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अमेरिका में कल मतदान: ताबड़तोड़ बंदूक़ें खरीद रहे लोग, ऑटोमैटिक राइफल लेकर प्रदर्शन

आंकड़ों के अनुसार, इस साल मार्च में 37 लाख लोगों के बैकग्राउंड की जांच की गई, जिन्होंने बंदूक खरीदने के लिए आवेदन किया था। उसी तरह जून में यह बढ़कर 39 लाख और सितंबर तक यह बढ़कर 2 करोड़ 88 लाख तक पहुंच गया है।

Author Translated By नितिन गौतम नई दिल्ली | Updated: November 2, 2020 10:08 AM
US President election, gun purchase, civil warअमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव की वोटिंग से पहले बड़ी संख्या में बंदूकों की बिक्री हुई है। (एपी फोटो)

आर्थर बेंसन का कहना है कि उनकी इच्छा नहीं है लेकिन फिर भी उन्हें बंदूक खरीदनी पड़ रही है। पेनसिल्वेनिया के निवासी 34 वर्षीय बेंसन का कहना है कि इन गर्मियों में उन्होंने ब्लैक लाइव्स मैटर अभियान का आयोजन किया था। बेंसन के अनुसार, वह 50 के करीब लोग थे लेकिन 300 लोगों का हुजूम उनके खिलाफ आ गया, जो ट्रंप के झंडे लिए हुए थे और ऑटोमैटिक बंदूके हवा में लहरा रहे थे। अश्वेत बेंसन का कहना है कि ‘अब उन्हें भी बंदूक लेना मजबूरी है।’

बता दें कि अमेरिका में बड़ी संख्या में लोग बंदूकें खरीद रहे हैं। विरोध प्रदर्शन, ध्रुवीकरण और माहमारी के इस दौर में कई लोग पहली बार बंदूकें खरीद रहे हैं, जिससे 3 नवंबर को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव को लेकर चिंता बढ़ गई है। एफबीआई के आंकड़ों के अनुसार, बंदूक खरीदने से पहले ग्राहक की जो बैकग्राउंड की जांच होती है, जिसमें जबरदस्त उछाल आया है।

आंकड़ों के अनुसार, इस साल मार्च में 37 लाख लोगों के बैकग्राउंड की जांच की गई, जिन्होंने बंदूक खरीदने के लिए आवेदन किया था। उसी तरह जून में यह बढ़कर 39 लाख और सितंबर तक यह बढ़कर 2 करोड़ 88 लाख तक पहुंच गया है। बीते पूरे साल बैकग्राउंड जांच की संख्या 2 करोड़ 84 लाख रही थी, जो कि इस साल सितंबर माह में ही पार हो गई है।

एक सर्वे के मुताबिक बंदूक खरीदने वाले 40 फीसदी लोग वो हैं, जो पहली बार बंदूक खरीद रहे हैं। बता दें कि इससे पहले इतनी बड़ी संख्या में साल 2016 में बंदूके खरीदी गई थीं। उस समय भी अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव हुए थे।

बेंसन के अनुसार, यह साल सामाजिक रूप से बेहद अशांत रहा है। इस दौरान हमारी परंपराओं पर सवाल खड़े हुए हैं। इसलिए हम अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। बेंसन का कहना है कि “उनके कई रिश्तेदारों और जान-पहचान वालों ने बूंदके खरीदी हैं और उन्हें चिंता है कि यहां ‘गृह युद्ध’ भी छिड़ सकता है। जब आप देखते हैं कि दूसरी तरफ के लोग कानून की परवाह नहीं कर रहे हैं तो आपको सोचना पड़ता है कि ये लोग क्या कर सकते हैं। यह एक सांस्कृतिक युद्ध है।”

चार दिन पहले ही इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप ऑफ पॉलिसीमेकर्स एंड रिसर्चर्स ने चेतावनी दी है कि यूएस में राष्ट्रपति पद के लिए हो रहे चुनाव में वो सभी चीजें जैसे तनाव, ध्रुवीकरण और दोनों तरफ हिंसक लोग मौजूद हैं, जिनसे अशांति फैल सकती है। इस महीने की शुरुआत में ही अमेरिका की होमलैंड सिक्योरिटी ने घरेलू हिंसा के बढ़ते मामलों को देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताया था।

अमेरिका में वामपंथी गुट के कुछ धड़े जैसे सोशलिस्ट राइफल एसोसिएशन और अफ्रीकन अमेरिकन गन एसोसिएशन के लोग भी बंदूके खरीद रहे हैं। अमेरिका चुनाव में भी बंदूकों पर प्रतिबंध एक अहम मुद्दा बना हुआ है। डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जो बाइडेन ने असॉल्ट राइफल्स पर प्रतिबंध लगाने का वादा किया है।

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