एक अमेरिकी शख्स की किस्मत उस वक्त खुल गयी जब उसे एक्सपायरी डेट से कुछ दिन पहले ही पुरानी पैंट की जेब में करोड़ों रुपये के इनाम वाला लॉटरी टिकट मिला। न्यू जर्सी के इस व्यक्ति को समय सीमा समाप्त होने से कुछ ही दिन पहले एक पुरानी पैंट में पड़ा हुआ 59 लाख डॉलर (लगभग 57.11 करोड़ रुपये) का टिकट मिला।
पीपल मैगज़ीन के अनुसार , उस अमेरिकी व्यक्ति ने मई 2025 में एक पेट्रोल पंप से पिक 6 का विजयी टिकट खरीदा था। हालांकि, वह टिकट कहीं रख कर भूल गया और महीनों तक उसे पता ही नहीं चला कि उसके पास जैकपॉट जीतने वाले नंबर हैं। पिछले महीने, लॉटरी अधिकारियों ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की कि 57 करोड़ रुपये का यह इनाम अभी तक किसी ने नहीं लिया है और उसकी वैधता अवधि समाप्त होने वाली है। इस खबर ने तुरंत उस व्यक्ति का ध्यान खींचा क्योंकि टिकट उसी पेट्रोल पंप पर बेचा गया था जहां वह नियमित रूप से रुकता था।
उत्सुकता के साथ वह व्यक्ति उस पेट्रोल पंप गया और वहां के कर्मचारियों से बात की। कर्मचारियों ने उसे बताया कि पिक-6 केवल कुछ ही नियमित ग्राहक खेलते हैं और उसे सलाह दी कि वह अपने सामान की अच्छी तरह से तलाशी ले।
पुरानी पैंट की जेब से निकला मुड़ा हुआ लॉटरी टिकट
इसके बाद उसने अपने घर की छानबीन शुरू की, दराजों, अलमारियों और स्टोररूम की जांच की और अंत में अपनी अलमारी में रखे पुराने कपड़ों को खंगाला। तभी उसे एक पुरानी पैंट की जेब से एक मुड़ा हुआ टिकट मिला। जैसे ही उसने टिकटों पर लिखे अंकों की जांच की, उसे एहसास हुआ कि उसके पास 59 लाख डॉलर का विजेता टिकट है। वह तुरंत लॉटरी मुख्यालय पहुंचा और समय सीमा से ठीक आठ दिन पहले ही उसने अपनी पुरस्कार राशि प्राप्त कर ली।
लॉटरी अधिकारियों ने दिलाई याद
लॉटरी अधिकारियों ने बाद में इस घटना का इस्तेमाल लोगों को अपने पुराने टिकटों की नियमित रूप से जांच करने की याद दिलाने के लिए किया और कहा कि कई पुरस्कार अक्सर इसलिए नहीं मिल पाते हैं क्योंकि विजेता भूल जाते हैं कि उन्होंने टिकट कहां रखा था। लॉटरी ने कहा, “हमेशा की तरह, न्यू जर्सी लॉटरी खिलाड़ियों को अपने टिकट जांचने की याद दिलाती है। हालांकि जैकपॉट पुरस्कारों का लावारिस रह जाना दुर्लभ है लेकिन कई छोटे टिकट महीनों या वर्षों तक दराजों और जेबों में लावारिस पड़े रहते हैं जबकि उन्हें नकद में भुनाया जा सकता है।”
एटीएम कार्ड से मिलती है दुनिया की ‘सबसे सस्ती’ रोटी
ईरान ने पिछले कुछ सालों में अपने ब्रेड सब्सिडी सिस्टम को डिजिटल बना दिया है। कई रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार ने बेकरी नेटवर्क को बैंकिंग सिस्टम और डिजिटल कार्ड से जोड़ दिया है ताकि रियायती आटे और ब्रेड की बिक्री सीधे रिकॉर्ड हो सके और सब्सिडी के गलत इस्तेमाल को रोका जा सके। इस सिस्टम में लोग अपने बैंक कार्ड या डिजिटल आईडी का उपयोग करके तय कोटा के अनुसार रोटी खरीदते हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें
