ईरान की मदद करने के आरोप में अमेरिका ने एक टेक एग्जीक्यूटिव को गिरफ्तार किया है। अमेरिकी न्याय विभाग के मुताबिक कैलिफ़ोर्निया के एक टेक एग्जीक्यूटिव को उसके लग्जरी समुद्री नज़ारे वाले विला से गिरफ्तार किया गया है। टेक एग्जीक्यूटिव पर आरोप है कि उसने एक दशक से ज़्यादा समय तक ईरान के न्यूक्लियर और मिलिट्री संस्थान को गैर-कानूनी तरीके से एडवांस्ड अमेरिकी नेटवर्किंग और एन्क्रिप्शन इक्विपमेंट सप्लाई किए। 63 साल के आरोपी जमशेद घोमी दोहरी ईरानी-अमेरिकी नागरिकता रखते हैं।

क्या है आरोप?

जमशेद की 35 मिलियन डॉलर की न्यूपोर्ट बीच प्रॉपर्टी से हिरासत में लिया गया और इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट का उल्लंघन करने की साज़िश का आरोप लगाया गया। अधिकारियों का आरोप है कि आरोपी लंबे समय से चल रहे स्मगलिंग ऑपरेशन के ज़रिए ईरान और उसके रक्षा मंत्रालय को सेंसिटिव टेक्नोलॉजी पहुंचाने में मदद की।

आरोपी पर UAE में बिचौलियों का इस्तेमाल करके खरीदारी और शिपमेंट को रूट करने का आरोप है, जिसमें 2011 और 2015 के बीच eBay और PayPal के ज़रिए किए गए 400 से ज़्यादा ट्रांज़ैक्शन शामिल हैं। प्रॉसिक्यूटर का कहना है कि 2014 और 2018 के बीच दुबई में मौजूद फ्रेट फॉरवर्डर के ज़रिए 250 मीट्रिक टन से ज़्यादा नेटवर्किंग इक्विपमेंट ईरान में स्मगल किए गए थे।

अपनी कंपनी के जरिए काम करता था आरोपी

जमशेद घोमी यह काम अपनी कंपनी फ़राज़ परदाज़ रायनेह (FPR) के ज़रिए करता था, जिससे सालाना 10 मिलियन डॉलर से ज़्यादा की बिक्री होती थी। जांच एजेंसियों का यह भी दावा है कि इस फर्म ने 2014 से 2022 के बीच ईरान के रक्षा मंत्रालय को और 2017 से 2023 के बीच उसकी न्यूक्लियर एजेंसी को सप्लाई की। अधिकारियों का यह भी आरोप है कि जमशेद घोमी ने ईरान से 15 मिलियन डॉलर से ज़्यादा की रकम अमेरिकी अकाउंट में ट्रांसफर की और इसे गलत तरीके से विदेशी विरासत बताया। इस पैसे को ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स, हांगकांग, तुर्की और यूएई में शेल कंपनियों के ज़रिए लॉन्ड्र किया गया।

जमशेद घोमी की पर्सनल टैक्स फाइलिंग में लगभग कोई इनकम नहीं दिखाई गई। ITR के अनुसार उसकी सबसे ज़्यादा सालाना इनकम 20,684 डॉलर बताई गई और उसने अपनी कथित दौलत के बावजूद सात अलग-अलग सालों में अर्न्ड इनकम टैक्स क्रेडिट का दावा किया। यह मामला उसकी प्रॉपर्टी होल्डिंग्स के पैमाने को भी दिखाता है।

कैसे बनाया आलीशान घर?

कैलिफ़ोर्निया पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक जमशेद घोमी ने मार्च 2010 में 4.49 मिलियन डॉलर में एक खाली प्लॉट खरीदा और बाद में प्रशांत महासागर के सामने 14,000 स्क्वायर फुट की हवेली बनाने में लगभग 10.49 मिलियन डॉलर खर्च किए। उसकी कंपनी से जुड़े विदेशी पैसे से 7 मिलियन डॉलर से ज़्यादा उस अकाउंट में आए जिसका इस्तेमाल इस बिल्डिंग को फंड करने के लिए किया गया।

ईरान की एटॉमिक एजेंसी पर अमेरिकी ने 2020 में बैन लगाया था और बाद में FPR को 2021 और 2022 में एक अप्रूव्ड वेंडर के तौर पर रजिस्टर किया। फर्स्ट असिस्टेंट अमेरिकी अटॉर्नी बिल एसेली ने कहा, “हम उसे सही जेल की सज़ा दिलाने और उसकी 35 मिलियन डॉलर की न्यूपोर्ट बीच हवेली समेत उसकी संपत्ति ज़ब्त करके ज़िम्मेदार ठहराएंगे। घोमी हमारे घोषित दुश्मनों की मदद कर रहा था और दुनिया के सबसे बड़े आतंकवाद के सरकारी स्पॉन्सर में से एक के साथ बिज़नेस कर रहा था।” जमशेद घोमी को ऑरेंज काउंटी के सांता एना में कोर्ट में पेश होना था और अगर दोषी पाया गया तो उसे 20 साल तक की जेल हो सकती है।

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