्षेत्र में बड़ा प्रभाव है। एक्सेंचर को आईटी सोल्यूशन्स के लिए जाना जाता है और फॉरच्यून की ग्लोबल 500 कंपनियों में जगह मिली है।

कॉग्नीजैंट टेक्नॉलोजी सोल्यूशन- इस अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनी से लगभग 2 लाख से ज्यादा लोग जुड़े हैं। वहीं इसे फॉर्ब्स, फॉरच्यून, फाइनैन्शियल टाइम्स, न्यूजवीक जैसी कई प्रतिष्ठित पत्रिकाओं द्वारा अच्छी रैंकिंग मिली है।

आईबीएम- आईबीएम के नाम को किसी तरह के परिचय की जरूरत नहीं। यह दुनिया की सबसे पुरानी और नामी आईटी फर्म्स में से एक है और इसने दुनिया में अपना एक अलग ही मकाम हासिल किया है। इस अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनी के लगभग 150 से ज्यादा देशों में नेटवर्क है।

एप्पल- एप्पल अपने आप में ही एक जबरदस्त ब्रैंड है और इसे भी किसी परिचय की जरूरत नहीं। कंपनी के दुनियाभर में कई आउटलेट्स हैं।

डेलोटी- दुनिया की कुछ और चुनिंदा आईटी फर्म में डेलोटी का नाम भी शामिल है और नई वीजा पॉलिसी आते ही इसके काम पर भी काफी असर पड़ेगा।

 

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