डोनाल्ड ट्रंप दूसरे कार्यकाल की शुरुआत से ही अमेरिका में रहे अवैध अप्रवासियों के खिलाफ बेहद सख्त दिखाई दे रहे हैं। अमेरिका लगातार अवैध प्रवासियों को बाहर का रास्ता दिखा रहे है। अब डेमोक्रेट नेताओं ने इस एक्शन पर हो रहे खर्च को लेकर ट्रंप सरकार की नीति पर सवाल उठाए हैं।
अमेरिकी सीनेट की एक समिति के डेमोक्रेटिक सदस्यों की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप सरकार ने करीब 300 लोगों को उनके अपने देश की जगह किसी दूसरे देश में भेजने के लिए कम से कम 40 मिलियन डॉलर खर्च किए हैं।
सीनेट की विदेश संबंध समिति में डेमोक्रेट नेताओं (जिनका नेतृत्व सीनेटर जीन शहीन कर रही हैं) ने इस बात की आलोचना की कि लोगों को उनके देश के बजाय किसी तीसरे देश भेजना बहुत महंगा है, पैसों की बर्बादी है और इस पर ठीक से निगरानी भी नहीं रखी जा रही। उन्होंने यह भी कहा कि इस नीति की गंभीर जांच होनी चाहिए क्योंकि अभी यह ज्यादातर बिना खुली जानकारी के चलाई जा रही है।
मार्को रूबियो बोले- गैंग के लोगों को नहीं रखना चाहते
अमेरिकी विदेश मंत्रालय डिपोर्टेशन से जुड़े मामलों के अमली जामा पहनाने के लिए दूसरे देशों से बातचीत करता है। उसने तीसरे देशों में लोगों को भेजने की इस प्रक्रिया का समर्थन किया है। उसका कहना है कि यह ट्रंप के अवैध प्रवासियों को रोकने के अभियान का हिस्सा है।
पिछले महीने सीनेट की सुनवाई में जब विदेश मंत्री मार्को रूबियो से तीसरे देशों में भेजे गए लोगों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, “हमने ऐसे लोगों को गिरफ्तार किया, जो गैंग के सदस्य थे और उन्हें देश से बाहर भेज दिया। हम अपने देश में गैंग के लोगों को नहीं रखना चाहते।”
यह रिपोर्ट इन समझौतों की अमेरिकी संसद द्वारा की गई पहली समीक्षा है। इसमें बताया गया है कि पांच देशों – इक्वेटोरियल गिनी, रवांडा, अल सल्वाडोर, एस्वातिनी और पलाऊ को लोगों को अपने यहां रखने के बदले एकमुश्त रकम दी गई। इन देशों को लगभग 4.7 मिलियन डॉलर से 7.5 मिलियन डॉलर (₹42.57 करोड़ से ₹67.94 करोड़) तक की राशि दी गई ताकि वहां प्रवासियों को भेजा जा सके।
47 देशों के साथ समझौते अलग-अलग चरणों में
रिपोर्ट में जिन देशों का जिक्र किया गया है, वे उन सभी देशों का सिर्फ एक छोटा हिस्सा हैं जहां ट्रंप सरकार लोगों को भेजने की कोशिश कर रही है। न्यूज एजेंसी एपी द्वारा देखे गए सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, कुल 47 देशों के साथ ‘तीसरे देश’ में लोगों को भेजने के समझौते अलग-अलग चरणों में चल रहे हैं। इनमें से 15 समझौते पूरे हो चुके हैं और 10 लगभग पूरे होने वाले हैं।
सरकार कुछ देशों के साथ ऐसे समझौते भी कर रही है, जहां अमेरिका में शरण मांगने वाले लोगों को तब तक रखा जा सके, जब तक उनकी शरण की अर्जी पर फैसला नहीं हो जाता। ऐसे 17 समझौते बातचीत के अलग-अलग चरणों में हैं, जिनमें से 9 पहले ही लागू हो चुके हैं। हालांकि सरकार का कहना है कि लोगों को वहां भेजने के लिए समझौते का पूरी तरह से पूरा होना जरूरी नहीं है।
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