मध्य-पूर्व में एक बार फिर हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। अमेरिका द्वारा बुधवार को ईरान के खिलाफ नई सैन्य कार्रवाई शुरू किए जाने के बाद क्षेत्र में जवाबी कदमों का सिलसिला तेज हो गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार यह अभियान अमेरिकी पूर्वी समय (ET) के अनुसार बुधवार सुबह करीब 6 बजे शुरू हुआ, जो भारतीय समय (IST) के अनुसार दोपहर लगभग 3:30 बजे था।
अमेरिका का कहना है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को निशाना बनाना था, जिनका इस्तेमाल होर्मुज जलमार्ग में अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए खतरा पैदा करने में किया जा रहा था।
ईरान के सैन्य ठिकानों पर अमेरिकी एयरस्ट्राइक
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक इस अभियान के दौरान ईरान के तटीय रक्षा ठिकानों, क्रूज मिसाइल से जुड़े ठिकानों और सैन्य लॉन्च साइटों पर हवाई हमले किए गए। वाशिंगटन का दावा है कि इन हमलों का मकसद समुद्री व्यापार की सुरक्षा सुनिश्चित करना और क्षेत्र में अमेरिकी तथा सहयोगी देशों के हितों की रक्षा करना है। यह कार्रवाई कई घंटों तक चली और इसे हाल के महीनों की सबसे अहम सैन्य कार्रवाइयों में गिना जा रहा है।
इधर, ईरान ने भी कड़ा जवाब देने का दावा किया है। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और सरकारी मीडिया ने कहा कि बहरीन सहित खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी हितों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है। ईरानी सैन्य अधिकारियों ने यह भी कहा कि यदि अमेरिका अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रखता है तो जवाब और अधिक सख्त हो सकता है।
होर्मुज जलमार्ग को लेकर भी ईरान का रुख पहले से अधिक सख्त दिखाई दे रहा है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि जब तक उसकी सुरक्षा और राजनीतिक मांगों पर उचित प्रतिक्रिया नहीं मिलती, तब तक इस रणनीतिक समुद्री मार्ग को लेकर कड़े कदम उठाए जा सकते हैं। हालांकि अंतरराष्ट्रीय शिपिंग पूरी तरह बंद होने की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।
इन घटनाओं के बीच पूरे मध्य-पूर्व में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। कई देशों ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है, जबकि वैश्विक तेल बाजार भी इस तनाव पर नजर बनाए हुए है। होर्मुज जलमार्ग से दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल गुजरता है, इसलिए यहां बढ़ता तनाव ऊर्जा बाजार और वैश्विक व्यापार दोनों के लिए चिंता का विषय बन गया है।
फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच किसी युद्धविराम या समझौते की घोषणा नहीं हुई है। संयुक्त राष्ट्र समेत कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है। आने वाले घंटों और दिनों में इस टकराव की दिशा पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियानों का विस्तार करने की धमकी दी है, जिसमें देश के पुलों और बिजली संयंत्रों को निशाना बनाना शामिल है। उन्होंने कहा कि ईरान अगर परमाणु वार्ता में लौटने से इनकार करता है तो अगले सप्ताह स्थिति वास्तव में खराब हो जाएगी। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक
